अमित जैन माफ़ी न माँग कर जैन धर्म को लज्जित कर रहे हैं

रविवार, 6 नवंबर 2011

अमित जैन आप अपनी गलतियों को मानते नहीं हैं ये तो हम सब जानते हैं। ये सब जानकर भी हम आपको जैसा का तैसा भड़ास परिवार में स्वीकारते हैं। पिछली बार आपने आएशा के बारे में और हम सबके आदरणीय भाई डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी के बारे में जितना गंदा और अश्लील लिखा था उसे किसी भी तरह से नहीं माना । आपने और प्रवीण शाह जी ने तमाम ट्रिक्स दिखाने की नाकाम कोशिशें करीं जिन्हें सबके सामने एक बार तो मैंने ही साफ़ कर के बताया था। आपने अपनी पत्नी के साथ वाली तस्वीर को लेकर तमाम बातें करीं लेकिन वो तस्वीर प्रकाशित नहीं करी ये कहकर कि भड़ास पर कोई उसमें मॉर्फ़िंग करके दुरुपयोग करेगा लेकिन आपकी आशंका निर्मूल सिद्ध हुई है। आप देख रहे हैं कि आपने दोबारा जिस तरह से अपनी पत्नी के साथ अपनी तस्वीर अपने प्रोफ़ाइल में लगाई है उस पर किसी ने कोई ऐसी हरकत नहीं करी बस आपके ही मन का चोर था। उल्टा कई भड़ासी तो सीधे ही आपकी पत्नी को बहन कह कर लिख रहे थे।
आपने मतभेदों के चलते जो कुछ भी भाई दीनबंधु की माँ-बहन के बारे में लिखा है वह अत्यंत निंदनीय और गलीज़ है मुझे बेहद शर्मिंदगी है कि आप ऐसा लिख रहे हैं। गालियाँ देने में मेरा या मेरे जैसे लोगों का कोई क्या मुकाबला करेगा लेकिन ये भड़ास का प्रभाव है कि हम बदल गए और आप हैं कि इतने गिर गए हैं कि सारे जैन भाइयों को लज्जित कर रहे हैं। जैन धर्म को मानने वालों की करुणा और अहिंसा के विषय में अन्य धर्मों को मानने वाले चर्चा करते हैं और आप हैं कि ऐसा घिनौना बर्ताव कर रहे हैं। आप यदि मतभेद रखते हैं तो उसे भड़ासी अंदाज में लिक्खिये माँ बहनों को गालियाँ देना तो भड़ासियों के प्रचलन में कभी नहीं रहा है।
जय जय भड़ास

2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

दीदी जिस तरह कुछ लोगों के गुमराह होकर आतंकवादी बन जाने से सारा हिंदू धर्म या इस्लाम लज्जित नहीं होता उसी तरह से जैन धर्म भी अमित के व्यवहार से लज्जित नहीं हो सकता क्योंकि ये मात्र जन्मना जैन हैं कर्मणा तो हरगिज नहीं वरना इस तरह का व्यवहार नहीं करते। धर्म की धार्मिकता पर प्रभाव नहीं पड़ता हाँ ये जरूर होता है कि लोग इनके अन्य हममज़हब लोगों को शंका से देखने लगते हैं कि कहीं ये भी तो व्यवहार में अमित जैन की तरह दिखावाचारी न हो।
जय जय भड़ास

अनोप मंडल ने कहा…

आदरणीय दीदी जी, सारा का सारा जैन विचार ही अत्यंत लज्जास्पद है। सबसे बुरी बात तो ये है कि इतने नीच विचारों को इन राक्षसों ने धर्म की संज्ञा दे रखी है। अमित जैन के व्यवहार से आप सब देख रहे हैं कि इनका असल चेहरा कितना खूनी है। इनके लिए मानवों की माँ बहनों का कोई सम्मान नहीं है।
ज नकलंक देव
जय जय भड़ास

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