अमित जैन, “जैन रामायण” पढ़ी ?

सोमवार, 17 अक्तूबर 2011

अरे अमित जैन मैंने काँव-काँव करके सवाल पूछा है तुम भौं-भौं करके जवाब दे दो कि “जैन रामायण” पढ़ी या नहीं? इतना तो बता दो कि अब दोबारा चुप्पी साधने की तुम जैनियों की पश्च पद्मावती की पैशाचिक साधना में लीन हो जाने का इरादा है?? अपने वकील प्रवीण जैन(शाह) को बुला लो यदि संभव हो क्योंकि उसकी तो साँस ही बंद कर दी है अनूप मंडल वालों ने तुम्हारे कपटगृन्थ “जैन रामायण” को दुनिया के सामने लाकर। मुझे तुम्हारे उत्तर का इंतजार है तुम भौंको मैं समझ लूंगा जैसे तुम मेरा काँव-काँव करना समझ गए। लेकिन फिर पुरानी बात दोहरा दूँ कि यदि अपनी पत्नी(हम भड़ासियों की बहन) के साथ गलबहियों में व्यस्त हो तो हम तुम्हें उत्तर देने के लिये पर्याप्त समय देंगे।

जय जय भड़ास


4 टिप्पणियाँ:

अजय मोहन ने कहा…

मुनेन्द्र भाई,इसने भी अण्णा हजारे की तरह “मौनव्रत” साध लिया है जैन रामायण के बारे में...
अपने जिन मक्कार पूर्वजों की ये पैरवी कर रहा है उस किताब को देखने से पता चलता है कि ये कितने धूर्त हैं किस तरह हमारे आराध्यों का अपमान करते हुए इतिहास से छेड़छाड़ करके प्रदूषित करा है।
जय जय भड़ास

काम रस से भरी कहानिया ने कहा…

लगता है दोनों महानुभाव किसी नीची जाती कि पैदाइश है और कोई धर्म इनके लिए मायने नहीं रखता ,क्योकि इनका कभी किसी धरन्म से पाला ही नहीं पडा , अपनी नीच मानसिकता को तुम दोनों मिल कर सिर्फ जैन धर्म पर निकल र रहे हो क्योकि यहाँ अहिंसा है ,अगर अपने सगे बाप कि औलाद हो तो जरा मुस्लिम बिरादरी पर कुछ लिख कर बताओ ,पर वह क्यों लिखोगे ,क्योकि वह तुम्हारी गांड मे डंडा दे कर तुम्हे तुम्हारी नीर्च जात याद दिला दी जायेगी , अबे तुम लोग सिर्फ अपनी नीच जात को छुपाओ ,

तुम अपने पूर्वजो के बारे मे बताओ जो साले हम लोगो का गंद अपने सर पर रख कर घुमते थे

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

अजय सर जी, फ़िलहाल इसकी साँस बंद है अपने नंगे तीर्थंकरों की फोटो लगाने में शर्माता है इसे मैं दिखाऊंगा कि इसका असल रूप क्या है।
जय जय भड़ास

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

अमित जैन मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम्हारे समर्थन में इस तरह की नंगी-पुंगी और इस तरह के धंधेवालियाँ भी आ जाएंगी। बेचारियाँ सिर्फ़ मुसलमानों से चिढ़ी हुई हैं इसलिये उकसाने की कोशिश कर रही हैं असल में इन नंगियों को नहीं पता कि संजय कटारनवरे ने गुफ़रान सिद्दीकी के सामने जब से कुरान से संबंधित सवाल उठाए तो वे नदारद हैं। तुम्हारा असल मकसद तो यही है कि हिंदू-मुसलमान आपस में लड़ते रहें और तुम्हारे राक्षसपन की तरफ किसी का ध्यान न जाए। ये कामरस की कहानियों को लिखने-चलाने वाला भी पूरा यकीन है कि कोई अमित जैन का ही भाई-बंधु होगा या ये खुद भी हो सकता है।
जय जय भड़ास

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