भड़ास लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
भड़ास लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

नितीश बनाम मोदी, भाजपा बनाम जेडीयू : क्या ये लोकशाही है ????

शनिवार, 15 जून 2013

क्या ये लोकशाही है, गठबंधन लोकशाही का अद्वितीय उदाहरण रहा जिसकी परिणति हमने अटल सरकार देखी। गठबंधन जाहिर है एक साझा कार्यक्रम के बिना नहीं बना होगा, हाँ उसमें अटल जी के केंद्र में रहने के कारण पासंग का अंतर किसी ने ना देखा मगर सबकी अपनी अपनी राजनीति है। मोदी के राजनीति में सर्वधर्म समभाव नहीं तो नितीश की राजनीति का जातिगत एजेंडा बदल जाता है।

हर दल को ये स्वतंत्रता है कि वो अपने दलीय निर्णय ले मगर तब तक जब तक वो अकेले चल रहा है, जब साझीदार हों तो मामला नि:संदेह पेचीदा होगा। नितीश को भाजपा से शिकायत नहीं नितीश को आडवानी से शिकायत नही मोदी मामला भाजपा का मामला है  तो पेंच कहाँ और कैसे फंस गया ????

गुजरात बिहार बंगाल आंध्र उत्त्तर प्रदेश सब की अपनी अपनी राजनीति है जहाँ जमीन हर चुनाव में नहीं बल्कि हर साल बदलती खिसकती है, पिछले बिहार चुनाव में मोदी के बिहार प्रवेश पर पाबंदी और भाजपा नेतृत्व तक का सहयोग जाहिर है स्थानीय चुनाव में गठबंधन का मतलब भाजपा और जदयू दोनों जानती रही है और जब गठबंधन के नेतृत्व की बात आती है तो निर्णय एकाकी हो ही नहीं सकता। 

आज जदयू और भाजपा गठबंधन समाप्त हो चुका है और इसका आकलन भी होगा मगर सबका पेंच कहीं न कहीं गठबंधन की राजनीति पर एक प्रश्न लगता है कि गठबंधन कब तक और कैसे ? गठबंधन का निर्णय और नेतृत्व कैसे ?

आज जदयू भाजपा गठबंधन टूटने पर सबकी अपनी अपनी राय है किसी की व्यक्तिगत तो किसी की राजनैतिक, किसी के पसंदीदा तो किसी के नापसन्दी और इसका स्पष्ट झलक दिख रहा है कि कल तक जहाँ गल्बहलिया थी वहां आज गाली गलौज तक की नौबत है। क्या गठबंधन निहित स्वार्थ की पूर्ति मात्र है !!!

एनडीए के टूट में शीर्ष नेता या जमीनी कार्यकर्त्ता से इतर हवाई लोगों (जी हाँ हवाई क्यूंकि वेब एक काल्पनिक दुनिया ही है) गठबंधन को ख़तम करने में अपनी अप्रितम योगदान दिया 

आज भाजपा माने मोदी हो चूका है जाहिर है एनडीए गठबंधन प्रासागिक नहीं रह जाती।

Read more...

हिंदुत्व के नाम पर बाजार सजने लगा है, हिन्दू को बेचने वालों ने हिंदुत्व का दूकान कुछ यूँ खोला है।।।

मंगलवार, 28 मई 2013






Read more...

गूगल चार करोड़ के लिए मेल भी करता है और सावधान भी !!!

गोरखधंधा का जाल है ये मेल भी, ऐसा मेल की करोडपति बना दिया फटाफट और सूचना ऐसा की लौट के बुद्धू को घर पहुंचा दिया। सो हो जाइए सावधान और बिना देखे बिना पढ़े डिलीट ही सुरक्षा का है एक मात्र उपाय।


Read more...

डॉ.दिव्या श्रीवास्तव शायद भारतीय संविधान का टोचन सह न सकेंगी

मंगलवार, 17 अप्रैल 2012





अभी हाल ही में भड़ास पर इंजीनियर दिवस गौड़ जी की टिप्पणी और फिर उस पर निकली भड़ास को पढ़ा । पढ़ कर आगे बढ़ने चला तो देखा कि दिव्या जी ने कुछ नया लिखा है। उनके ब्लॉग पर जाकर पिछली एक पोस्ट देखी जिसमें उन्होंने फ़ेसबुक से किसी नियाज़ अहमद सिद्दीक नाम के बंदे की टिप्पणी (अंग्रेजी में) अपने ब्लॉग पर लगा रखी है और उसे "बेबाक टिप्पणी" का दर्ज़ा दे रखा है। आगे बढ़ कर देखता हूँ तो फ़ेसबुक से इस बन्दे ने(काफ़ी हद तक केजरीवाल गैंग का बनाया एक फर्ज़ी प्रोफ़ाइल लगता है) उक्त बात हटा दी है। साथ ही जब आँख खुली अंधे की तो.... इसने अब फ़ेसबुक पर लोगों से जुड़ना बंद कर दिया है समझ गया होगा कि अम्बेडकर को उंगली कर तो दी लेकिन उसके बाद जो कुतुबमीनार इसके पिछवाड़े घुसेगी उसका क्या होगा लेकिन दिव्या जी तो उन्मादित होकर उसे ललकार रही हैं कि ये भगोड़ापन है।

