अरविन्द केजरीवाल को सुअर'विन्द केजरीवाल क्यों न कहा जाए ?

गुरुवार, 3 नवंबर 2011


सुअर’विंद केजरीवाल

मैं ठहरा हिन्दीभाषी देसी किस्म का कुछ कुछ गंवारपन का प्रभाव लिये हुए व्यक्ति जिसे हमारी ताज़ातरीन अतिथि बहन "किल्ली झपाटिन"(ये किलर झपाटा के छद्म नाम से ब्लॉगिंग करा करती हैं) की तरह अंग्रेजी तो आती नहीं है। इसलिये हिंदी लिखते बोलते समय यही प्रयास रहता है कि सही लिखूं और बोलूं। हिन्दी व्याकरण जब कक्षा छह सात आठ में पढ़ रहा था तो पता चला कि किन्हीं विशेष शब्दों के आगे "कु" जोड़ देने से उसका अर्थ बुरा और "सु" जोड़ देने से अच्छा हो जाता है, कई बार सोचा को हमारी अध्यापिका से पूछ लूं कि कुमार और कुमारी के अर्थ क्या "कु" जोड़ कर बनाए गए हैं कि जो बुरा मार सके वह कुमार और जिसने बुरी मारी हो वह कुमारी लेकिन इतने समय के भाषाई संघर्ष ने ये बता दिया कि कुमार और कुमारी शब्द बुरे अर्थों में नहीं बल्कि अच्छे हैं जैसे कुमार रूपेश श्रीवास्तव या कुमारी किल्ली झपाटिन ।
हाल ही में अण्णा हजारे के झुंड के एक अत्यंत भले माने जाने वाले इन्सान अरविन्द केजरीवाल ने सरकार को नौ लाख सत्ताइस हजार सात सौ सत्तासी रुपए ये कहते हुए लौटा दिये कि मैं इस राशि को विरोध स्वरूप लौटा रहा हूँ ताकि मेरा इस्तीफा मंजूर होने के बाद मैं इस राशि को सरकार से वापिस लेने के लिये अदालत का दरवाजा खटखटा सकूं। जैसे ही मुझे बाबू अरविन्द केजरीवाल की इस नेकनियती का पता चला मेरे दिल में बचपन में पढ़ा हिन्दी व्याकरण उछालें मारने लगा कि इस नेक इंसान के नाम के आगे क्या लगाया जाए कि इसका सम्मान बढ़ जाए, अब "श्री" लगाना तो सामान्य हो गया है क्योंकि इसका कॉपीराइट तो श्री श्री रविशंकर ने ले लिया है । अब क्या करता कुछ ज्यादा समझ नहीं पा रहा था तो ध्यान "कु" और "सु" की तरफ चला गया। इस "सु" के जुड़ने से बाबू अरविन्द केजरीवाल का नाम भी कुछ अधिक आदरणीय सा प्रतीत होने लगा है और साथ ही उनके आचरण अनुरूप भी लगने लगा है। आप लोगों का क्या मानना है यदि कुछ दूसरा विचार हो तो इनका मान बढ़ाने के लिये सुझाइये।
जय जय भड़ास

11 टिप्पणियाँ:

किलर झपाटा ने कहा…

रुपेश कह रहे हैं--
"आप लोगों का क्या मानना है यदि कुछ दूसरा विचार हो तो इनका मान बढ़ाने के लिये सुझाइये।"

अरे !
बिल्कुल मत बताना आप लोग इस रुप्पू को। ये महाशय बीमारों का इलाज करते करते खुद उस खतरनाक बीमारी से ग्रस्त हो गये हैं जो अक्सर खिसियानी बिल्ली को होती है जो खम्बे को चुहिया समझ कर नोंचने लगती है बेचारी। इन्होंने खुद बताया की इनको अब तक बीबी नहीं मिल पाई है और इसी वजह से इनको मतिभ्रम की बीमारी हो गई है। ये मुझ जैसे पहलवान को लेडी समझ कर पटाने की जुगत में लग गये हैं। छी छी रूपेश दिस इज़ वैरी बैड।
ऐसा ही कहीं ये आप लोगों के साथ करने लगे तो ?

