अगर कोई अन्धविश्वाश की बात करता है तो मै उस का विरोध कही भी करने को तैयार हू - इस लाइन मे डॉ रूपेश श्रीवास्तव अंध विश्वाशीहै कहा लिखा है

शुक्रवार, 6 मई 2011

प्यारेहरियाणा के ताऊ की बावली भैस की पूछ मे लगे हुए गोबर मे बिलबिलाते ,छिपते  हुए कीड़े श्रीमान संजय कट गया जी  ,
किर्पया उपरोक्त लाइन मे कहा लिखा है की मैंने डॉ रूपेश श्रीवास्तव को अन्धविश्वाशी कहा है ,
फूटे हुए नैनो वाले नैनसुख जी , आप अपने दिदे खोल कर देखो , फोड कर देखोगे तो मै क्या सभी तुम्हे नमन करेगे और बताओ ये कहा लिखा है ?

 और बेवखुफ़ अगर तुम बार बार सविधान मे साक्षी की महत्ता जानते हो तो किर्पया savidhan me likhit  THE DRUGS AND MAGIC REMEDIES act 1954  को दोबारा से अपने दीदे खोल कर पढ़ लो , अगर नहीं मिल रहा तो ये लो ,तुम्हारी सेवा मे, फ्री मे, तुम्हारे मतलब का पार्ट 
102.(c) " magic remedy " includes a talisman, mantra, kavacha, and any other charm of any kind which is alleged to possess miraculous powers for or in the diagnosis, cure, mitigation, treatment or prevention of any disease in human beings or animals or for affecting or influencing in any way the structure or any organic function of the body of human beings or animals ;

अब  जो तुम बार बार साक्ष्यों की महत्ता के उपर कूद रहे हो ,वो तो यही आ कर खतम हो जाती है , अब आगे से अपना पोंगा पन्त मत झडना 
या तुम सविधान को सिर्फ नाम से जानते हो , अगर कभी कुछ इस के बारे मे पढ़ा है तो जरुर बताना , बिना सर पैर की मत हाकना ,जो तुम आर बार करते हो , 
और हा दोस्त अगर तुम कार्टून व्यंग से परेशान हो कर डॉ साहब से शिकायत करने जा रहे तो 
उनक्ले से सिकायत जरुर करना ,की uncle मेरे को अमित चिडाता है


 मनीषा बहन क्या भडास पर आज कल  शिक्षा की बात होने लगी ?
बहन यहाँ पर कोन किस की बात को गहराई से लेता है , जरा इस बात पर भी रौशनी अवश्य करे

6 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अमित भाई संजय कटारनवरे कुछ लिखें इससे पहले मैं कूद पड़ता हूं कि संविधान द्वारा एक व्यवस्था ये भी है कि किसी भी एक्ट में एमेंडमेंट होने की गुंजाइश रहती है तो अगर कल को हमारे नेता संसद में मेरी माताजी की मृत्यु से जुड़े "पपीता प्रकरण" को मान्य कर लिया जाए और ये सब संवैधानिक हो जाए। संविधान द्वारा स्वीकृत एक्ट में सुधार हो जाएगा यदि आप सब इसी तरह से जूझे रहेंगे। यदि आप मुझे अंधविश्वासी मानें तो भी और नहीं भी मानें तो भी मेरी सेहत पर कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला है मैं जो हूं वही रहने वाला हूं भड़ासी का भड़ासी कभी भी बौद्धिक जुगाली करने वाला प्राणी नहीं बन सकता।
जय जय भड़ास

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

अंधे का विश्वास,अंधविश्वास और विश्वास का अंधापन लेकर अमित भाई शायद भ्रमित हो गए हैं।डा.रूपेश श्रीवास्तव या मुझे अंधविश्वासी लिख भी दिया जाए तो सचमुच कोई फर्क नहीं पड़ता हम तो जैसे हैं वैसे ही रहेंगे बिना चश्मे के दुनिया देखने वाले किसी पूर्वाग्रह के चश्मे की आवश्यकता नहीं है न धर्म न बौद्धिकता....
जय जय भड़ास

अनोप मंडल ने कहा…

तुम जो हो सो हो...
तुमने जिस तरह से अपने नंगवीर अंदाज में संजय कटारनवरे को उत्तर दिया है उससे पता चल रहा है कि तुम और तुम्हारा वकील प्रवीण शाह कितने तार्किक हैं। तुम्हारे राक्षसी जाल को तोड़ना इतना आसान नहीं है लेकिन अब लोग जागृत हो रहे हैं तुम्हारा मायाजाल चरमरा रहे हैं जिससे तुम बौखला कर इस तरह से बचने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। तुम कितना भी अंधविश्वास-अंधविश्वास की रट लगाओ पोल तो खुल ही रही है। अब सुरेश वर्मा और शालू जैन को बुला लेना
जय जय भड़ास
जय नकलंक देव

sanjay ने कहा…

अमित जैन तुम जो कर रहे हो वो सब देख रहे हैं और जो मैं कर रहा हूं वो भी देखा जा रहा है। तुम्हारे ढकोसले खुल रहे हैं तो तुम अपनी खीझ निकालने के लिये जो कर रहे हो उसपर मैं तुम्हें माफ़ करता हूं लेकिन मैं सत्य के पक्ष में रहूंगा भले ही तुम्हारा वकील प्रवीण शाह तर्कसिद्ध बात को ही सत्य मानता रहे। कुतर्क भी तर्क होता है भले ही वह बुरा तर्क हो। सत्य तर्कातीत और तर्कबाह्य है डा.रूपेश श्रीवास्तव ने जो कहा वह पुरातन काल से तमाम ऋषि-मुनि कहते आए हैं। तुम्हारे असल चेहरे को सामने लाने का अभियान चलता रहेगा
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

@ संजय
मैं तुम्हें माफ़ करता हू

वाह वाह वाह क्या बात है संजय महाराज

खिसयानी बिल्ल्ली खम्बा नोचे -वाली कहावत तुमने सिद्ध कर दी

@ डॉ रूपेश श्रीवास्तव
डॉ साहब आप अन्ध्विश्वाशी नहीं है ,आप के सामने जों भी किर्या कलाप हुए है क्योकि आप उन की ट्रिक नहीं पकड़ पाए इस लिए आप विश्वाश कर रहे है परन्तु आप भी जानते है की ४० रुपए के पपीते में से ४०० का माल कैसे निकल गया ,हर जादू के पीछे कोई न कोई हाथ की सफाई जरुर होती है
जैसे की किसी को बुखार हुआ और कोई तांत्रिक उसे राख में paracitamol मिला कर दे दे , तो उस का बुखार तो उतर जायेगा परन्तु ये जादू नहीं चालाकी होगी

बेनामी ने कहा…
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