अरे दिव्या जी ! हम आपके अवांछित शुभचिंतक हैं इसलिये आपको एक भारतीय संविधान के दायरे की सलाह मुफ़्त में दे रहे हैं कि यदि किसी ने आपके ब्लॉग की इस पोस्ट का प्रिन्ट आउट लेकर एक पुलिस कम्प्लेन कर दी तो यकीन मानिये कि राजनैतिक दबाव के चलते न सिर्फ़ आपके ब्लॉग को प्रतिबंधित करा जा सकता है बल्कि आपके खिलाफ़ कानूनी कार्यवाही भी करी जाएगी जैसे कि बी.एन.शर्मा जी का ब्लॉग भंडाफोड़ू (http://bhandafodu.blogspot.com) न जाने किधर चला गया और शर्मा जी भी गुम हो गए। उस नियाज़ ने तो उक्त सामग्री हटा दी है आप इसे भगोड़ापन कहें या समझदारी लेकिन वो आपसे अधिक सयाना है।
यकीन मानिये कि आप कहीं से भी लिखती हों आपके आई.पी.एड्रेस को ट्रेस करना साइबर पुलिस के लिये बाँए हाथ की छोटी उंगली के नाखून से भी छोटा काम है।
यदि ब्लॉगिंग करके घर-परिवार होम करना आपकी खुशी है तो शुभकामनाएं स्वीकारिये। मैं इसे सचमुच ठोस, लौहकार्य मानूंगा। वैसे समझदार को इशारा काफ़ी होता है....
जय जय भड़ास

Read more...

निर्मल बाबा जरा भड़ासियों को भी तो धमकी दो यार... बहुत दिन से किसी बवाल में नहीं पड़े

सोमवार, 9 अप्रैल 2012

मीडिया दरबार नामक हिंदी वेबसाइट चलाने वाले भाई ने मुझे फोन करा कि मैं वेबसाइट पर एक नज़र मारूं। पहुंचा तो देखा कि भाई ने निर्मलजीत सिंह नरूला उर्फ़ निर्मल बाबा की जम कर ले रखी है। इस मीडिया सृजित बाबा ने इन आलेखों के चलते मीडिया दरबार को कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दे डाली। मीडिया दरबार ने अमेरिकन वेबसाइट "हबपेज" पर निर्मल बाबा के ऊपर एक बहस शुरू करी थी जिसकी लिंक उन्होंने अपने आलेख में दी भी है लेकिन अब लग रहा है कि मीडिया दरबार पर बाबा के आतंक का प्रभाव दिखने लगा है चित्र तो बता रहे हैं कि उक्त हबपेज को हटा दिया गया है। एक हिंदी वेबसाइट चलाने वाले को धमका लेना तो इस देश में सबसे आसान काम है जो कि पैसे की ताकत, स्थानीय गुंडे, स्थानीय पुलिस कोई भी कर सकता है।

बहरहाल मीडिया दरबार ने जो भी करा  हम उसका नैतिक समर्थन करते हैं।  ऐसे बाबाओं और मीडिया की भड़वागिरी  में कम से कम हम साथ नहीं हैं। 

Read more...

भड़ास के एक संचालक भाई रजनीश के.झा का भी डॉ.दिव्या श्रीवास्तव जैसा हाल है

शुक्रवार, 30 मार्च 2012


अभी जब लम्बे समय से भड़ास पर अक्रिय(निष्क्रिय नहीं) रहे भड़ास के संचालकों में से एक भाई रजनीश झा जी की वेबसाइट पर गया तो देखा कि विज्ञापनों के जिस लोभ में डॉ.दिव्या जी परेशानी में आ गयी थीं उसी कुचक्र में रजनीश जी भी अटक गये हैं। अब जब तक सब दुरुस्त नहीं हो जाता यही चलता रहेगा फ़िलहाल दिव्या जी का ब्लॉग सही हो गया है यानि कीड़े-मकोड़े हटा कर फ़िनिट डाल दिया गया है लेकिन यदि विज्ञापनों की लालच रही तो दोबारा संभावना है।

जय जय भड़ास

Read more...