वन मोर थिंग झोलू यू नो व्हॉट ? ‘चिल्ड्रन’ बोलते हैं ना तो राँग इंग्लिश मानी जाती है। ‘चिलरन’ ही बोलना पड़ता है, बेटा समझे।
अब तुम बुन्देलखण्डी में लोगों की दाई-महतारी वगैरह करने वाले सही इंग्लिश क्या जानो।
हा हा। चलो कोई बात नहीं। मैं सिखा दूँगा।ओ.के.। हा हा।

किलर झपाटा ने कहा…

अरे रे रे अब मैं समझा। इनकी ज़ील बहन जी नहीं रहीं ना कल। इसलिये पगला गये हैं रूपेश बेचारे। अभी थोड़ी देर पहले एक गधे दीनबंधू को जब इन्होंने बहनजी बोला तब मैं समझ गया कि इनके दिमाग पर ज़ील के जाने का इतना गहरा असर हो गया है। कोई बात नहीं दो तीन दिन में पटरी पर आ जायेंगे।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

बहन किल्ली झपाटिन तुम पहलवान हो इस बात से कहाँ इन्कार है लेकिन तब भी रहोगी तो स्त्री ही न? मैं भला तुम्हें पटाने के बारे में क्यों सोचूं किधर पैतृक संपत्ति से आपका हक़ मारने का कुत्सित विचार है। आप ऐसा सोच सकती हो बल्कि सोच ही रही हो क्योंकि आप तो भाई के साथ भी कंडोम लगाकर बलात्कार करने की बीमार सोच रखती हो। मुझे पूरा यकीन है कि भड़ासायुर्वेद में आपके इस विकृत यौन मनोरोग का स्थायी उपचार हो जाएगा।
कभी आप कहती हैं कि मैं ही ज़ील हूँ कभी मुझे अपना और उनका भाई कहती हैं। चिकित्सक होने के नाते मैं आपकी बीमारी की गम्भीरता को समझ सकता हूँ लेकिन अभी आप उतनी पगलायी हुई नहीं हैं कि सड़कों पर अपना पेटीकोट ब्लाउज फाड़ कर चिल्लाते हुए सबको आमंत्रित करें उससे पहले आपको उपचार ले लेना चाहिये।
हम निजी वैचारिक मतभेदों में अमित जैन की तरह माँ-बहनों को नहीं ले आते न ही बुन्देलखंडी में न ही इंग्लिश में। आप हमें इंग्लिश सिखाना चाहती हैं तो स्वागत है लेकिन आपने बताया नहीं कि भाई से बलात्कार की परम्परा आपने अपने अंग्रेज पूर्वजों से सीखी या हिंदी(मंदारिन या चीनी भी हो सकती हैं) भाषा बोलने वाले पूर्वजों से??
मैं दीनबंधु भाई को तो बहन नहीं कह रहा हूँ मैं तो सिर्फ़ आपसे मुखातिब हूँ आजकल लेकिन ये भ्रम आपको आपकी यौन विकृत मनोरुग्णता के कारण हो रहा है परेशान न हों जल्द ही ठीक हो जाएंगी।
जय जय भड़ास

किलर झपाटा ने कहा…

हाँ कुरुपेश जी आप मुझसे ही मुखातिब रहे आइये। कम से कम बाकी लोग तो आपके पागलपन से बचे हुये हैं और दिल ही दिल में मुझे थैंक्स कह रहे हैं अच्छा किया झपाटे जो इन मिस्टर झोल, (भड़ासायुर्वेदी) विकृत मानसिक रोगी से बचा लिया।
बहुत दुख हुआ इस बात पर कि मेरी वजह से आप जैसे तथाकथित महान चिकित्सक के दिमाग का जनाज़ा निकल गया और वो बिल्ली के गू बन गये। ना लीपने के रहे ना पोतने के।
मेरे ब्लॉग पर आइयेगा। वहाँ मैं आपको रीसाइकिल करके कम से कम गोबर में कन्वर्ट करवा दूँगा ताकि आप किसी काम तो आ सकें।

हा हा मुझ पहलवान से कह रहे हो-
"लेकिन अभी आप उतनी पगलायी हुई नहीं हैं कि सड़कों पर अपना पेटीकोट ब्लाउज फाड़ कर चिल्लाते हुए सबको आमंत्रित करें उससे पहले आपको उपचार ले लेना चाहिये।"
आपकी इसी बात से पता चल रहा है कि आप आदमी होकर फ़ैंटेसाइज़ होने के लिये ज़ील का औरताना आवरण पहन लेते हो और फिर मेरे जैसा कोई पहलवान आपको धोबीपछाड़ मार देता है तो आप अपना पेटीकोट ब्लाउज फाड़ कर चिल्लाते हुए सबको आमंत्रित करने लगते हो बलात्कार वगैरह करने के लिये। फिर जब सब कंडोम लगा लेते हैं तो आप उसे लेडी बताने लगते हो उसका उपचार करने लगते हो उल्टा सीधा। अपनी ही पहले कही बातें काटने पीटने लगते हो। आई थिंक थोड़ी देर आप इन्हीं जैन मुनियों जैसे नंग धड़ंग होकर पथराव करते नजर आयेंगे भड़ास पर और बाकी सब भड़ासी आपकी बेवकूफ़ाना पागलपन से घबराकर भड़ास को छोड़कर भाग जायेंगे। पड़े रहना अकेले यहाँ पर पुराना कूड़ाकरकट खखोलते छपेड़ते हुये।

