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प्रचार माध्यमों ने करा बालमन पर अतिक्रमण......

गुरुवार, 12 मार्च 2009

प्रचार माध्यमों ने अब एक खास किस्म की रणनीति बना ली है वे पहले महिलाओं पर केन्द्रित रहा करते थे जैसे कि कार से लेकर साबुन तक के एडवर्टाइज़ में स्त्री ही नजर आती थी लेकिन अब बच्चे प्रचार के केन्द्र में हैं। प्रचार तंत्र ने बालमन पर अतिक्रमण करना शुरू कर दिया है क्योंकि अब वणिक जन उस सिद्धांत को समझ गये हैं कि बालहठ तो स्त्रीहठ से भी ऊपर मानी जाती है। जीवन बीमा से लेकर शीतल पेय के एडवर्टाइज़ अब बच्चों को केन्द्र में रख कर बनाए जाते हैं। इसका असर भी बाजार पर हुआ है जैसे कि मेरे मित्र श्री येशुदास का छोटा सा बेटा उनकी कमीज खींच कर कहता है कि पापा मुझे ये पीना है जब उन्होंने पूछा कि ये मतलब क्या, तो बच्चे ने तुरंत कहा कि पापा मुझे "ये है यंगिस्तान मेरी जान" पीना है यानि कि पेप्सी......। आप अंदाज लगा लीजिये कि ये एडवर्टाइज़ बच्चों के कोमल मन में कितने गहरे तक घुस कर अतिक्रमण कर चुके हैं।
जय जय भड़ास

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