एक्ष्पेक्ततिओन्स, ग्रेअटर थे दिस्प्पोइन्त्मेन्त्स….. इसका अर्थ आपको नहीं पता होगा लेकिन हम और डॉ.दिव्या श्रीवास्तव जानते हैं


कल बहुत दिनों बहुत दिनों के बाद भड़ास पर आया तो देखा कि डॉ.रूपेश श्रीवास्तव बहन डॉ.दिव्या श्रीवास्तव की रिश्ते के चलते चोटी खींच रहे हैं। हमारे गुरूजी में एक बात है कि वे चोटी भी खींचते हैं तो इसी मंच पर न कि चुप्पे चुप्पे फोन या ई-मेल से, इसका कारण सीधा सा यही है कि वे एकदम पारदर्शी हैं। मैं खूब समझता हूँ डॉ.दिव्या जी के स्वभाव को कि वे गुरूजी की बात से चिढ़ गयी होंगी लेकिन दिव्या जी इस बात को कभी समझ नहीं पाएंगी कि जीवन की इसी पारदर्शी शैली के चलते मनीषा नारायण, आएशा धनानी, मुनव्वर आपा, स्वयं मैं और न जाने कितने ऐसे लोग हैं जो इनसे रिश्ते में जुड़ गये हैं। गुरूजी ने जो भी बताया जताया दिखाया सिखाया है उसके लिये धन्यवाद शब्द बौना है लेकिन दिव्या के ऊपर तो दया आ ही रही है। यदि वो अपने दंभ के खोल से बाहर आ पातीं तो कम से कम पाबला जैसे दुष्टों से बचतीं और एलियन भाषा(एक्ष्पेक्ततिओन्स, ग्रेअटर थे दिस्प्पोइन्त्मेन्त्स) की बजाए हिंदी की सेवा कर पातीं या अंग्रेजी में न लिखना पड़ता यानि कुल जमा ये कि ब्लॉगिंग ठीक से कर पातीं।

जय जय भड़ास

Read more...

गूगल की नीति हिंदू-मुसलमानों मे बीच शाँति नहीं चाहती शायद....

शुक्रवार, 16 मार्च 2012


कल जब उर्दू से देवनागरी मे लिप्यान्तरण की बात को देखा तो सत्यता परखने के लिये पहले गगल के ट्रान्सलिटरेशन मे गया और लिखा shaitan ke pairokaron ne और इसे उर्दू मे ट्रान्सलिटरे करा। इसके बाद गूगल के अनुवाद यानि ट्रान्सलेशन पर गया और उर्दू मे लिखे हुए को अनुवाद करा तो जो मिला वह आप सबके सामने चित्र के रूप मे प्रस्तुत है। इस बात को मात्र मशीनी गलती कह कर नहीं टाला जा सकता ये तो साफ़ देखा जा सकता है कि कोई तो है जो इस हरकत को जानबूझ कर अंजाम दे रहा है।
जय जय भड़ास

Read more...

ये विष कौन घोल रहा है सभी हिंदू देखें(मुसलमान भी देख लें तो बेहतर)

बुधवार, 14 मार्च 2012


गूगल पर कई भाषाओं और लिपियों के अनुवाद तथा लिप्यान्तरण(ट्रान्सलिटरेशन) की सुविधा दी हुई है। हममें से कई लोग इन्हें प्रयोग भी करते हैं। क्या आपमें से कभी किसी ने भी इस तरफ ध्यान दिया है कि अनुवाद और लिप्यान्तरण में अर्थ का अनर्थ होना तो कई बार देखा गया है परन्तु इस क्रिया में साम्प्रदायिक विष की दुर्गंध आए ये मैंने पहली बार देखा है। मैं सचमुच गूगल की लिप्यान्तरण की इस स्थिति को देख कर परेशान हूँ कि इसके पीछे क्या विचार हो सकते हैं।
आप इस स्क्रीन शॉट द्वारा लिये इस चित्र में देखिये कि उर्दू भाषा में नस्तालिक लिपि में लिखे आलेख के शब्दों " शैतान के पैरोकारों ने" को जब हिंदी भाषा में देवनागरी लिपि में गूगल की सहायता से लिप्यान्तरित करा तो देखती हूँ कि "शैतान के हिंदू अनुयाईयों ने" जबकि मूल आलेख में कहीं भी हिंदू शब्द ही नहीं आया है। निःसंदेह यह एक अत्यंत सोची समझी कपटनीति के अंतर्गत करा जा रहा है ताकि लिपि व भाषा के अंतर को भी आपस के रिश्तों में विष घोल कर लड़ाने के प्रयोग करा जा सके। गूगल के उच्चाधिकारियों को इस मामले की गम्भीर जाँच करना चाहिये।
जय जय भड़ास

Read more...