बाय बाय रुप्पू पगलुद्दीन

हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा ने कहा…

किलर झपाटा जी आप काफ़ी परेशान महसूस हो रहे हैं, भाई आपको हँसाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन आप सिर्फ़ हा हा लिख कर काम चला रहे हैं खुल कर हँसिये ताकि तमाम परेशानियाँ दूर हो जाएं। आप बहन हों या भाई या मेरे जैसे पर यदि भाईसाहब आपको बहन कह रहे हैं तो ये उनका सही निर्णय है आप सचमुच स्त्रैण व्यवहार कर रहे हैं।
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

बहन किल्ली झपाटिन, जो गम्भीर रोगी होता है चिकित्सक का कर्तव्य है कि उसकी तरफ अधिक ध्यान दे सो मैं आपसे ही मुखातिब हूँ। जब से आप भड़ास से इस तरह के उपचारात्मक संपर्क में हैं आपमें निःसंदेह उपचार के असर दिख रहे हैं अब आप दु:ख भी प्रकट कर रही हैं, हा हा हा हा लिखने की आदत छूट रही है। मनोरोगियों को यदि चिकित्सक पागल प्रतीत हो तो ये कोई नयी बात नहीं है आपको यदि मैं ऐसा लगता हूँ तो ये आपकी बीमारी के लक्षण हैं जिन्हें मै समझ चुका हूँ कभी कभी आप मुझे झाड़फूक वाला बताने लगती हैं जबकि मैंने आपको कभी झाड़ा या फूंका नहीं है, होता है ऐसा बीमारी ही ऐसी है। आपने मल-परिवर्तन के कार्य में जो दक्षता हासिल करी है वह प्रशंसनीय है, पहलवानी के अलावा आप मलविश्लेषण, रूपान्तरण आदि का भी कार्य करती हैं ये आपने अब बताया। आप अपने ब्लॉग पर आने का निमंत्रण देती हैं कभी मना करती हैं कि मत पढ़ना, ये सारे लक्षण आपके व्यवहार में रोग के साथ शामिल होकर परेशानी बढ़ा देंगे आपकी। मैं आपकी यौन कल्पनाओं के बारे में अनुमान तक नहीं लगा सकता कि आप किस कदर बलात्कार आदि से उन्मादित हैं; आपका कामोन्माद तो इतना बढ़ गया है कि आपने जैन मुनि भी इस वार्तालाप में शामिल कर लिये हैं। क्या किसी जैन मुनि ने आप पर पथराव करा है जो आप लिख रही हैं कि जैन मुनियों की तरह नंग-धड़ंग होकर पथराव करते नजर आएंगे।
आप भड़ास, मेरे प्रति इतनी चिंतित हैं साथ ही भड़ासियों की भी चिंता है तो बस सलाह ही दूंगा कि इस हालत में आपके लिये चिंता अधिक परेशानी पैदा कर सकती है।
मेरी एक मरीज़ा आपकी ही तरह मुझे अलग अलग नामों से पुकारा करती थी लेकिन चूंकि उसे काफ़ी देर से हालत बिगड़ने के बाद मेरे पास लाया गया था तो वह बेचारी गुज़र गयी उसे एड्स था। भय है कि आप अपने भाई से बलात्कार करने की हद तक पहुंच चुके कामोन्माद में कहीं कोई गलत कदम न उठा लें और......
मैं गम्भीर मरीजों के साथ हँसी-ठ्ट्ठा नहीं करता इसलिये हँसूंगा नहीं आपको याद दिला दिया है यदि हँस पाने कि स्थिति हो तो हँस लीजिये ये भी उपचार का हिस्सा ही है।
जय जय भड़ास

अनोप मंडल ने कहा…

प्रवीण शाह तुम किसी भी मुखौटे से भड़ास में घुसो हम तुम्हारी हरकतों से पहचान जाते हैं। तुमने भड़ास के दूसरे संचालक भाई रजनीश के.झा को भ्रमित कर लिया हो इस बात की संभावना है लेकिन अवतारस्वरूप डॉ.रूपेश श्रीवास्तव तुम्हारे प्रभाव में नहीं आएंगे।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

