ये दौर वैश्विक भड़ास का है

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011



ये दौर वैश्विक भड़ास का है मिश्र में क्या हो रहा है सारे टीवी चैनल और समाचार पत्र चिल्ला चिल्ला कर बता रहे हैं। सूडान, यमन, लीबिया वगैरह जैसे देशों में जिस तरह जनता बदलाव के लिये बौखलायी हुई है हम सब जानते हैं।हमारे देश भारत में भी ये पिछले सौ साल से लेकर साठ-पैंसठ साल तक चला जिससे कि देश को राजनैतिक तौर पर अंग्रेजी सत्ता से आजादी मिल गयी और हमारे देश के नेता उस सत्ता पर लोकतंत्र का झुनझुना थमा कर काबिज हो गये और आज तक क्या हालात हुए हैं ये भी भला किससे छिपा है। सब जानते हैं कि एक अशिक्षित, जाहिल या पढ़ा-लिखा स्वार्थी,भ्रष्ट नागरिक अपने हितों को सर्वोपरि रख कर ही वोट देता है। अपने जैसे नेता चुनता है तो यदि हमारे नेता भ्रष्ट और मक्कार हैं तो इसमें क्या अजीब है?जिन देशों में ये जनांदोलन अभी आंधी के मानिंद चल रहे हैं जब ये आंधी कुछ खून पीकर शांत हो जाएगी तो पता चलेगा कि उस देश के नागरिक तो अभी तक लोकतंत्र के लिये दिमागी तौर पर परिपक्व हैं ही नहीं जैसे कि हमारे देश में है। फिर यह दौर कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन करना और उसके लिये नेता तलाशना जनता की नियति रहेगी। जब तक लोग अपने आप को देश की जड़ों से जुड़ा नहीं स्वीकारते, राष्ट्रहित सर्वोपरि नहीं स्वीकारते ये चलता रहेगा। एक हुस्नी मुबारक मर जाएगा तो उसके बाद कतार से हज़ारों आते रहेंगे जब तक जनता खुद अपना हित राष्ट्रहित से नहीं जोड़ती। अभी भी जो लोग वहां दुकानों में लूटपाट कर रहे हैं वे उसी देश के नागरिक हैं कोई दूसरा या विदेशी तो नहीं , खुद ही सोचिये कि क्या ये अक्ल के कच्चे राष्ट्रहित समझते हैं या बस बदलाव न होने की बोरियत से ऊबे हुए लोग हैं जिनके लिये ये आंदोलन सिर्फ़ एक मजेदार एडवेंचरस बदलाव है या फ़िर बाद में कट्टरपंथी ताकतों से लड़ेंगे जो आज साथ में घुल रही होंगी?
जय जय भड़ास

3 टिप्पणियाँ:

मनोज द्विवेदी ने कहा…

Pahli bar is mudde par sahi vishleshan padhane ko mila...aapa thank you

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

ये बात सही है कि यदि देश की जनता लोकतंत्र जैसी व्यवस्था के अनुकूल न हो तो हालात हमारे देश जैसे ही होते हैं। देखिये न कि अभी भी हमारे देश में लोगों के दिमाग सामंती प्रथाओं और राजाओं के हिसाब से चलते हैं। लोग अभी भी खुद को प्रजा और सांसद विधायकों को राजा मान कर ही व्यवहार करते हैं खास तौर पर महाराष्ट्र में तो मैंने ये बड़ी गहराई से नोटिस करा है।
सही विवेचन
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

यदि आप के पास ताकत है ,पैसा है ,तो लोगो को उकसाओ , पहले से बठे पापी को गद्दी से उतारो और खुद बैठ जाओ ,और और बड़े पापों को रचते जाओ

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