बेचारी डॉ.दिव्या श्रीवास्तव की हालत पर दया आनी चाहिये

मंगलवार, 6 मार्च 2012

एक और सक्रिय ब्लॉगर के जैनियों के मायाजाल में फँस जाने पर कोई आश्चर्य नहीं है। पिछले कुछ समय से तमाम भड़ासी चुपचाप थे क्योंकि भड़ास पर प्रकाशित सामग्री के चलते बतौर संचालक उत्तरदायित्व डॉ.साहब का और भाई श्री रजनीश झा जी का बनता है। चूँकि देश की संवैधानिक स्थिति ऐसी है कि यदि आप छींक भी दें तो तमाम कानूनी पचड़ों में उलझ सकते हैं। मुंबई पुलिस क्राइम ब्रान्च के कार्यालाय में डॉ.साहब को कई बार घंटों बैठना पड़ा तो हमने भी सोचा कि अब कुछ समय के लिये उपवास करा जाए। लेकिन कब तक??? डॉ.साहब से पूछा तो उन्होंने सीधे कहा कि मैंने किसी को लिखने से मना तो करा नहीं है बस जो हो रहा है वह बताया था आप सबको। मैं तो लिख रहा हूँ अगर किसी ने पुलिस-पुलिस खेला तो हटा दूँगा (गीदड़ भभकी या बंदर घुड़की न देना सचमुच पुलिस-पुलिस खेलने पर ही कंटेंट हटाउंगा ये ध्यान रखना)।
जब भी किसी के विचारों पर जब जी मिचलाए तो उल्टी हो ही जाए बेहतर रहता है। पिछले कुछ दिनों से डॉ.दिव्या श्रीवास्तव जी का ब्लॉगरीय स्वास्थ्य गड़बड़ा गया है बेचारी हिंदू-मुसलमान करते-करते तीर्थंकर ऋषभदेव की राक्षसों द्वारा रची शुद्ध फर्ज़ी कहानियों में उलझ गयी है। वैसे दिव्या जी की बात करने से किसी भी ब्लॉग पर एक प्रकार की पवित्रीकरण प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है ऐसा वे मानती हैं।
जय जय भड़ास

Read more...

वरिष्ठ भड़ासी "एक्स मैन" नहीं रहे

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012


नाम उन्हें महाराष्ट्र पुलिस ने दिया था। एक लम्बे आपराधिक कैरियर के बाद उन्होंने सामान्य जीवन अपनाया था। उन्होंने अपने कैरियर में(भाई अपराध भी तो हमारे देश में एक कैरियर की ही तरह स्वीकृत है यदि यकीन न हो तो अपने राजनेताओं को देख लीजिये) कार चोरियाँ, हत्या, लूट आदि पर अपने हाथ आजमाए थे लेकिन वे सिर्फ़ कारचोरी की विधा में खुद को अधिक सहज पा सके जिसे उन्होंने अपने पूरे कैरियर में अपनाए रखा था। भड़ास से उनका जुड़ना सभ्य समाज के मुखौटाधारी व्यवहार के चलते था। हम सब उन्हें चाचाजी कहा करते थे और जबसे उन्होंने टैक्सी चलाना शुरू करा था तो उनके मनोरंजक अनुभव हम सबके लिये खासी हँसी का विषय बने रहते थे। अच्छे खासे चाचाजी हँसते मुस्कराते चाची को अपने हाथ से चाय पिलाने के बाद अपने पड़ोस में रहने वाली बुजुर्ग दादी टाइप सब्जीवाली को चाय पिला कर आते वक्त सिर दर्द हो रहा है ऐसा कह कर सड़क पर ही बैठ गये। बच्चों ने चाची को दौड़ कर खबर दी जिसपर उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने का मन्सूबा करते करते चाचाजी चले गये। चाची ने हमें खबर दी और हमने उस वरिष्ठ भड़ासी को जिसने ऑफ़लाइन जीवन भर तमाम लोगों के मुखौटों को नोचा, ईश्वर से अशाँत रखने की प्रार्थना के साथ तुर्भे(वाशी) के कब्रिस्तान में दफ़ना दिया। कब्र में लिटाते वक्त भी चाचाजी के चेहरे की मुस्कराहट बरकरार थी जैसे कह रहे हों कि अब मैं देखता हूं उस दुनिया बनाने वाले को..... स्स्साआआल्ला.... पता नहीं क्या चाहता है?
जय जय भड़ास

Read more...

फेसबुक पर भी लोग भड़ास निकालते हैं दिल खोल कर...

मंगलवार, 10 जनवरी 2012





 फेसबुक निःसंदेह एक बेहद ताकतवर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट है जो कि साइबर संसार में अपने सदस्यों की संख्या के चलते किसी छोटे-मोटे देश से कम महत्त्व नहीं रखती। देखिये कि एक बंदा अपने स्टेटस पर क्या लिख कर मँहगाई और सरकारी नीति का विरोध कर रहा है।
प्रधानमंत्री के नाम एक भारतीय नागरिक का चेक


आदरणीय प्रधानमंत्री जी

मेरी तरफ से बहुत बहुत बधाई स्वीकार करे .

