जितना बड़ा आदमी उतना छोटा कानून?

शनिवार, 21 फ़रवरी 2009

बिहार में एक महिला अधिकारी ने पुलिस इंस्पैक्टर को चालान न काटने के लिये मजबूर किया जबकि उक्त महिला अधिकारी की गाड़ी नो पार्किंग जोन में खड़ी थी। इसके लिये उसने अपने पद का रोब दिखाया और नफे में जाते-जाते पुलिस अधिकारी द्वारा उसे सैल्यूट भी किया गया। इस घटना से मुझे एक पुराना वाकया याद आ गया। पहाड़ी क्षेत्रों में रात आठ बजे के बाद गाड़ी चलाने पर रोक है। इसके लिये विभिन्न स्टेशनों पर पुलिस द्वारा बैरियर लगाये जाते हैं। यात्रा काल में इन बैरियरस पर आठ बजे के बाद काफी तादात में वाहन इकट्ठे हो जाते हैं और मैदानी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिये यह बड़ी ही असहज स्थिति होती है। इस पर वे लोग बहुत भुनभुनाते हैं और विभिन्न प्रलोभनों जैसे पैसे से या फिर अपने पद का रोब दिखाकर वे डयूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर गेट खोलने का दबाव बनाते हैं। कुछ वर्ष पूर्व ऐसी ही स्थिति में एक वाहन बैरियर के नजदीक आकर रुका और उसमें से कोई महिला उतरी और पुलिसवालों के लिये गेट खोलने के लिये कहने लगी। बातों ही बातों में पता चला कि वह एक पत्रकार है। पुलिसवालों ने उक्त महिला से प्रार्थना की कि मैडम आप थाना इंचार्ज से बात कर लीजिये अगर वे अनुमति दे देंगे तो आपको आगे जाने देंगे। इस पर उस तथाकथित पत्रकार ने कहा कि वह पुलिस अधीक्षक रैंक से नीचे के किसी भी अधिकारी से बात नहीं करेगी। खैर कुछ देर बाद उसे आगे जाने की अनुमति मिल गयी। इस घटना का यह अर्थ निकला की कानून सिर्फ आम आदमी के लिये है और खास लोगों के लिये इसमें कुछ लचीलापन लाया जा सकता है। बात इतनी ही होती तो समझा जा सकता था परंतु उसके बाद जो अन्य लोग थे वे भी पुलिस वालों से उन्हें भी आगे जाने के लिये कहने लगे और उस महिला के कारण पुलिस को अन्य वाहनों को भी छोड़ना पड़ा। अब अगर ऐसे में पहाड़ी मार्गों पर कोई दुर्घटना हो जाती तो कौन इसके लिये जिम्मेदार होता वह पत्रकार या पुलिसवाले या फिर वे लोग जो पत्रकार की देखादेखी में आगे बढ़ गये। बड़ा आदमी छोटा कानून?

4 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

कठैत जी सच तो ये है कि कानून सबके लिये बराबर है लेकिन एक जगह गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में कहा है कि समरथ को नहिं दोस गोसाईं....
ये बात का अनुमान उन्हें काफ़ी पहले ही हो गया था जब भारत में "कोडीफ़ाईड ला" था ही नहीं....
इस तरह की बातों को उधेड़िये कस कर ताकि जीवन सामान्य होने में मदद मिले। हम सड़क का टैक्स भरते हैं गड्ढों का नहीं... यदि अपने मोबाइल के कैमरे से कोई स्ट्रिंग आपरेशन मारा हो तो वीडियो डालिये बेनकाब करिए उन्हें जो भ्रष्ट हैं किसी के लिये भ्रष्ट आचरण के लिये कोई एक्स्क्यूज़ नहीं है
जय जय भड़ास

अक्षत विचार ने कहा…

धन्यवाद श्रीवास्तव जी हमारी कुंठाओं को बाहर निकालने के लिये माध्यम प्रदान करके आप साधुवाद के पात्र हैं। ऐसे ही प्रोत्साहन की आपसे आवश्कता है।

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

भाई अक्षत,
बढिया लिखा आपने,
देश की समस्याओं पर ऐसे ही प्रकाश डालते रहिये, भड़ास निकालते रहिये.
जय जय भड़ास

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

भाई अक्षत,
बढिया लिखा आपने,
देश की समस्याओं पर ऐसे ही प्रकाश डालते रहिये, भड़ास निकालते रहिये.
जय जय भड़ास

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