संसद लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
संसद लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

एक लैंगिक विकलाँग ने संसद को हिला दिया........

शनिवार, 11 सितंबर 2010

कल की बात है कि मेरे मोबाइल पर एक कॉल आया जिसमें कॉल करने वाले ने पहले तीन चार बार सुनिश्चित करा कि मैं डॉ.रूपेश श्रीवास्तव ही बोल रहा हूँ। मैंने बेचारे के पैसे बचाने के लिहाज से सीधे पूछा कि क्या बात करना चाहते हैं। बताया गया कि महक बोल रहा हूँ मेरे मन में आया कि बोलूँ कि महकिये क्या महकना चाहते हैं लेकिन जब उन्होंने ये कहा कि आपने जो पोस्ट लिखी है यानि कि वे बेचारे मनीषा नारायण दीदी के अस्तित्त्व को अभी भी संदिग्ध मानते हैं। अब संसद चलाने वाला पुरोधा कुछ भी मान सकने के लिये स्वतंत्र है भला उसके ऊपर कोई है क्या?जिसका चाहे अस्तित्त्व माने जिसका चाहे नकार दे। वैसे भी एक लैंगिक विकलाँग ब्लॉगिंग में आ जाए तो इस बात को कैसे स्वीकारा जा सकता है। संसद अध्यक्ष महक जी ने आदेश करा कि मैं ऑनलाइन आकर उनसे चैट-चूट कर लूं जिसमें कि वे मुझे कुछ कहना बताना
इस कमेंट के बाद भी अट्ठाइस कमेंट प्रकाशित हैं,इसे धूर्तता नहीं तो क्या कहेंगे???
बोलना समझाना आदि चाहते होंगे। भाई! चैट शुरू हुई तो पता चला कि वे बताना चाहते हैं कि मनीषा दीदी ने गलतफ़हमी के चलते महक को बदबू लिखा है दरअसल वे खुशबू हैं। उन्होंने चैट में काफ़ी इत्र छिड़का लेकिन नेट बार बार अवरोधित हो रहा था तभी मेरी नौ बजे एक मीटिंग थी तो वो बंदे आ गए और बातचीत मुल्तवी हो गयी। मैंने महक को उनके लंबे से पत्र के उत्तर में ई-ख़त लिखा है भले ही उतना लंबा न हो लेकिन उत्तर दिया है। महक के साथ एक समस्या है कि वे अपने आपको बौद्धिक लोगों की कतार में अग्रणी रखने के लिये कुछ भी तर्क देते हैं। इस बात के प्रमाण आप पहले ही देख चुके हैं जो कि मनीषा दीदी ने लिखे हैं अब इन महाशय ने अंतर सोहिल जी को झूठा बताते हुए भी एक बात कही है, ठीक इसी प्रकार ये लिखते हैं कि इनकी मूर्खता के चलते जो बहन का रिश्ता इन्होंने माना था वो घड़ियाल है(अरविन्द मिश्रा जी के अनुसार उसे होमो सैपिएन्स होना चाहिए)। इनका कहना है कि मनीषा दीदी को कुछ भी लिखने से पहले संसद में जाकर इन्हें एप्रोच करके स्पष्टीकरण ले लेना चाहिये तब लिखना चाहिए था। बाबू जी आम आदमी का वो भी एक लैंगिक विकलाँग का संसद
विचार विमर्श का साहस??? आओ बाबू जरा करो तो भाग मत जाना बाकी बौद्धिकों की तरह
में पहुंचना आसान नहीं है जब कि लोकतंत्र(?)का पुरोधा आप जैसा हो। आपने संसद से सड़क पर मनीषा दीदी(आपके अनुसार तो ये पोस्ट मैंने लिखी है) की बात पर प्रतिक्रिया तब दी है जब आपको रगेदा गया और आपकी संसदीय गरिमा को धोया नहलाया गया। पहले तो आप भी देश की सरकार की तरह कुछ भी तानाशाही अंदाज में कर रहे थे कि भला संसद से आगे कौन है लेकिन जब मजबूरन मनीषा दीदी ने कुछ कुछ माओ?वादियों की तर्ज पर लिखा तो आप भी आ गए वार्ता करने मनमोहिनी मुद्रा में मनमोहन बन कर।
आपकी बातें पता नहीं कुटिलता से भरी हैं कि बेवकूफ़ी से ये समझ पाना हम जाहिल गंवार भड़ासियों के लिये अत्यंत कठिन है। सच तो ये है कि हम घड़ियाल और इंसान के आँसुओं में अंतर नहीं कर पाते और किसी ही जानवर को रोता देखते हैं तो अपना गन्दा सा गमछा लेकर उसके आँसू पोंछने लगते हैं भले ही बाद में वो हाथ ही चबा जाए। यही तो भड़ासियों की शक्ति है उनके इमोशन्स, भावुकता ही तो है हमारे पास जिसके चलते मुंबई में रह कर ही ठाकरे परिवार को चुनौती दे देते हैं। आप कमेंट हटाने के बारे में लिख रहे हैं कि "मेरे अंतिम कमेंट में लिखा है कि अब इस बारे में कोई कमेंट पब्लिश नहीं करा जाएगा" जबकि उसके बाद अट्ठाइस कमेंट तो मुझे प्रकाशित दिख रहे हैं जाहिर है इस बात का भी कुछ न कुछ बचाव महक के पास होगा लेकिन यार आपको क्यों ऐसा लगता है कि आप यदि