चूँकि आपने हम सब भारतीयों का सपना पूरा किया है . हम सब भारतीय अमीर बनने के सपने देखा करते थे ओर अपने एक ही झटके मे हम सबका अमीर बनने का सपना पूरा कर दिया .

इसके लिए आप और सोनिया गाँधी बहुत ही बधाई के पात्र है ..

आपने [ क्योंकि योजना आयोग का मुखिया प्रधानमंत्री होता है ] सुप्रीम कोर्ट मे जो हलफनामा दिया की ३२ रूपये रोज कमाने वाला व्यक्ति अमीर है इससे हम सब भारतीयओ का सर गर्व से ऊँचा हो गया है . आखिर हम सब भारतीय अमीरों की परिभाषा मे जो आ गए .

प्रधानमंत्री जी शायद आपको फ़्रांसिसी क्रांति की कुछ जानकारी जरुर होगी .. एक बार जब फ्रांस का राजा अपनी रानी के साथ अपनी आलीशान बघ्घी मे जा रहा था तो उसके पीछे फ्रांस की भूखी और गरीब जनता रोटी रोटी रोटी चिल्ला रही थी फिर रानी ने बघ्घी रोककर जनता से कहा कि यदि तुम्हारे पास खाने को रोटी नहीं है तो तुम लोग केक क्यों नहीं खाते ?

आज आपकी पार्टी ने इस देश मे भी ठीक यही हालत पैदा कर दिए है ... एक तरफ आपकी सरकार के स्वाथ्य मंत्री संसद मे बयान देते है कि हमने इस देश को मेडिकल टूरिज्म हब बना दिया है लेकिन आश्चर्य कि बात है कि आपकी पार्टी की अध्यक्ष सोनिया जी को भी आपकी सरकार पर विश्वास नहीं है इसलिए ही तो वे अपना खुद का इलाज भारत के बजाय अमेरिका मे करवाने गयी ..

आपको मैंने ३२ रूपये का एक चेक भेजा है और मै आपसे गुजारिश करता हूँ कि आप एक दिन जरा ईमानदारी से ३२ रूपये पर गुजारा करके तो देखिये

Read more...

हड्डियों का पोकलपन है या बस अब बैटरी खत्म होने को है

मंगलवार, 3 जनवरी 2012

लोकपाल चाहिये... लोकपाल चाहिये.... रट लगा कर अरविन्द केजरीवाल ने जिस तरह अण्णा हजारे के कंधे पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की ख्याति की बंदूक चलाई थी वह हम सबने देखा । एक बार तो केजरीवाल ने बुड्ढे को चने के झाड़ पर चढ़ा कर भूखे मरने की धमकी देने के लिये बैठा दिया लेकिन हमारे देश की जनता तो वही है न जिसके पूर्वज अंग्रेजों के पंद्रह सौ सिपाहियों को आते देखते हुए तालियाँ बजा बजा कर खुश हो रहे थे तो अब भला क्या नया होने वाला था । बुड्ढ़ा प्रसिद्धि का भूखा तो है इसलिये बेचारा कुटिल केजरीवाल के मीडिया मैनेजमेंट और गैरसरकारी संगठनों द्वारा येन-केन-प्रकारेण जुटाई हुई भीड़ के देख कर समझ बैठा कि देश की जनता उसके साथ है । अरे इस प्रसिद्धि के लिये बौराए बुड्ढे को दिखता तो है न कि ये तो मात्र बारह दिन अनशन के लिये बैठा तो इतनी भीड़ जुट गयी और वो इरोम शर्मिला बारह साल से भूखी मर रही है और उसे न तो मीडिया पूछ रहा है न ही उसके लिये भीड़ जुट रही है बस हम जैसे कुछ पगलाए, झक्की, सनकी किस्म के अनपढ़, जाहिल और घोषित कर दिये गए बुरे लोग ही उनके दीवाने हैं तो क्या वजह है। उस लड़की को भी ऑस्टियोपोरोसिस हुआ है, मासिक धर्म बंद हो चुका है लेकिन क्यों? क्यों?? क्यों??? केजरीवाल या किरन बेदी या इन जैसे किसी को वो दिखती ही नहीं? बुढ़ऊ हजारे तो भारत के संविधान के लोकतान्त्रिक कंकाल की जानकारी है नहीं कि आदमी ऊपर से कितना भी चर्बी चढ़ा मोटा दिखे जब तक उसकी हड्डियाँ मजबूत नहीं होती उसे घुटने का दर्द सहना ही पड़ता है वैसा ही हाल हमारे संविधान का है। अब हजारे महोदय ने बहुत प्रसिद्धि पा ली है देखियेगा कुछ दिन बीमारी-बीमारी का खेल खिलवाने के बाद शहीदों की फ़ेहरिस्त में शामिल करा दिये जाएंगे केजरीवाल एण्ड पार्टी द्वारा । बैटरी खत्म हो चुकी है तुम्हारी या कि ओवरचार्ज हो गये थे दिल्ली की फ़ोकटखाऊ लोगों की भीड़ देख कर कि अब तो बस तुम देश का कायाकल्प कर दोगे, कुछ भी हो बहरहाल बस अब तुम टरकने वाले हो ऐसा लग रहा है और अगर नहीं टरके तो तुम्हारे आसपास के लोग अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की वेदी पर तुम्हारी बलि चढ़ा देंगे हमें सपने में ऐसी "डर्टी पिक्चर्स" दिखाई दे रही हैं। ईश्वर तुम्हारी आत्मा को शाँति दे ।
जय जय भड़ास

