प्रशांत भूषण को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है तो हमें भी है

शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011



प्रशांत भूषण और बुढ़ऊ शांति भूषण शायद ऐसा मानने लगे हैं कि अंग्रेजियत से प्रभावित हमारा मौजूदा संविधान जिसमें कि ढेर सारे सुधार की जरूरत है वह अंतिम है। लोकतंत्र के नाम पर जाहिल जनता की भीड़ द्वारा दिये गये वोट और कानून के नाम पर करी गयी बकवास को सही मानते हैं।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के चलते प्रशांत भूषण ने काश्मीर पर जिस तरह का विचार दिया यदि उसे मान लिया जाए तो असम के लोगों को बोडोलैंड दे दो, पंजाब के लोगों को खालिस्तान दे दो, मणिपुर अरुणाचल आदि पहाड़ी क्षेत्रों को चीन को दे दो..... अखंड भारत किधर बचेगा?? मोहनदास करमचंद गांधी ने भी लगातार यही गलती करी थी और पाकिस्तान एक नासूर की तरह से हमारे देश के साथ चिपक गया। अब इस प्रशांत भूषण की कथित संवैधानिक बकवास को मान लिया जाए नाथूराम गोडसे ने जो करा वह उपचार देर से होने से कामयाब नहीं हुआ लेकिन मैं प्रणाम करता हूँ उन नौजवानों को जिन्होंने समय रहते प्रशांत भूषण का उपचार कर दिया लेकिन यदि देश के मौजूदा जीर्ण और रुग्ण हो चुके संविधान में सुधार कराने और समीक्षा करने की बजाए नए-नए कानून थोपे जाते रहेंगे तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ “मुंह तोड़ देना” समझने वाले ऐसा ही जवाब देंगे।
हम तो चाहेंगे कि विश्वगुरू होने की क्षमता रखने वाला भारतवर्ष अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, बर्मा, बांग्लादेश को भी वापिस अपने में विलय कर ले तो चीन जैसे देश भी “अच्छे पड़ोसी” बन कर रहेंगे वरना प्रशांत भूषण जैसे लोग तो देश के टुकड़े-टुकड़े करवा कर देश को बिकवा देंगे। प्रशांत भूषण जैसे लोगों का सत्यानाश हो.... ये हमारी अभिव्यक्ति है जिसकी हमें स्वतंत्रता है।
जय जय भड़ास

3 टिप्पणियाँ:

किलर झपाटा ने कहा…

वाह वाह रूपेश जी,
क्या सीधी बात की है आपने मुझसे। मगर भैया पहले मेरी इसके पूर्व की गई टिप्पणियाँ तो छाप लीजिए फिर आगे बात करिएगा। सयाना कौवा हमेशा गू (आपकी भाषा में मल) पर ही बैठता है और आप भी जल्दबाजी में वही कर बैठे हैं मुझ पर टिप्पणी करके। राज़ खुलने वाला है आपका। प्लीज़ डोण्ट माइंड। आप लोग इतने डरपोक क्यों हैं जो सवाल तो करते है जवाब के वक्त मॉडरेशन चालू कर लेते हैं। मुश्किल है ऐसे में प्रमोशन आपका।

ZEAL ने कहा…

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भैय्या,
कम शब्दों में बहुत सटीक लिखा है आपने। प्रशांत भूषण जी का वक्तव्य अत्यंत गैरजिम्मेदाराना और खेदजनक है।

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डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

मॉडरेशन नाही लावला तर तुझे सारखे लोक येउन बेनामी कमेंट करुन आई बहिणी ला शिवीगाळ करुन हगतात ही नुस्ती वांटी जी जागा आहे तरी ही जर तुला जुलाब झालेच, आमचा कड़े उपचार आहे। एक गोष्ट विचारायचे होती कि तू मध्ये मध्ये इंग्रजी का ला पेलतोस, आई इंग्लंड गेली होती कि वडील ब्रिटेन चे आहेत नक्की सांग बाळा.... मळाला गूच म्हणतो मी पण जशी जागा असेल तशी भाषा वापराय ची सवय आहे। समोर तरी ये तुला माहीत पड़ेल कि खालुन बांबू घालुन तोंडाने काढ़नारे माणसांना "डरपोक" नाहीच हाक मारायचे। खरा सांग किती बाप होते तुझे, अरे वडीलघाल्या ! तू मला भैया बोलतोस आणि अशी भाषा वापरतो म्हणुन तुला तुझी भाषेत उत्तर दिलेला आहे।
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जय जय भड़ास

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