भड़ासियों की नजर में बुरे या चिरकुट हैं तो आप सचमुच चिरकुट हैं अरे भाई! आप महान हो सकते हैं हो सकता है कि आपकी महानता को देख पाने की नजर ही अभी हम सड़कछाप भड़ासियों में विकसित ही न हुई हो। आप ने लिखा कि आपके खिलाफ़ आपकी पूर्वबहन(मूर्खता वश स्वीकारा रिश्ता है ये आपके अनुसार) जो कमेंट लिखे हैं वो आपने हटाए नहीं तो प्यारे महान महक ! बात इतनी सी है कि ये तो एक सीधा तरीका है उस नादान बहन को बुरा से बुरा दिखा देने के लिये कि देखो ये दुष्टा मुझ महान आदमी को गाली दे रही है और मैं हूं कि अपनी महानता के चलते उन गालियों को सहेजे हुए हूं। आप यदि मानते हैं कि आपने मूर्खता करी है तो इन बातों को उसका प्रसाद मान कर स्वीकार लीजिये। यदि आपको मूर्ख या बेवकूफ़ लिख दिया गया है तो इसमें क्या गजब हो गया जनाब?
महक बाबू ! जिस दिन आप रिश्तों की गरिमा साफ़ मन से स्वीकार पाने जितनी निर्मलता पा लेंगे तब समझ सकेंगे कि भाई बहन के रिश्ते माउस की एक क्लिक से नहीं टूटते या जुड़ते। जब रिश्ते जुड़ जाते हैं तो फिर ऐसे वैचारिक मतभेदों से खत्म नहीं होते कि एक पोस्ट से पहले भाई-बहन थे फिर सौ पचास कमेंट्स आए और रिश्ता खत्म......। भड़ासी आपस में एक दूसरे को चुटकियाँ लेते हैं कभी कभी तो लपटा-लपटी भी कर लेते हैं इसी मंच पर लेकिन कभी रिश्ते नहीं खत्म होते यदि जुड़ने वाले ने भड़ास के दर्शन को आत्मसात कर लिया है। जब किसी को स्वीकारा तो उसकी सारी अच्छाइयों और बुराइयों के साथ स्वीकारा जाता है ये नहीं कि अपने मेलबॉक्स में लगे फिल्टर की तरह उसकी बुराइयों को छान देना चाहो। अब शायद महक बाबू आप समझ सकें को फ़ेसबुक पर लगी पचास करोड़ लोगों की भीड़ और भड़ास पर मौजूद कुछ लोगों के रिश्तों में क्या अंतर है। भड़ासी देश के किसी भी कोने में हों लेकिन एक दूसरे से मिलते रहते हैं एक दूसरे के सुख दुःख में भागीदार होते रहते हैं। मुंबई जैसे व्यस्त शहर में हम एक दूसरे से मिल लेते हैं और तो और भाई गुफ़रान सिद्दिकी तो हमसे मिलने के लिये अयोध्या से मुंबई आ गए थे ये भड़ास से जुड़ा रिश्ता नहीं तो और क्या है कि भाई रजनीश झा दिल्ली से हम मुंबई के भड़ासियों से मिलते हैं, भाई गुरूदत्त तिवारी मिलने के लिये आ जाते हैं जो कि सतना(म.प्र.) के रहने वाले हैं......... ऐसे न जाने कितने रिश्ते हैं जिन्हें गिनाने लगूं तो आप थक जाएंगे।
बस इतना कि रिश्ते न तो क्लिक से टूटते हैं न ही क्लिक से जुड़ते हैं। आप जो हैं वह सामने है। हमें जो हैं बना रहने दीजिये यदि संसद की खिड़कियाँ सिर्फ़ सांसदों के लिये खुली रखें तो ही आपके लिये सही होगा क्योंकि यदि महलों की बात सड़क पर आएगी तो सड़क पर खड़ा गँवार भी उसपर अपनी राय देगा। उम्मीद है कि आप संसद को सिर्फ़ सांसदों के देखने और विजिट करने के लिये सीमित कर देंगे। लेकिन इससे आपको मिलने वाली प्रसिद्धि में अड़ंगा लग जाएगा। वैसे आप संसद की गतिविधियों को दूरदर्शन से प्रसारित करवा सकते हैं ताकि आम आदमी देख सके कि संसद में क्या चल रहा है। सोच लीजिये..............।
मनीषा दीदी की जय हो
जय जय भड़ास

Read more...
प्रकाशित सभी सामग्री के विषय में किसी भी कार्यवाही हेतु संचालक का सीधा उत्तरदायित्त्व नही है अपितु लेखक उत्तरदायी है। आलेख की विषयवस्तु से संचालक की सहमति/सम्मति अनिवार्य नहीं है। कोई भी अश्लील, अनैतिक, असामाजिक,राष्ट्रविरोधी तथा असंवैधानिक सामग्री यदि प्रकाशित करी जाती है तो वह प्रकाशन के 24 घंटे के भीतर हटा दी जाएगी व लेखक सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी। यदि आगंतुक कोई आपत्तिजनक सामग्री पाते हैं तो तत्काल संचालक को सूचित करें - rajneesh.newmedia@gmail.com अथवा आप हमें ऊपर दिए गये ब्लॉग के पते bharhaas.bhadas@blogger.com पर भी ई-मेल कर सकते हैं।
eXTReMe Tracker

  © भड़ास भड़ासीजन के द्वारा जय जय भड़ास२००८

Back to TOP