Read more...

जजे’स एकाउंटबिलिटी बिल और साम्प्रदायिक हिंसा वाले विधेयक से अण्णा हजारे को कुछ लेना देना नहीं है

बुधवार, 28 दिसंबर 2011

भड़ासियों को न तो ठंड लग रही है मुंबई में और न ही उनमें से किसी को बुखार है और हाज़मा खराब होने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता है। हम सारे लोग अधिकतर तो डॉ.साहब की महाभड़ासी प्रयोगात्मक फ़िल्म "प्रश्न" देखने के बाद कुछ समय तक सन्न थे और अब रहा नहीं गया तो अण्णा हजारे के बंदरपन और सुअरविन्द केजरीवाल के मदारीपन पर लिखने का मन करा है। जनता चूतिया है ये तो सब जानते हैं तभी तो इन कमबख्त नौटंकीबाजों के चक्कर में आ जाती है। जो साला मरने से नहीं डरता और भूखे मरने का नाटक कर अनशन करके सरकार से लोकपाल बिल लाने की बात करता है उसकी सरदी बुखार से इतनी कस कर फट जाती है कि एक दिन में अनशन फ़ुस्स्स हो गया । ये हरामखोर लोग जनता का ध्यान लोकपाल-लोकपाल की आड़ में दूसरे ऐसे बिलों से हटाना चाहते हैं जिनकी अंग्रेजियत कांग्रेस की नस नस में समाई है। एक है साम्प्रदायिक हिंसा से संबंधित विधेयक जिससे अण्णा हजारे को कोई लेना देना नहीं है और दूसरा है जजों के उत्तरदायित्त्व से संबंधित विधेयक जिस पर बोलने की दम किसी में है नहीं। ये सारा का सारा नाटक कांग्रेस के पाले बंदर हजारे और तनखैय्या मदारी सुअरविन्द केजरीवाल के द्वारा चलाया जा रहा है ताकि लोकपाल की नौटंकी की आड़ में ये दोनो कानून कब लागू हो जाएं किसी को खबर भी न हो और रही बात मीडिया की तो वो तो सिर्फ़ वही बोलता है जो उसके आका फरमाते हैं। जनता एक बार फिर से मूर्ख बन रही है।
जय जय भड़ास

Read more...

मेरे ख्यालात मेरे ही हैं मैं कोई दूध पीता बच्चा नहीं हूँ

मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

मेरे ख्यालात मेरे ही हैं मैं कोई दूध पीता बच्चा नहीं हूँ मजबूरी में ये वीडियो देना पड़ रहा है।

जय जय भड़ास

Read more...

पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक का निगेटिव पब्लिसिटी का फंडा

सोमवार, 5 दिसंबर 2011




पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक ने अपनी प्रसिद्धि के लिये जो टोटका अपनाया है वह कुछ नया नहीं है साथ ही मुझे लगता है कि इसमें पत्रिका प्रबंधन भी शामिल है। ये लोग निगेटिव पब्लिसिटी का फंडा अपना रहे हैं ठीक उसी तरह जैसे कि राखी सावंत आदि करते हैं कि दो लोग एक दूसरे को भीड़ में जोर जोर से गालियाँ देने लगो तो जो लोग आपको नहीं भी जानते वो भी पहचानने लगेंगे कि आप कौन हो बाद में प्रकरण तो सब भूल जाते हैं लेकिन आप याद रह जाते हैं। वीना मलिक अब कह रही हैं कि उनकी नंगी तस्वीर नकली है जबकि इस्लामिक विद्वानों ने डंडा घुमाना शुरू कर दिया। इससे वीना को फायदा ही हुआ जो मौलाना उसे नहीं जानते थे अब जानने लगे और कम से कम एक प्रति किताब की तो उनके हाथ में बतौर सबूत पहुंची ही होगी तो लगे हाथ पत्रिका की भी बिक्री हुई। अब कोर्ट के बाहर सेटलमेंट हो जाएगा और बात आयी-गयी हो जाएगी। दोनो पक्षों को खासी कुप्रसिद्धि हासिल हो गयी|
जय जय भड़ास

Read more...


