अंततः प्रवीण शाह और अमित जैन दोनो गधे नहीं बल्कि महागधे ही सिद्ध हुए - भाग सात

गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

भड़ास के सदस्य जो भदेसपन का देशज स्वाद समझते हैं वे खुद को गधा, सुअर,कुत्ता स्वीकारने से कभी इन्कार नहीं करते क्योंकि जाहिल, अनपढ़, गंवार, मजदूर, किसान जो गालियां देकर बात करते हैं। खुश होते हैं तो गाली देकर गले लगा लेते हैं दुखी होते हैं तो गाली देकर रो लेते हैं।
अमित जैन से सीधे सवाल कि
* तुम अजमल आमिर कसाब का नाम नहीं जानते
* तुम्हें हिंदी तक ठीक से लिखनी नहीं आती
* कम्प्यूटर तकनीक की समझ में तुम वीडियो और स्थिर इमेज में अंतर नहीं जानते
* "शोध" की पद्धति के बारे में तुम जानते नहीं
* अनूप मंडल का विरोध करने के चक्कर में तुम डा.रूपेश श्रीवास्तव, बहन मुनव्वर सुल्ताना, श्री मोहम्मद उमर रफ़ाई, श्री भूपेश श्रीवास्तव, श्रीमती भारती सक्सेना सभी को मूर्ख जता रहे हो।

मैंने तुम दोनो को गधा नहीं महागधा कहा था जिसकी तस्वीर तुम अब तक नहीं ला सके; प्रवीण शाह अब तक मुंबई या अन्य जगहों के उन स्वयंभू साइंटिस्टों को नहीं बता पाए जो कि प्रकरण की विशिष्ट पद्धतियों से जांच करेंगे। तुम घूम फिर कर विषय को घुमा ही रहे हो लेकिन प्रकाश गोविन्द ने जो बात शुरू करी थी उसमें तुम बिलबिला कर मात्र अपनी मानसिकता के चलते ही सहयोग कर रहे हो सब जानते हैं कि "नीचे के बाल" शब्द उसके दिये हुए हैं जो कि अब तुम्हें उचका कर गायब हो गया और तुम हो कि पगलाए पड़े हो।
जय जय भड़ास
संजय कटारनवरे
मुंबई

2 टिप्पणियाँ:

अनोप मंडल ने कहा…

संजय जी निःसंदेह आप हमारी सोच से सीधे-सीधे सहमत नहीं हों लेकिन आप सत्य के पक्षधर हैं हमारे लिये बस इतना ही काफ़ी है। परमात्मा आपको उत्तम स्वास्थ्य और सदबुद्धि बनाए रखे। अभी प्रवीण शाह कमेंट करेगा
सादर नमन

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

प्रकाश गोविन्द और प्रवीण शाह उचका कर धीरे से निकल लिये और संजय कटारनवरे ने अनूप मंडल बनाम जैन युद्ध की तोप सम्हाल ली। संजय को तो तोप चलाने से काम बुड्ढा मरे या जवान....
पहले वकील रणधीर सिंह सुमन जी फिर भाई गुफ़रान सिद्दीकी के बाद डॉ.दिव्या श्रीवास्तव और अब अमित जैन।
जय जय भड़ास

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