देर है पर अंधेर नही

शनिवार, 14 फ़रवरी 2009

रोंगटे खड़े कर देने वाले निठारी में दोसी करार दिए गये मोहिंदर और कोली को फासी की सजा सुनाई गयी
अदालत के एश फैसले से पीड़ित परिवार को जहाँ कुछ राहत मिली है वाही एश्सेस समाज में ये संदेश पहुंच है की न्याय में देर है पर अंधेर नही है
ज्ञात हो की फिछले चार साल से पीड़ित परिवार न्याय की उमीद लगाये बैठे थे अदालत ने दोनों को फासी की सजा सुनाई है एश फैसले के खिलाफ पंधेर और कोली का इश्के खिलाफ उच्च अदालतों में जाना चाहते है लेकिन वहा पर भी उनके किए गये कर्मों का फल जरुर मिलेगा,
न्याय में देर है पर अंधेर नही है

3 टिप्पणियाँ:

फ़रहीन नाज़ ने कहा…

काश ऐसे ही हमारे जस्टिस आनंद सिंह का मामला भी अपने अंजाम तक आ जाए
जय जय भड़ास

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

जस्टिस आनंद सिंह को अगर उच्चतम न्यायालय में अपना पक्ष रखने दिया जे तो न्याय पर आस्था हो, ऐसे डुगडुगी से जुड़ीसियरी लोगों को भरमा रही बस.
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

सच कहा रजनीश भाई ये डुगडुगी और झुनझुने से ज्यादा कुछ नही है जो मासूम जनता को भ्रमित करने के लिये है
जय जय भड़ास

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