अभिषेक जी शायद भड़ास को समझ नहीं पाए आप....

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009


अभिषेक जी रात में मैंने आपके sms के मिलते ही तत्काल आपसे बात करी जिसमें कि आपने लिखा है कि आपने गलती से किसी पोस्ट पर दो टिप्पणियां कर दी हैं तो माडरेटर अपने तकनीकी अधिकार से एक टिप्पणी हटा दें। जबकि ऐसा हरगिज नहीं है या तो आप किसी भारी गलतफ़हमी का शिकार हैं या फिर जानबूझ कर कोई माहौल रचना चाहते हैं क्योंकि आप क्या ये नहीं जानते कि जो भी भड़ास का सदस्य होता है उसकी टिप्पणी बिना माडरेट करे ही प्रकाशित हो जाती है? टिप्पणीकार स्वयं चाहे तो अपनी टिप्पणियां हटा भी सकता है ऐसी सुविधा तो ब्लागर ने स्वयं दे रखी है।
लोकतंत्र का मतलब क्या होता है जरा बताइयेगा ताकि हम सब जान सकें कि जब गांव में चौपाल पर पंचों के सामने गाली-गलौज करता है तो उसके साथ क्या करा जाता है मेरे अनुभव में तो उसे सब लोग कई बार हर तरह से समझाते हैं न समझने पर पिछवाड़े लात मार कर भगा दिया जाता है। प्रमाण के लिये मैं माडरेशन वाला पेज सबके सामने रख रहा हूं जो कि बेनामी कमेंट्स द्वारा दी गयी गालियों से भरा है यदि आप सब सहमति दें कि मा-बहनों को लज्जित कर देने वाली गालियां यहां प्रकाशित करी जाएं तो अवश्य बताइये ताकि अभिषेक जी को भ्रम न हो कि यहां कोई तानाशाही चल रही है। पता नहीं २३ तारीख की रात ११ बजे से किसका मुख ताक रही हैं इनकी टिप्पणियां??????????
आरोप लगाने से पहले जरा विचार कर लिया करें बस इतना ही कहना है वरना कल को आप भी कहेंगे कि भड़ास को ओसामा बिन लादेन से पैसा आ रहा है।

6 टिप्पणियाँ:

फ़रहीन नाज़ ने कहा…

बड़ी छोटी सी बात है ये या तो ये स्वयं को कम्प्यूटर का जानकार बताते हैं वो बात गलत है या फिर ये कोई साजिश कर रहे हैं प्रशांत की तरह से उपद्रव करने की वरना ये टिप्पणी हटाने के लिये डा.साहब को क्यों sms करते? ध्यान रहे इनको भी देश में हिंदू-मुस्लिम के अलावा कोई समस्या बड़ी नहीं लगती। भड़ासी चाहिये भाई भीड़ नहीं जब मन करे तो प्रशांत की तरह चले जाइयेगा कोई आपको गलबहियां डाल कर मनुहार न करेगा कि जाओ मत वरना हमारी दुनिया उजड़ जाएगी। बड़ा सड़ा सा आरोप लगाया है इन्होंने भड़ास और डा.रूपेश पर......
जय जय भड़ास

ज़ैनब शेख ने कहा…

अरे भाई सदस्यों के कमेंट तो बिना माडरेशन के आते हैं इन्हें ये क्या भूत सवार हो गया है या फिर नशे में पोस्ट डाल दी है? हो सकता है कि ये भी प्रसिद्धि के लिये टोटका अपना रहे हों....
जय जय भड़ास

अभिषेक आनंद ने कहा…

बुरा न मने डॉ साहब पर जितना आप लोकतंत्र में विश्वास कतरते है उतना ही मै भी. अब ये गलती कहा से हो रही है पता नहीं पर टिपण्णी की बाबत मैंने आपसे स्वयम बात की थी. और फरहीन जी आप खुले शब्दों में जाने के लिए कह रही है तो मुझे भी कोई एतराज़ नहीं. भड़ास पर आपको भडासी चाहिए जो की आपके मन की बात करे तो अलग बात है वरना बहस चाहती है तो आपको बोलना ही होगा. बात करनी होगी. प्रशांत भाई का तरीका गलत था और इस बाबत मैंने खुद लिखा था, आप भी पढ़ सकती है उस पोस्ट को. चलो मान लिया इस बात को कि समस्याएं बहुत सारी है. हर समस्या उठानी ही चाहिए, उठाई भी जा रही है और उठाई भी जायेगी. पर क्या इससे ये बात साबित हो जा रही है कि जो मैंने लिखा है वो कोई समस्या नहीं है और उसपर बात होनी ही नहीं चाहिए.
अगर ऐसा है तो आप ही बताइए किस समस्या पर बहस की जाये. जिस पर आपलोग चाहे उसे ही बहस का मुद्दा बनाये. और मै पीठ दिखा कर भागने वाला नहीं. अगर कुनबे में आया हूँ तो बोलूँगा ही और आदरणीय डॉ साहब मै कभी अनर्गल आरोप लगाने में विश्वाश नहीं करता हूँ.
आगे आपकी मर्जी जो करना है करे.

