अमित जैन और उनकी बहन का देशभक्ति जताने का तरीका

मंगलवार, 6 सितंबर 2011


आदरणीय अमित जैन जी "आपकी बहन" ने जो करा है उस पर सचमुच मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी लेकिन आपके देवताओं को भी सारी स्त्रीजाति के चरित्र के मूल्यांकन के बारे में आपको बताते समय और उसके बाद ये तथ्य आपके श्रीमुख से भड़ास तक आते समय आपको भी सोचना चाहिये था लेकिन आप भारत सरकार के अधिकारी हैं आप तो कुछ भी कह सकते हैं हम थोड़ी न हैं। आपने अपनी बहन के साथ हमारी बहन को भी अपने वक्तव्य में लपेट लिया इस बात का दुःख है लेकिन "आपकी बहन" और हमारी बहन में कुछ तो अंतर है ही। आपकी बहन नंगे जिस्म पर रंग पुतवा कर जिस तरह से आँख मारने का देशभक्तिपूर्ण कार्य कर रही है ये उसक निजी मामला नहीं सारे देश का मामला हो जाता है वैसे यदि वो बिना रंग पुतवाए ऐसे ही मुंबई में सड़क पर खड़्रे रह कर किसी को भी आँख मारे क्या लेना देना ऐसी तो न जाने कितनी हैं लेकिन वो बेचारियाँ भी कपड़े पहन कर आँख मारती हैं और ग्राहकों को बुलाती हैं।

दो चार पंक्तियाँ जैन रामायण पर भी लिख दो अमित जैन कि जैनियों को

रामायण लिखने की जरूरत क्यों आन पड़ी थी????? प्रवीण शाह की साँस

बंद क्यों हो गयी है?????

जय जय भड़ास

2 टिप्पणियाँ:

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

दीनबंधु एक बात को साफ़ कर दे , की मेरी बहने और तेरी बहने अलग अलग है क्या अगर है तो फिर , या तू मेरा साला है और मै तेरा जीजा , अगर बात ये है तो साले सुधर जा , जीजे से पंगे ना ले ....:)

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

मै तो किसी भी लड़की को बहन कह सकता हु हवस के भूखे दीनू पिल्लै , तेरे लिए पिल्लै सब्द बिलकुल सही है , तेरे जैसे कुते के पिल्लै जवान होते ही अपनी माँ को ही सबसे पहले हवस का निशाना बनाते है ,तू क्या जाने की किसी लड़की का भाई किसी भी लड़की के लिए अपश्ब्द नहीं सुन सकता , तेरी तो कोई बहन है या नहीं मै नहीं जनता , पर अगर होगी तो तेरे जैसे भाई की हवस से भरी नजर से बचने के लिए तुझे अपने घर तक मे नहीं घुसने देती होगी

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