बहन सोनी सोरी से संबंधित वीडियोज़ जो कि "तहलका" ने यू-ट्यूब पर अपलोड कर रखे थे उन्हें उठा कर ले आया हूँ जरा आप सब भी देख लीजिये कि आखिर देश और सभ्य समाज में चल क्या क्या रहा है। जाँच एजेन्सियाँ किस कदर "मिथ्या आरोप" में लोगों को घसीट कर उनकी जिन्दगी घुटनों पर ला देती हैं उसका ताजा नमूना है ये प्रकरण ।

 भड़ासियों पर भी यदि आगे कभी इस तरह के आरोप लगने लगें तो आश्चर्य नहीं कि हम क्यों गूँगों की आवाज़ बनने की गुस्ताखी कर रहे हैं।

सोनी बहन हमारा नैतिक समर्थन हर पीड़ित,उत्पीड़ित,दलित,शोषित के साथ है आपके आँसू हमारी आँखों से यदि बहते हैं और कोई उन आँखों को फोड़ना चाहे तो हम तैयार हैं इस बात के लिये भी लेकिन जब तक जान बाकी है हम अन्याय और अत्याचार का विरोध करते रहेंगे। चाहे बहन निशाप्रिया भाटिया हों या बहन सोनी सोरी हम उनके दुःख को समझ कर चुप्पी साधे सभ्य समाज को जगाते रहेंगे।


जय जय भड़ास

Read more...

बृहन्नमुंबई महानगरपालिका मनीष मार्केट के दुकानदारों को कुछ दिन पहले नोटिस देती है

मंगलवार, 29 नवंबर 2011

पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट की जमीन पर अवैध कब्जा कर के भगोड़े मुंबइया डॉन दाउद इब्राहिम जो शॉपिंग कॉम्प्लैक्स खड़ा कर रखा था उस पर गोविन्द राघो खैरनार के अलावा कोई हथौड़ा चलाने की जुर्रत नहीं कर सका। घटनाक्रम कुछ इस तरह से रंग लेता है कि बृहन्नमुंबई महानगरपालिका मनीष मार्केट के दुकानदारों को कुछ दिन पहले नोटिस देती है और अब वहाँ कुछ नहीं बचता ऐसी भीषण आग लग जाती है कि डेढ़ हजार दुकानें जल कर राख हो जाती हैं।
जो लोग इस जगह के बारे में नहीं जानते उन्हें कुछ भी कहानी बना कर मीडिया सुना सकता है लेकिन हम जैसे लोग जो मुंबई की गली-गली में आना जाना रखते हैं उन्हें भ्रमित नहीं करा जा सकता। ये पूरी तरह से सोची समझी हुई योजना के तहत करा गया अग्निकांड है अब आगे दुकानदारों का दल मंत्रियों संतरियों से मिलेगा और इस जगह का विकास दाउद इब्राहिम के ही किसी चमचे बिल्डर को दे दिया जाएगा जिसमें कि दुकानदारों को पक्की दुकानें मिल जाएंगी। कितनी अच्छी योजना है महानगर पालिका के दाउद द्वारा पाले जा रहे अधिकारियों की।
इस बाजार के बिलकुल बगल में एक बड़ा सा पुलिस स्टेशन है जहाँ कम से कम पचास पाँडु तो एक समय में रहते ही हैं रात में ये सारे के सारे उसी रास्ते पर खड़ी वेश्याओं से बतियाते देखे जा सकते हैं, सुबह पाँच-छह बजे तक कचरा चुनने वाले तथा भिखारी किस्म के बच्चे इस इलाकें भटकते रहते हैं और सुबह चहल पहल होने पर गायब हो जाते हैं। इस सब लोगों ने देखा होगा कि आग लगाने का खेल कैसे हुआ है।
जय जय भड़ास

Read more...

शरद पवार को तो भगवान ने पहले ही मुँह पर थप्पड़ लगा रखा है

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

कुछ लोग इतने हलकट होते हैं कि वो भगवान की मार से भी नहीं सुधरते ऐसे लोगों को शरद पवार कहते हैं। ये कहता है कि भले ही सरकारी गोदामों में रखा अनाज सड़ जाए लेकिन गरीबों को कम दाम या मुफ़्त में नहीं दिया जाएगा। भगवान ने इस हलकट के मुँह पर एक जोर का थप्पड़ लगाया कि अब सुधर जा लेकिन ये सुधरा नहीं बल्कि इसकी धूर्तताएं बढ़ गयी इसलिये अब भगवान जल्द ही इसका टिकट काट दें ताकि इस ढाई मन की सड़े गोबर की बोरी से पीछा छूट जाए भारत की जनता का जो इसे एकाधा थप्पड़ मार कर भड़ास निकाल रही है। वैसे उस युवक को भड़ास की तरफ से मैं प्रणाम करता हूँ जिसने सांकेतिक तौर पर कम से कम एक तो जमाया हिन्दुस्तानी थप्पड़ जिसकी गूंज इसके कानों में कुछ समय तक रहेगी।
जय जय भड़ास

Read more...

