भड़ास परिवार में शामिल होने पर अमित जैन के वकील, छद्म मुखौटा धारी, दुष्ट राक्षस की पहली पोस्ट !

शनिवार, 7 मई 2011

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मेरी वह तस्वीर जो अनूप मंडल, संजय कटारनवरे और प्यारे 'भाविक' के दिल में बसी है ।



" दिल और दिमाग में अटकी बातों को निकाल दीजिये, मन हल्का हो जायेगा "
 
 यह वह टैगलाइन है जो भड़ास की ताकत है... भड़ास के मॉडरेटर्स को आभार मुझे इस परिवार में शामिल करने के लिये... प्रिय मनीषा को शायद कुछ ऐतराज जरूर थे परंतु सभी को इस बारे में निश्चिंत रहना चाहिये क्योंकि मैं ऐसा कोई काम नहीं करने वाला जिससे ' भड़ास ' को कोई आँच आये... दिल-दिमाग में अटकी बातों को निकालने व मन को हल्का करने के लिये ही प्रयोग किया जायेगा यह मंच...

नया हूँ व नियमों से अनजान भी... इसलिये अभी से यह बता दे कोई पुराना, कि क्या इस मंच पर अन्यत्र पहले पेश की जा चुकी पोस्टें लगाई जा सकती हैं... या नियम यह है कि केवल ओरिजिनल पहली बार लिखी गई पोस्ट ही यहाँ देनी है... अन्यत्र लिखी पोस्टों के लिंक इस मंच पर दिये जा सकते हैं कि नहीं ?

अब कुछ मन को हल्का करने के लिये बातें भी...

१- सबसे पहले तो यह जानने का सभी को हक है कि क्योंकि ' पपीता प्रकरण ' की सारी कड़ियाँ अनूप मंडल ने क्योंकि एक प्रत्यक्षदर्शी के नाते लिखी हैं तो वहाँ मौजूद लोगों में अनूप मंडल कौन था ?

२- अनूप मंडल और प्रिय संजय मुझे अमित जैन का वकील कह रहे हैं कितना साम्य है दोनों के शब्दों में ;) यह भी तो सोचो भाई कि अमित जैन ने तो खदेड़ दिया है तुमको... रो-कलप तुम रहे हो... तो जॉर्ज पंचम के यहाँ जा मुकदमा लिखवाने के लिये वकील की जरूरत तुमको है या मुझे ?... :))

३- अनूप मंडल कहता है कि "संजय जी आपको अनूप मंडल का सादर प्रणाम। आप इन राक्षसों से लड़ाई में वैचारिक तौर पर हमारे साथ हैं इसके लिए हम आपके आजीवन आभारी रहेंगे।"... यह भी तो बताओ कि तुम तीन हजार में से किसका जीवन ?

४- और बार-बार यह लड़ाई की क्या बात अनूप ?... जबकि अभी तक तुम्हारी अर्जी पेंडिंग है ।

५- प्रिय संजय कटारनवरे कहते हैं " मैं सत्य के पक्ष में रहूंगा भले ही तुम्हारा वकील प्रवीण शाह तर्कसिद्ध बात को ही सत्य मानता रहे। कुतर्क भी तर्क होता है भले ही वह बुरा तर्क हो। सत्य तर्कातीत और तर्कबाह्य है " अब आप सोचते रहो इस जुमले के बारे में... सोचते-सोचते दिमाग भले ही जलेबी के आकार में आ जाये, मतलब नहीं निकलेगा !

६- डॉ० रूपेश श्रीवास्तव लिखते हैं कि " अमित भाई संजय कटारनवरे कुछ लिखें इससे पहले मैं कूद पड़ता हूं कि संविधान द्वारा एक व्यवस्था ये भी है कि किसी भी एक्ट में एमेंडमेंट होने की गुंजाइश रहती है तो अगर कल को हमारे नेता संसद में मेरी माताजी की मृत्यु से जुड़े "पपीता प्रकरण" को मान्य कर लिया जाए और ये सब संवैधानिक हो जाए। " ... निश्चिंत रहें डॉ० साहब, ऐसा कुछ होने वाला नहीं, इंसान की कौम पीछे की ओर नहीं जाती कभी, आगे बढ़ती है... इसे मान्यता देने का अर्थ होगा बिहार-बंगाल में डायन कह कर औरतों को जिंदा जला देने-नंगा घुमाने वालों को भी मान्यता देना... 

७- मैंने एक बार पहले भी कहा है अब फिर कह रहा हूँ कि तंत्र-मंत्र पर विश्वास करने वाले  क्यों नहीं पाकिस्तान में बैठे देश-शत्रुओं में से दो-चार को कुछ करवा कर मरवा देते... कामयाब होगा यह प्रयोग  तो काफी समस्या हल हो जायेंगी दुनिया की...

आभार!


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2 टिप्पणियाँ:

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

धमाकेदार परस्तुति
पहली सदस्यों वाली पोस्ट के लिए आपका हार्दिक स्वागत

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

प्रवीण जी आपका भड़ास पर दिल और दिमाग में अटकी बातों को उगल कर हल्का होने के लिए स्वागत है लेकिन ध्यान रहे इस मंच पर विचारों में निजी मतभेद कभी भी सामाजिक और राष्ट्रीय हितों के मुद्दों को प्रभावित नहीं करते हैं ऐसा विश्वास है।
जय जय भड़ास

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