रात को दो बजे संजय सेन सागर "बुद्धिजीविता" बेच रहा है

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

अचानक रात में दो बजे मोबाइल पर संदेश आने का संकेत हुआ तो मरीज़ से बात रोक कर मोबाइल देखा कि इस समय किसका संदेश है और ऐसी क्या इमर्जेंसी है? लीजिये प्रस्तुत है स्वयंभू बुद्धिजीवी संजय सेन सागर की मेरे साथ संदेश वार्ता की ज्यों का त्यों वर्णन जो कि मेरे मोबाइल पर सुरक्षित है--
संजय सेन - नमस्कार, यंगिस्तान मीडिया प्राइवेट लिमिटेड नये वर्ष पर हार्टबीट प्रिन्ट पत्रिका का प्रकाशन करने जा रहा है। आपसे अनुरोध है कि युवा वर्ग से संबंधित लेख, जानकारी, पोएम, स्टोरी हम तक पहुंचाएं ईमेल करें
मैं - यशवंत सिंह को तेल मालिश करके क्या पाया? प्रभु तुम्हे सदबुद्धि दे। हमसे कभी उम्मीद न रखना कि भड़ासी तोलुओं को सहयोग करेंगे।
संजय सेन - माफ़ कीजिये वो मैसेज बुद्धिजीवियों के लिये था पता नहीं आपका नंबर कैसे बचा रहा। नहीं आपसे उम्मीद भी नहीं है शुभरात्रि जै हिदुस्तान जै यंगिस्तान
मैं - ऐसे माफ़ नहीं करूंगा सुबह पहले तुम्हारी और बुद्धिजीवियों की भड़ास पर ली जाएगी उसके बाद देखते हैं। बुद्धि होकर भी गलती कर दी :)
संजय सेन - अब एक काम कर जो बने सो कर लेना, भोंकना बंद कर। भड़ास में देखेगा मुझे तू। चल अब मैसेज करना बंद कर नींद आ रही है।
मैं - आ गया अपनी औकात पर। हम भौंकते हैं और काट भी लेते हैं पर तेरी तरह चाटा-चूसा नहीं करते। नींद तो हम उड़ाएंगे तेरी। तूने शुरू किया है।
अब आप सब सोच रहे होंगे कि ये मुझे क्या हो गया है जो कि मैं किसी के संदेश का इतना कटु प्रतिसाद दे रहा हूं। बात ज्यादा पुरानी नहीं है जब इसी संजय सेन ने भड़ास के हत्यारे यशवंत सिंह को तेल लगाते हुए हमारा अकारण विरोध करना शुरू करा था लेकिन अब चूंकि बनियागिरी पर उतर आया है तो सोचा होगा कि अपनी दुकान की एडवर्टाइज़ सभी मोबाइल नंबरों पर कर दी जाए। ये साले प्रोफ़ेशनल लोग बड़े ही हरामी किस्म के होते हैं हर रिश्ते को कैश करने के चक्कर में रहते हैं, सब बेच कर टके कराना ही इनका उद्देश्य रहता है, ये आत्मा बेच देते हैं, ईमान बेच देते हैं , रिश्ते बेच देते हैं और न जाने क्या क्या....। रात को दो बजे मैं अपने मरीजों की सेवा में हूं तब इस तोलूराम को बनियागिरी सूझ रही है कि साला अपनी दुकान की मार्केटिंग कर रहा है। हो सकता है कि ऐसा कोई संदेश आप में से किसी के पास भी आए। अब ये सीख गया है कि नाम के छपास की प्यास रखने वाले चूतियों की इस देश में कमी नहीं है तो अब ये प्रकाशन में उतर आया है। इस चिरकुट को लग रहा था कि समय के साथ सब बदलता है तो डा. रूपेश श्रीवास्तव भी बदला होगा और इस तोलूराम के प्रति मित्रता का भाव रख कर जैसे सब नये काम के प्रारंभ की शुभकामना देते हैं वो भी देगा लेकिन हमारी फितरत नहीं बदलती जो थे वो हैं और मरते दम तक रहेंगे, तुम हो जो गिरगिट की तरह रंग बदलते रहते हो। जो चूतिये नाम छपवाने को बौराए होंगे वो इसे कंटेंट भेजते रहेंगे और ये उनकी दम पर अपनी दुकान चलाता रहेगा। इस ढक्कन के बारे में जानना हो तो भड़ास की शुरूआती पोस्ट्स देखें तो आप जान जाएंगे कि ये कितना बड़ा मक्कार और धूर्त है। आपने देखा कि किस तरह अपने संदेशों में इसे कुरेदने पर अपनी असल औकात पर आ गया ये चिरकुटहा प्रकाशक
जय जय भड़ास

3 टिप्पणियाँ:

मनोज द्विवेदी ने कहा…

NIHAYAT HI KAMINA ADAMI HAI. ISKI HIMMAT KAISE HO GAYI APKO MASSAGE KARNE KI!!!!!!

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

गुरुदेव,
ये संजय सेन सागर वो ही है जो यशवंत कि दलाली कर रहा था, ब्लॉग के बहाने अनैतिकता को आपसे ही स्वीकार कर चुका है और फर्जी नाम से लड़कियों के आई डी बना कर, लड़कियों के तस्वीर लगा कर, लड़कियों के आई डी से टिपिया कर ब्लॉग में चर्चा करवाता रहा है.
वैसे भी ये इसकी कोई नयी करतूत नहीं है अपितु ये इस तरह की दलाली में शुरू से ही लिप्त रहा है.
जय जय भड़ास

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

हरकीरत हक़ीर का हिमायती रात को दो बजे मैसेज करके अपनी करतूत बता रहा है और फिर अपनी सही औकात भी बता रहा है लेकिन अब इसने सही मुखौटा पहन लिया है ये यशवंत सिंह का बाप सिद्ध होगा। ऐसे प्रोफ़ेशनल लोग इस बात में यकीन रखते हैं कि बदनामी ही सही लेकिन प्रचार तो हो गया। भड़ास इन जैसे धूर्तों के खिलाफ़ हमेशा मोर्चा खोले रहेगा
जय जय भड़ास

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