असली खिलाड़ी हैं टीम पाकिस्तान के !

शुक्रवार, 19 जून 2009

एक सही और सच्चे क्रिकेट प्रेमी होने के नाते मैं अपनी टीम का तो प्रसंसक हू ही और आजीवन रहूँगा भी। लेकिन मुझे क्रिकेट का खेल भी उतना ही पसंद है जितनी अपनी टीम इंडिया। हार और जीत खेल का हिस्सा होता है और क्रिकेट जैसे खेल में कोई शास्वत विजेता नही रह पाया है। इतिहास पर नज़र डाले तो किसी ज़माने में वेस्ट-इंडीज की टीम अपराजेय मानी जाती थी। समय बदला तो अपेक्षाकृत कमजोर भारतीय टीम ने इन्ही धुरंधरों को धूल चटा दी और विश्वविजेता बने। हाल में ही ऑस्ट्रेलिया का उदहारण आप सबके सामने है, लगातार तीन बार चैम्पियन रही ऑस्ट्रियाई टीम आज किस हाल में है यह किसी से छुपा नही है। टीम इंडिया की धोनी ब्रिगेड ने हाल में जो प्रदर्शन किया है वह भी इसी खेल की कुछ दिलचस्प कड़ियों का एक हिस्सा भर है। ऐसे में क्रिकेट प्रेमियों को इतना हताश नही होना चाहिए अरे संतोष तो इस बात का होना चाहिए की सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ी और गांगुली, द्रविड़ जैसे विश्वस्तरीय खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम औसत दर्जे की बांग्लादेश से हारकर विश्वकप के पहले ही दौर से बाहर हो सकती है, मियां धोनी किस खेत की मुली हैं। दो-चार सीरीज़ से किसी को इतना हाइप भी नही देना चाहिए की बेचारा गिरे जो मुई जमीन भी नसीब न हो। खैर इस बार की भारतीय टीम में जीतने की भूख मर चुकी थी, कारन स्पस्ट है की सारे खिलाड़ी पैसा, सोहरत और ग्लेमर से अघाये हुए हैं। किसी को भी न तो नाम कमाने की जरुरत थी और न ही अपने लिए पैसा कमाने की, ये सब तो बोर्ड से खूब मिल ही रहा है। एक कोरम पुरा करना था , सो चले गए, इस भयानक गर्मी में इसी बहने कुछ ठंडी हवाएं खाने के लिए। चलिए बोर्ड, चयनकर्ता और खिलाड़ियों ने अपने हिसाब से सब कुछ किया मगर सफल नही हुए तो क्या ? जान लोगे क्या बच्चों की , वैसे भी धोनी महाराज का एयेर्सेल विज्ञापन भी तो यही कहता है - इट्स टाइम टू मूव ओन्न ...भाई इसबार क्रिकेट के नजरिये से देखे तो पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने गजब का जज्बा दिखाया है। अगर आप सचमुच क्रिकेट प्रेमी हैं और इसे किसी और चश्मे से नही देखते तो पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने आपको भी इम्प्रेस किया होगा! कुछ दिनों पहले ही श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर हुए आतंकी हमले और पाकिस्तान से विश्वकप मेजबानी छिनने के बाद वहां के खिलाड़ियों ने जिस जीवटता का परिचय दिखाया है वह भारत का कोई पड़ोसी ही दिखा सकता है। विश्व क्रिकेट बिरादरी से अलग-थलग हो चुका पाकिस्तान अभी दुनिया भर से अपने को दरकिनार न करने के लिए रिरिया रहा है । ऐसे में इन खिलाड़ियों की मनोदशा और इनका कांफिडेंस कितना प्रभावित हुआ होगा इसका अंदाज आप ख़ुद लगा सकते हैं। ऐसे में पाकिस्तानी टीम से हमेशा अन्दुरुनी झगडों की बातें भी आते रहती हैं। लेकिन इस टीम ने सारे मिथक तोड़ डाले हैं और ऐसा खेल दिखाया है की इनकी तारीफ करनी ही चाहिए। आतंकवाद और मिसाइलों से जूझ रही पाकिस्तानी आवाम को खुशी के कुछ इन खिलाड़ियों से मिले है तो इसके पीछे इनकी इच्छासक्ति के सिवा कुछ नही है। आशा है की फाइनल मुकाबले में श्रीलंका टीम भी कुछ इसी जद्दोजहद के साथ पाकिस्तान के सामने होगी, यदि पाकिस्तान जीत जाए तो कोई आश्चर्य नही होनी चाहिए..इनके हौसले बुलंद है और श्रीलंका ख़ुद को साबित करने के लिए गुर्रा रहा है। टी-२० का अन्तिम मुकाबला वास्तव में महज एक मैच नही होगा बल्कि हालिया घटना के बाद दोनों टीमों की आपसी जुम्बिश होगी। जिसका नज़ारा काफी दिलचस्प हो सकता है । अब मुझे ये मानने में जरा भी संकोच नही हो रहा है की पिछला विश्वकप को भारत ने जीता था, तो वह महज एक तुक्का था, असली विजेता तो पाकिस्तान ही था..जो अंततः विजेता बनने की रह पर है .................जो भी हो क्रिकेट की विजय हो, खेल की जय हो................
जय भड़ास जय जय भड़ास

1 टिप्पणियाँ:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

बढ़िया पोस्ट,
भाई मनोज जरी रहिये.
जय जय भड़ास

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