अभिषेक आनंद ने कहा…

जैनब जी पर जब ये मेरे साथ हुआ तभी मैंने कहा. जब मै कमेन्ट डाल रहा था तो वह मोडरेशन में चला जा रहा था. और जहा तक प्रसिद्दि के टोटके की बात है तो इसके लिए इस ब्लॉग पर लिखने की जरुरत नहीं है... अगर यूँ ही बेतुका लिख कर प्रसिद्दि चाहिए तो और भी बहुत सारे तरीके है.. ये मै जरुर मान सकता हूँ की नेटवर्क में किसी समस्या या किसी प्रकार की ग़लतफ़हमी के कारन हो गयी हो. जहा तक इसलाम में नशा हराम होने की बस बात कही जाती है पर मै इसे अपने जीवन में उतर कर रखता हूँ. और अगर कोई भडासी कुछ कहता है तो कहेगा ही.
अच्छा होता व्यर्थ की बहस और व्यक्तिगत आक्षेप की जगह मुद्दे पर तार्किक विचार रखा जाता.
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अभिषेक भाई अभी तक बात जहां थी वहीं है क्योंकि आपने जो जवाब का जवाब दिया था वो सवाल जैसा होने के कारण मुझे स्वयं ही कटघरे में आकर उत्तर देना पड़ा और मैं सबूत के साथ आप सबके सामने पेश हुआ आप पहले अपनी बात को स्पष्ट करिये तब आगे बढिये वरना मन में कहीं न कहीं एक कसक रह ही जाएगी कि आपने जो भी करा उसको साफ़ नहीं करा। फ़रहीन ने जो भी लिखा है वह मात्र क्षणिक नाराजगी है क्योंकि आपने स्पष्टीकरण उपलब्ध ही न नहीं कराया और इसे व्यक्तिगत आरोप मान लिया जबकि ये आपकी तरफ़ से माडरेटर्स पर आरोप था कि कमेंट पर लोकतांत्रिक व्यवहार नहीं करा जा रहा जिस पर मैंने अपनी सफ़ाई में माडरेटर्स के लिये गालियों भरे पेज को आप सबके सामने मजबूरी में रखा क्या आपको अभी भी लगता है कि सब सामान्य है???
जय जय भड़ास

अभिषेक आनंद ने कहा…

मै व्यक्तिगत रूप से इस प्रकार के अपशब्दों के प्रकाशन का समर्थन नहीं कर सकता और इस मामले में आप सही है. दूसरी बात अगर फरहीन जी के लिखे को क्षणिक नाराजगी मानते है तो मेरे पोस्ट को क्षणिक आवेश में लिखा क्यों नहीं मानते? अगर एक को नाराजगी हो सकती है तो उसी स्थिति में दुसरे पर नशे में पोस्ट लिखने का आरोप लगाना कहा सही है? मै अनर्गल में कभी विश्वाश नहीं रखता. जो भी हुआ ग़लतफ़हमी में हुआ, पर मुझे तो एक वक्त ये लगा ना कि मेरी टिपण्णी क्यों नहीं आ रही है. जहा तक कंप्यूटर के ज्ञान का सवाल है तो किसी भी सिस्टम में गलती होने की संभावना रहती है. जिसे भी मर्जी हो मेरे कंप्यूटर ज्ञान को परख सकता है. और अगर मुझे लगा कि अपनी बात कहनी है तो मै तो कहूँगा. आपको पता होना होना चाहिए कि चौपाल पर सभी एक मत के हो यह जरुरी नहीं.
आगे आपकी मर्जी है मेरे पोस्ट को रखे या डिलीट करे, उसे नशे में लिखा माने या पागल का प्रलाप. पर कोशिश जरुर रखियेगा कि यह चौपाल एकात्मक प्रलाप ना बन कर सार्थक बहस का मंच बन सके.
जय जय भड़ास

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