अमित जैन मैं हर हाल में आयशा दीदी के साथ हूँ

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

अमित जैन तुम जिस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे हो उसे हम लोग भड़ास से जुड़ने के बाद छोड़ चुके हैं वरना हम लोग तो जिस जीवन को जी रहे थे उसमें ये आम बोलचाल की भाषा है। हमने भड़ास पर आने के बाद जाना कि सम्भोग उस काम को कहते हैं जिसे हम कुछ और ही कहा करते हैं लेकिन इस शब्द से हमारा सड़कछाप पन दब जाता है। रंडी को रंडी न लिख कर वेश्या लिखा जाता है हिजड़े को हिजड़ा नहीं लैंगिक विकलाँग लिखा जाता है। हमारे धर्मपिता और मार्गदर्शक डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी ने तो मनीषा दीदी को एक बहुत छोटी सी भड़ासी डिक्शनरी दी थी लिख कर कि हम लोग अपनी बातें लिखते समय चू**, लं**, गाँ** और **दना जैसे शब्दों को न लिखें ।

क्या तुम्हें लगता है कि तुम इस तरह की गालियों से भरी बात लिख कर बहुत बड़ा काम कर रहे हो। जो हरकत तुमने आयशा दीदी के बारे में लिख कर करी है वह एक घटिया आदमी ही कर सकता है और ऊपर से झूठ भी बोले चले जा रहे हो ताकि तुम्हारी शराफ़त का मुखौटा न फटे।
तुम संजय और मुनेन्द्र जैसे लोगों को मारपीट की बात कर रहे हो तो ये तुम्हें शोभा नहीं दे रही तुम एक असल वैचारिक षंढ हो हम तो सिर्फ़ जिस्मानी हिजड़े हैं तुम वैचारिक हिजड़े हो तुम मारपीट क्या खा कर करोगे। यदि सचमुच मर्दानगी जाग रही हो तो कभी किसी मेरे जैसे हिजड़े से ही लड़ कर देख लेना समझ आ जाएगा कि ताकत किसे कहते हैं संजय भाई और मुनेन्द्र भाई से लड़ना तो सपने में भी मत सोचना।
तुमने आयशा दीदी के लिये जो लिखा वह माफ़ करने जैसा नहीं है इसलिये तुम्हें घसीटा जाना ही सही है। मैं हर हाल में आयशा दीदी के साथ हूँ वैसे तो वो खुद भी तुम्हारे जैसे लोगों को भरपूर जवाब दे सकती हैं लेकिन वो शायद कहीं बाहर हैं और भड़ास के सम्पर्क में नहीं हैं। उनकी फैशन इन्डस्ट्री में तुम्हारे जैसे लोगों की भरमार है।
जय जय भड़ास

4 टिप्पणियाँ:

अजय मोहन ने कहा…

बहुत सही भूमिका बहन, इस मक्कार को इसकी जगह याद दिलाए रहिये
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

wah बहुत बढिया , रूपेश श्रीवास्तव की नीच हरकत को बिलकुल गोल कर रही हो ,वो लिख सकते है की सम्भोग की तस्वीर पोस्ट करो , मतलब इसमें उनका वैचारिक दिवालिया पन तुम्हे नजरनहीं आ रहा , अब बौद्धिकता की बाते करने लगो , अगर रूपेश श्रीवास्तव किसी की पत्नी के बारे में लिख कर की --सम्भोग की तस्वीर पोस्ट करते -- एक बोधिक व्यक्ति बन गए , तो उन की बेटी के लिए अगर उसी तरह की बात किसी ने भी लिख दी तो , तो पिछवाड़े में आग क्यों लग रही है , मैंने ये पोस्ट नहीं डाली थी , परन्तु जिस किसी ने भी डाली वो रूपेश श्रीवास्तव की मंशा जभी समझ गया था,

रही बात लड़ने की तो तुम्हे तो लड़ने के इये कहा ही नहीं गया तुम बीच में अपने आप ही कूद पड़ी

आयशा धनानी ने कहा…

अमित जैन हम जानते हैं कि तुम किस हद तक गिरे हुए हो तुम खुद ही बैठ कर कयास लगा रहे हो कि मेरे पिताजी तुम्हें तुम्हारी पत्नी के साथ की वैसी तस्वीर प्रकाशित करने को कहेंगे। ये सोच तो तुम्हारी है जो पूरी दुनिया ने पढ़ ली है अब तुम कितना भी झूठ बोलो तुम्हारे ब्लॉगर रजिस्ट्रेशन नंबर से पकड़े गये हो। अब तुम्हारा वो बीच में कूदने वाला वकील किधर साँस रोक कर बैठ गया तुम्हारी वकालत करने नहीं आएगा?मंशा तो तुम्हारी साफ़ है कि तुम चाहते हो कि किन्हीं खास बातों पर चर्चा न करी जाए जिनसे तुम्हारी कम्युनिटी का अनूप मंडल के साथ इख्तेलाफ़ है।
जय जय भड़ास

شمس शम्स Shams ने कहा…

आयशा आपा हम सब ही नहीं पूरी दुनिया में बैठे भड़ास के पाठक जान गये हैं कि ये किस मक्कारी से अपनी बीवी के कंधे पर बंदूक चला कर संजय के साथ करी हरामजदगी से बचना चाह रहा है। रही बात ब्लॉगर रजिस्ट्रेशन नंबर की तो ये शाणा उसके बारे में कुछ नहीं बोलता। हो सकता है गूगल भी जैनियों से दुश्मनी रखने लगा होगा अनूप मंडल की तरह इसलिये इसके रजिस्ट्रेशन नंबर को अपनी सिक्योरिटी हैक करवा कर इसके खिलाफ़ साजिश रचवा दी है।
जय जय भड़ास

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