सम्मानित होती हिंदी कुपत्रकारिता

शनिवार, 2 अक्तूबर 2010

हमारे देश में कुछ हो न हो लेकिन हिंदी दिवस, हिंदी सप्ताह, हिंदी पखवाड़ा बड़े जोरशोर से मनाया जाता है फिर उसके बाद हिंदी के ठेकेदार जो साँस रोकते हैं तो अगले साल ही छोड़ते हैं। गली-मौहल्ले से लेकर गाँव स्तर तक के संगठन अंतर्राष्ट्रीय तो क्या हिंदी के उत्थान के लिये अंतर्बृह्माण्डीय आयोजन तक करने पर आमादा हो जाते हैं। इन आयोजनों में भाषा के ठेकेदार खूब बढ़चढ़ कर गाल बजाते हैं।
हद तो नहीं हुई है क्योंकि अभी और दुर्गति बाकी है हिंदी और साथ ही साथ पत्रकारिता की। अभी हिंदी दिवस पर उज्जैन में जो हुआ उसे देख कर अनुमान लगाया जा सकता है कि हमारे देश में हिंदी का क्या भविष्य है। मालवा रंगमंच समिति, उज्जैन और कृतिका कम्युनिकेशन, मुंबई के संस्थापक केशव राय ने उज्जैन के कालिदास संस्कृत अकादमी से सहयोग लेकर अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद और विश्व हिंदी सेवा सम्मान अलंकरण समारोह रच डाला। माल-पानी का जो बजट बनाया होगा जाहिर सी बात है कि जब मामला अंतर्राष्ट्रीय स्तर का दिखने का हो तो कितना होगा ये तो आप अंदाज लगा सकते हैं।
सबसे बड़ी और प्रमुख बात तो ये है कि इसमें ब्लॉग जगत के महावणिक समाचार विक्रेता यशवंत सिंह जिन्होंने ब्लॉगिंग में लोगों की भावनाओं को विक्रय की वस्तु बना कर एक शुद्ध बनिया की दुकान भड़ास फ़ॉर मीडिया(यानि मीडिया के लिये भड़ास जो कि भड़ास की ऊर्जा को मीडिया के लिये इस्तेमाल करेगी, दुकानदारी चला ली। लोग इस वणिक को पत्रकार और ब्लॉगर माने बैठे हैं इससे बड़ी दुर्मति और क्या हो सकती है? इसे विश्व हिंदी सम्मान से सम्मानित करा गया ये जान कर भड़ास निकल ही पड़ी कि अब संसार में कोई नहीं बचा इस सम्मान के लिये। यशवंत सिंह खुश हो जाओ कि हम तुम्हारी लेकर तुम्हें पब्लिसिटी दिला रहे हैं तुम्हारे लिये तो ये भी शुभ है पर हम तो लेंगे।
जय जय भड़ास

4 टिप्पणियाँ:

Dr.J.P.Tiwari ने कहा…

Bahut hi satik baat satik samay pr. Koi bharosa nahin benchne wale kyaa - kya na bench de, lekin yah bhi utna hi sahi hai ki kadrdaan. rakhwale abhi maujoood hain. Baat Bhasha ki ho ya Rashtr ki. Apradhi ki bahut adhik nahin chalti. Jo log bhi Hindi Bhasha se khelenge we hindi ki lahron me bahte- bahte samudr me sama jaayende. Pareshan mt hoiye...............Thanks for alertness.

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

भई वाह ! यशवंत सिंह को भाई सुरेश चिपलूणकर के शहर में ब्लॉगिंग के लिये विश्वस्तरीय सम्मान दिया जा रहा है हिंदी ब्लॉगिंग का इससे अधिक पतनोन्मुखी आंकलन होना भला समझ नहीं आता क्या???शायद सुरेश भाई ने अकादमी के चट्टुओं को तेलमालिश करने का समझौता न करा हो यह एकमात्र कारण समझ आता है। यदि सुरेश भाई भी सम्मानित करे गए हों तो भला हो आयोजकों का कि उन्हें दिनौंधी-रतौंघी या मोतियाबिंद है लेकिन अंधे नहीं हुए
जय जय भड़ास

बेनामी ने कहा…

अबे चुतये तेरे को किसी की भी परशंषा सही नहीं लगती

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

वास्तविक में ये हिंदी के पत्नोमुखी होने की शुरुआत ही तो है, जिस यसवंत को पत्रकारिता में जगह नहीं मिली, मालिक से दलाली के कारन नोकरी से निकला गया आज पत्रकारिता क दलाली कर मीडिया हॉउस के लिए उगाही और दलाली कर रहा ही को सम्मान.
गुरुदेव इन चूतियों को कुछ हो या न हो मगर हमारी हिंदी शर्मशार जरुर है. वैसे भी मुनीन्द्र भाई ने सही कहा कि ये सब टोटका उगाही के लिए ही किया जाता है अब अविनाश को देख लें चुतिया बलात्कारी है, अख़बारों से चरित्रहीन होने के कारन ही निकला गया है और हिंदी में गोष्ठी क आयोजन करता है.
ऐसे ऐसे दलालों और चोट्टों के कारण ही हिन्दी रसातल में जा रही है.
जय जय भड़ास

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