वर्तमान उपराष्ट्रपति महोदय हमारे आदर्श जज श्री आनंद सिंह जी को दस मिनट दें.......

शनिवार, 9 मई 2009

आज भूतपूर्व राष्ट्रपति महोदय का चित्र भड़ास पर प्रकाशित देखकर के अंदर ही अंदर जो कुछ खदबदा रहा था बाहर आ रहा है। मैंने सबसे पहले हमारे आदर्श जज श्री आनंद सिंह जी के छोटे भाई से बात करी कि भाई इस विषय पर लिखूं या नहीं या आपको कोई कानूनी दिक्कत तो न होगी तो उन्होंने सहर्ष कहा कि लिखो भाई लिखो...खूब लिखो लेकिन जिन्हें लिख रहे हैं उनके कान पर जूं तक रेंग जाए तब आपका लिखना सार्थक होगा क्योंकि हम तो लिखे ही चले जा रहे हैं आप भी अपने मंच पर लिखो। उनके विराट संघर्ष से संबंधित मामले पर उनके अनुसार एकबार तत्कालीन उपराष्ट्रपति श्री भैरोसिंह शेखावत जी ने लंच के बाद मिलने का समय दे दिया था लेकिन फिर उनकी तबियत खराब हो गयी और मुलाकात टाल दी गयी। उसके बाद से अब तक राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति आते हैं जाते हैं लेकिन जज आनंद सिंह के उठाए सवालों के उत्तर देने के लिये उनके पास समय नहीं रहता; जबकि शादी-ब्याहों से लेकर फ़ीता कटाई के कार्यक्रमों के लिये तक समय रहता है लेकिन जुडीशियरी के मामले पर बात करने या उत्तर देने का समय नहीं है। विभिन्न धर्मगुरुओं से आशीर्वाद लेने खूब जाते थे जनाब, मैंने देखा एक तस्वीर में मां अम्रता आनंदमयी इन्हें गले लगा कर आशीर्वाद दे रही हैं और इस पोस्ट के चित्र में भूतपूर्व राष्ट्रपति जी विभिन्न धर्मों के प्रति अपनी श्रद्धा दर्शाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। साधुओं-मुनियों, पंडितों और उलेमाओं के बीच जाकर सवाल-जवाब कर रहे हैं लेकिन जज आनंद सिंह जी ने जब जुडीशियरी में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जंग छेड़ दी और उसकी बड़ी कीमत चुकाई तब से अब तक इनके पास कई पत्र भेजे तब इन्हें समय नहीं रहा होगा इतने बड़ी राष्ट्रीय समस्या पर ध्यान देने के लिये लेकिन अब तो फुरसत हैं क्यों नहीं हमारे आदर्श जज श्री आनंद सिंह जी को दस मिनट दे पाते? इस बात का इनके पास शायद कोई संतोषजनक उत्तर होगा। मैं इस मंच पर लिख कर पता नहीं वर्तमान उपराष्ट्रपति महोदय तक अपनी बात पहुंचा पाउंगा या नहीं लेकिन फिर भी लिख रहा हूं कि वे जज आनंद सिंह के मामले में सुनवाई के लिये समय दें। एक बात और ध्यान देने वाली है कि जज श्री आनंद सिंह जी के भाई ने फोन पर बताया था कि इनकी तरफ़ से अभी हाल ही में एक पत्र भी वर्तमान उपराष्ट्रपति महोदय को लिखा गया है जो अभी तक अनुत्तरित है। ईश्वर हमारे पहले और दूसरे नागरिकों को सेवाकाल में मात्र दस मिनट का समय दे दे यही मेरी प्रार्थना है दुनिया बनाने वाले से..................
जय जय भड़ास

1 टिप्पणियाँ:

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

लंच के बाद समझ आया होगा कि गलती कर दी इन्हें मिलने का समय देकर तो टट्टियां लगने लगी होंगी
जय जय भड़ास

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