किलर झपाटा ने कहा…

अरे यार मंडल जी, आप काहे मुझे डायरेक्ट राक्षस बतलाते हुए इस झोलाछाप रुप्पू की तरफ़दारी में उतर पड़े। इसके चक्करों में मत पड़िये। अभी आप कम से कम मर्द हैं। इस रूपेश के आसपास ज्यादा रहे ना तो ये आपको भी अपनी पगलापंथी से हिंजड़ा बना कर मंडल बहन-मंडल बहन कहने लगेगा। तब मुझसे मत कहिये कि प्यारे झपाटे तुमने मुझे पहले आगाह क्यों नहीं किया ?
कोई भी समाज दुर्भावनाओं से ग्रस्त नहीं होता ना ही उसकी शिक्षा। ये तो आदमजात है जो आपस के मतभेदों को भड़ास के रूप में एक दूसरे पर निकालने लगती है। मैने जील के ब्लॉग पर उन्हें सिर्फ़ इतना कहा था कि बिना काश्मीर समस्या को समझे बूझे उन्हें किसी को भी देशद्रोही नहीं कह देना चाहिये। बस उसके बाद से ये सारे के सारे मुझसे बड़ी बेअदबी से झगड़ पड़े। मैं आप आप करूँ ये तू तड़ाक करें। अब पटपटापट पड़ रही है तो भागते गली नहीं मिल रही रूपेश और उसकी पलटन को। इस बुद्धू को आदरणीय वादरणीय कहने की जरूरत नहीं है आपको। पागलों को कोई "आदरणीय" कहता है भला ? हा हा
चलिये आपको और भड़ास के सभी साथियों को बकरीद की बहुत बहुत मुबारकबादियाँ ।

अनोप मंडल ने कहा…

किलर झपाटा के नाम से लिखने वाले दुर्मति राक्षस सीधी बात कह रहे हैं कि कभी अवतार स्वरूप डॉ.रूपेश श्रीवास्तव के सामने मत पड़ जाना वरना अहिंसा के सारे उपदेश निकाल देंगे तेरे मुखौटाधारी राक्षस। तू क्या हमें आगाह करेगा डरपोक राक्षस बल्कि हम तुझे आगाह कर रहे हैं कि यदि अपने आपको बचाना हो तो अपना परिचय जाहिर मत कर देना वरना तेरी सारी पहलवानी पटक पटक कर निकाल दी जाएगी।
तू जिस तरह से खुद को बड़ा शरीफ़ जता कर रो रहा है कि तूने काश्मीर समस्या की बात करी थी तो तुझसे बेअदबी से झगड़ पड़े तो इतना कहना है कि झगड़े के लिये एक बार सामने आ जाओ सारा झगड़ा मिटा दिया जाएगा। कौन बुद्धू और कौन बुद्ध है ये भी बता दिया जाएगा नीच राक्षस।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

अनूप मंडल के प्यारे आदरणीय मित्रों, आप इस नीच मुखौटाधारी लेंडी कार्टून पहलवान से जिस तरह से बात कर रहे हैं असल में ये उसका आदी नहीं है इसे जब तक रगड़ कर मारा नहीं जाएगा ये सुधरेगा नहीं। इसे इसकी भाषा में पटका जाए तब सही रहेगा। इस अंग्रेजों की वर्णसंकर औलाद में इतना साहस नहीं कि सामने आ सके। बाअदब बेअदब होना तो इसे मैं सिखा दूंगा।
जय जय भड़ास

हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा ने कहा…

किलर झपाटा नाम का ये मनोरोगी अगर ज्यादा ही पगलाए तो इसे सचमुच जमकर पटक पटक कर जुतियाने की जरूरत है क्योंकि ये बातों से मानने वाला नहीं है। अरे गलीज़ ! तू एक बार सामने आ तो मैं तुझे बता दूंगी कि कितना बड़ा पहलवान है अगर मुझसे जीत गया तो वादा रहा कि सारे भड़ासी तुझसे माफ़ी माँग लेंगे और डॉ.रूपेश श्रीवास्तव भड़ास का संचालन तुझे सौंप कर अपनी सदस्यता समाप्त कर देंगे। तू अभी कहेगा कि मैं हिजड़ों से नहीं लड़ता तो चिरकुट तेरे लिए तो हम ही काफ़ी हैं डॉ.रूपेश के हाथ आ गया तो मर ही जाएगा ।
जय जय भड़ास

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