...और आजादी चाहिए

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2009

..... और आजादी चाहिये ..... इतनी कम पड़ रही है ... सबको आजादी नही मिली ..... सम्मान से जीने की आजादी तो बिल्कुल नही मिली । राम राज्य का सपना साकार नही हुआ । विदेशी ताकतों की जगह अब देशी लुटेरे ही जनता का हक़ मार रहे है ..... ये अधूरी आजादी है .... हमें पुरी चाहिए । धीरे -धीरे ही सही लेकिन चाहिए ....चुप नही बैठने वाले ....लड़ कर लेगे ।
बच्चे थे तो सोचते थे .... लड्डू खाना ही आजादी है ...... आज सोचते है काश सबको रोटी मिलती ..... आजादी लड्डू से नही ,रोटी से मिलेगी
रोटी पाना आज भी ...... गांधी के राज में दुर्लभ है ...... आम आदमी कहने को तो रास्त्रपति और प्रधानमन्त्री बन सकता है ..... लेकिन सिर्फ़ कागज के टुकडों पर ...... हकीकत कौन नही जानता ..... सत्ता पर किन लोगों का कब्जा है ......
देश की बुनियाद में ही कुछ गड़बड़ है .... सोचना होगा .......

1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

बड़ी प्यारी और जिम्मेदारी भरी बात है ये कि अगर मेरा देश महान और आत्मनिर्भर या सही स्थिति में नहीं है तो हम सब आत्मावलोकन करें कि हम अपने निजी स्तर पर अधिकतम क्या योगदान कर सकते हैं......
डा.देशबंधु बाजपेयी से लेकर जस्टिस आनंद सिंह सभी तो लगे हैं अपने प्रयासों में तो देर किस बात की है लग जाइये खुद भी और जोड़िये और लोगों को अपने साथ इस महारचना में....
जय जय भड़ास

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