मेरा पक्ष : फर्क बताओ और यह भी कि यह कारगुजारी कैसे हुई ?

मंगलवार, 17 मई 2011

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१२ मई को लिया पहला स्क्रीनशॉट




१२ मई को लिया दूसरा स्क्रीन शॉट


आज १८ मई को लिया पहला स्क्रीनशॉट





आज लिया दूसरा स्क्रीन शॉट

चार स्क्रीन शॉट हैं दो १२ मई के व दो आज के, गौर से देखिये और बताइये कि फर्क क्या हैं, फर्क दिखेंगे उन्हीं को, जिनकी आँखें अनूप मंडल के तंत्र-मंत्र संबंधी अनर्गल प्रलाप के बावजूद खुली और निष्पक्ष हैं । यह भी बताइये कि क्या यह सब करना मेरे द्वारा संभव है ?

मित्र संजय कह रहे हैं कि मुझे नंगा कर दिया गया है, मेरी किसी बात का जवाब नहीं दिया जा रहा है और तीन चार ' भाविक ' तंत्र-मंत्र संबंधी पपीता विमर्श को भटकाने का आरोप लगाते हुऐ विष वमन किये जा रहे हैं ।

संचालक महोदय ने खास मेरे देखने के लिये तीन लिंक लगा दिये हैं क्या साबित करना चाह रहे हैं आप इनसे... क्या यह कि जो कोई भी आपकी विचारधारा का विरोध करेगा, अपनी स्वतंत्र राय रखेगा उसके साथ आप ऐसा ही करेंगे... या फिर यह कि गालियाँ देने-लिखने में आपकी कोई बराबरी नहीं कर सकता ?



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4 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

प्रवीण शाह जी
पहली बात- आपके अनुसार भड़ास पर अनूप मंडल का कब्जा है तो सिर्फ़ आप और अमित जैन ऐसे हैं जिन्हें फ़र्क दिखेगा तो आपकी अगली पोस्ट में फ़र्क बताइए दूसरा कोई भी इस विषय पर लिखेगा तो आपको पूर्वाग्रह ग्रस्त प्रतीत होगा।और कुछ मत लिखिएगा इससे पहले ये निवेदन है क्योंक आप गम्भीर आरोप लगा रहे हैं।
दूसरी बात- संजय की बातों का वे ही बेहतर उत्तर दे सकते हैं।
तीसरी बात- विचारधारा के बारे में स्वतंत्र राय क्या है ये नहीं जानना चाहा आपने। जो हरामीपन करेगा हम उसके साथ ऐसा ही करेंगे ये है भड़ास की शैली है। हरामीपन जानने के लिये आप यदि आप उन पोस्ट्स को पढ़ कर भी ऐसा कर रहे हैं तो विचार करिये कि क्या आपके साथ अब तक ऐसा हुआ है मेरे द्वारा??
चौथी बात-गालियां कौन देने ही नहीं जुतियाने में भी भड़ासियों की बराबरी कोई नहीं कर सकता। जो लोग आफ़लाइन हरामीपन करते हैं उन्हें जुतिया भी दिया जाता है क्योंकि हम बौद्धिक नहीं हैं कि झूठी शराफ़त के तमगे के लिये विरोध में गाली-जूता न कर सकें। भड़ास का जीवन दर्शन ही यही है यदि आप इससे भिन्न हैं तो आप कहीं और जगह खुल कर सांस ले सकेंगे जहां लोग अपने चरित्र की सड़ांध पर बनावटी ढकोसलों की बौद्धिकता का इत्र डाल कर ब्लागिंग करते हैं।
पहले आप इन बातों को साफ़ करिये तब आगे लिखें।
आप भड़ास पर हैं तो अवश्य भड़ास निकालिये लेकिन आरोप थोपने के बाद स्पष्ट अवश्य करिये।
जय जय भड़ास

हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा ने कहा…

प्रवीण शाह भाई
स्वतंत्र राय तो अजमल कसाब, दाउद इब्राहिम,अफज़ल गुरू जैसे लोगों की भी है और वो उसे सही मानते हैं। आपके अनुसार आप सेना में मेजर थे तो क्या विचार रखते हैं आप इस स्वतंत्र राय के बारे में आप विरोध कैसे करेंगे?या समर्पण कर देंगें??
इन स्क्रीन शाट्स में अन्तर आप ही बताएंगे इस विषय पर डा.साहब सही कह रहे हैं वरना आप कह ही चुके हैं कि भड़ास पर अनूप मंडल का कब्जा है और अमित जैन के अनुसार तीसरे माडरेटर अनूप मंडल ही हैं। ऐसे में अब सिर्फ़ आप और अमित जैन ही अनूप मंडल की कारगुजारी बताएंगे।
अमित जैन से डा.साहब कई बार कह चुके हैं लेकिन आप और अमित जैन दोनो उन पर भूल जाने का भी आरोप थोप रहे हैं, दोबारा तिबारा या पचास बार क्यों नहीं प्रकाशित करते?? या कुछ है ही नहीं बस ऐसे ही लगे हुए हो कि संचालक भूल गए या संचालक भ्रष्ट और पक्षपाती हो गए या सब लोग फ़र्जी हैं संचालक ने नकली आई.डी.बनाए हैं अमित जैन के इस तरह के आरोप के बारे में आपकी जुबान क्यों चिपक जाती है???
जय जय भड़ास

मुनव्वर सुल्ताना Munawwar Sultana منور سلطانہ ने कहा…

मनीषा दीदी मै आपसे सहमत हूं। अमित जैन जी और प्रवीण शाह जी को संचालको पर लगाए आरोपों का प्रमाण देना चाहिए जो कि ये नहीं देते और भूल जाने का भी आरोप जड़ देते हैं। क्या भड़ास के सारे सदस्य भुलक्कड़ हैं या सारे पाठक भी भूल चुके हैं। प्रवीण शाह लिंक दिया करते हैं जिसमें उन्होंने लिखा है कि डा.साहब ने माना है कि दो पोस्ट थीं जबकि उसकी अगली ही पोस्ट में खुलासा हुआ कि उस लिंक के कमेंट पर डा.साहब ने क्या लिखा था। प्रवीण शाह जी स्पष्ट करिये।
जय जय भड़ास

अजय मोहन ने कहा…

इन दोनो महाझूठे और मक्कारों को डा.साहब कैसे सहन कर रहे हैं? रजनीश भाई तो न जाने किधर बिजी है आजकल वरना अब तक तो उन्होंने ही इनको नंगा करके दौड़ा दिया होता। दोनो एक नंबर के धूर्त है। लो इनकी जब तक ये सच न बोलने लगें;)
जय जय भड़ास

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