एक सच जो लगभग सभी मुस्लिम जानते हैं इशरत जहाँ के बारे में परंतु छिपाते हैं

बुधवार, 23 नवंबर 2011

गुजरात पुलिस द्वारा फ़र्ज़ी मुठभेड़ में जिन चार लोगों को मार देने की चर्चा आजकल सुर्खियों में है वो सब जानते हैं। जो जानने वाली बात है वो ये कि इशरत जहाँ मुंबई के उपनगर मुम्ब्रा(ठाणे जिला) की रहने वाली और खालसा कॉलेज में पढ़ने वाली थी। वो तीन लड़कों के साथ गुजरात कार से क्या करने जा रही थी। कहानी ये है कि इशरत जहाँ को जिस तरह से मीडिया ने बताया है कि वह एक नेक बुर्केवाली किस्म की लड़की थी वह बिल्कुल गलत है। सच तो ये है कि वह एक उजड्ड किस्म की घरवालों की बात न मानने वाली आवारा किस्म की लड़की थी। जिसका कि एक दक्षिण भारतीय ब्राह्मण हिंदू लड़के से प्रेम प्रसंग चल रहा था जिसके चलते इस लड़की के घर वाले भी इससे ऊबे हुए थे। लड़के ने चूंकि प्रेम में दीवानगी दिखाते हुए इस्लाम स्वीकार लिया जो कि उसके घर वालों को खल गया। जब ये लड़की अपने साथ अपने प्रेमी और दो अन्य लड़कों के संग घूमने जा रही थी इरादा था भाग कर निकाह कर लेने का तो उस लड़के के बाप ने अपने संपर्कों का प्रयोग करते हुए इन दोनों को खाप पंचायती अंदाज में गुजरात पुलिस से ठिकाने लगवा दिया लेकिन साथ के दो लड़के बेचारे गेहूं के साथ घुन की तरह पिस गए।
ध्यान दीजिये कि आज तक किसी मीडिया वाले ने इस लड़की की नौटंकी करके रोती हुई माँ से ये नहीं पूछा कि वो तीन लड़कों से साथ इतनी दूर क्या कर रही थी और कई बार अनेक लोगों के साथ होटलों में क्यों ठहरी थी जिसका रिकॉर्ड मौजूद है जिसके चलते अब भी अधिकारी ये कह रहे हैं कि एन्काउंटर फ़र्जी था लेकिन वह आतंकियों के संपर्क में थी या नहीं थी इस आरोप से मुक्त नहीं हुई है। चूंकि मामला राजनैतिक रंग पकड़ गया तो अब इशरत जहाँ की माँ भी नेताओं के हाथ कठपुतली बनी हुई है।
ये सारी बातें आम चर्चा में हैं यदि आप मुम्ब्रा के आसपास रहते हों तो जरा जा कर खुद इस चर्चा को सुन सकते हैं जो कि मीडिया से अलग ही चल रही है। ये सारी बातें अफ़वाहें भी हो सकती हैं लेकिन बात सोचने वाली है कि लड़की तीन लड़कों के साथ घूमने इतनी दूर जा रही है और घर वालें खुश हैं किसी को कोई एतराज़ नहीं......
डॉ.रूपेश जी चाहें तो मुम्ब्रा मात्र पच्चीस मिनट में पहुंच सकते हैं।
जय जय भड़ास

Read more...
प्रकाशित सभी सामग्री के विषय में किसी भी कार्यवाही हेतु संचालक का सीधा उत्तरदायित्त्व नही है अपितु लेखक उत्तरदायी है। आलेख की विषयवस्तु से संचालक की सहमति/सम्मति अनिवार्य नहीं है। कोई भी अश्लील, अनैतिक, असामाजिक,राष्ट्रविरोधी तथा असंवैधानिक सामग्री यदि प्रकाशित करी जाती है तो वह प्रकाशन के 24 घंटे के भीतर हटा दी जाएगी व लेखक सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी। यदि आगंतुक कोई आपत्तिजनक सामग्री पाते हैं तो तत्काल संचालक को सूचित करें - rajneesh.newmedia@gmail.com अथवा आप हमें ऊपर दिए गये ब्लॉग के पते bharhaas.bhadas@blogger.com पर भी ई-मेल कर सकते हैं।
eXTReMe Tracker

  © भड़ास भड़ासीजन के द्वारा जय जय भड़ास२००८

Back to TOP