भ्रष्टाचार या संस्कार, पराभव होती संस्कृति के लिए दुसरे को दोष देना हमारी नियति.

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

"वो सभी दिखने में अछे घर से लग रहे थे मगर सभी शराब के नशे में धुत्त थे"

जी हाँ ये कल की ही बात है, भ्रष्टाचार पर भारत में राष्ट्र व्यावी आन्दोलन के लिए लोगों का हुजूम सभी जगह आन्दोलन के मुद्रा में थे मगर इस आन्दोलन की वास्तविकता क्या है ? जिस राष्ट्र के चपरासी से लेकर प्रधानमंत्री तक भ्रष्ट हो, जिस देश में भ्रष्टाचार की सीख गारों से मिलती हो वहां अगर हम भ्रष्टाचार पर आन्दोलन के लिए सड़क पर उतर रहे हैं तो नि:संदेह ये शताब्दी का सबसे बड़ा मजाक होगा.

कल ही हमारे एक जानकार जो पूना में रहते हैं शाम को ऑफिस से अपने घर वापिस आ रहे थे, घर के नजदीक पहुँचने पर पास के ही दूकान से जरुरत का सामान लेने पहुंचे तभी अचानक कुछ लड़कों ने उन्हें पकड़ लिया और मार पिटाई करने लगे. मेरे परिचित कि समझ में जब तक कुछ आता तब तक लड़कों ने उन्हें जख्मी तक कर दिया. दुकानदार जो कि पुराना था ने ना ही उस लड़के को भगाया और ना ही पुलिस को खबर किया. जख्मी हालत में ही इन्होने 100 नंबर डायल कर पुलिस को खबर किया तब तक सभी लड़के भाग चुके थे.

पुलिस ने आने के बाद बताया कि इस तरह कि घटना यहाँ होती है मगर हमें किसी ने आज तक बुलाया ही नहीं और न ही बताया कि हम इस पर कार्रवाई करते. एक अन्य महिला ने बताया कि ये लड़के अक्सर यहाँ आ कर शराब पीते हैं और हंगामा करते हैं मगर दुकानदार अपने व्यवसाय के कारण इनको कुछ नहीं कहता.

हमारे जानकार ने कहा कि वो सभी लड़के देखने में अच्छे घर से लग रहे थे, और जाते जाते किसी मार पीट की बात कर रहे थे क्या अच्छे घर के लड़के इसे होते हैं ?

कहने का मतलब सिर्फ इतना कि हम किस भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं जब हम अपने घरों में संस्कार नहीं दे पाते हैं. कोई बाबा रामदेव है जो अपने धंधे पर लोगों की आस्था बेचता है. कोई राजनीतिक पार्टी है जिसे इस मुद्दे पर अपनी रोटी सेंकनी है, कोई कहता है कि वो सामाजिक संगठन है जो समाज सेवा करता है तो कोई भ्रष्टाचार को गाली देता हुआ लोगों के हुजूम में शामिल हो जाता है मगर क्या हम वाकई भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं ?

बदलते ज़माने के साथ जीवन के बढ़ते सूविधा और ऐयाशी भरा जीवन अपने बच्चों को देने के बजाय संस्कार को पतित करता हमारा आज का समाज अपने घर को बदल ले, अपने बच्चों को नैतिक शिक्षा का पाठ दे, जीवन की वास्तविक ज्ञान से रु ब रू कराये तो हमें इस बे फिजूल के मुद्दे के लिए किसी को राजनीति करने का मोका देगा.

2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

हम किस भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं जब हम अपने घरों में संस्कार नहीं दे पाते हैं.
सत्य वचन महाराज.....
भइया जिसे जिसे दुःख था कि रजनीश भाई कहीं खो गये हैं वो आकर देख लें कि भाई ने अपनी उपस्थिति दर्शा कर फिर भड़ास के मंच पर धमाधम शुरू कर दी है।
साआआआअव्व्व्व्व्व्व्वधाआआआअन्न्न.....;)
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

अकले आदमी को डर होता है की कही वो इन सब मे उलझ कर मारा न जाये , न ही बेचारे को सही तरीके से कार्यवाही करने का पता होता है , मेरे विचार से रजनीश जी सही जानकारी सभी के लिए उपलब्ध होने पर इस बीमारी का इलाज हो सकता है

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