लो क सं घ र्ष !: आप मुझे अच्छे लगने लगे

रविवार, 10 जनवरी 2010

साम्राज्यवादी शक्तियों ने आज देश की राजनीतिक विचारधारा, अर्थव्यवस्था एवं संस्कृति को किस प्रकार अपने काबू में कर रखा है कि जो पार्टी अपने को समाजवादी विचारक डॉक्टर राम मनोहर लोहिया की अनुयायी कहा करती थी वह कार्पोरेट समाजवाद के जाल में फंस कर साम्राज्यवादी प्रवत्ति के गुण दर्शा रही है तो वही बेनी प्रसाद वर्मा जैसे लोग जो अमर सिंह के समाजवादी पार्टी में बढ़ते हस्तक्षेप व अपनी उपेक्षा से छुब्ध होकर पार्टी छोड़ गए थे अब उन्ही अमर सिंह को अपने साथ आने की दावत कांग्रेस में दे रहे हैं और अमर सिंह अब उन्हें अच्छे लगने लगे।

मुलायम सिंह पर समाजवादी विचारधारा का परित्याग कर अमर सिंह के कार्पोरेट समाजवाद के जाल में फंस कर चाल चरित्र बदलने का आरोप उनके पुराने साथी बेनी प्रसाद वर्मा लगा कर पार्टी से अलग हुए थे और कांग्रेस की गोद में बैठ कर उन्होंने मुलायम सिंह की पार्टी समाजवादी को प्रदेश में सत्ता से बाहर कर देने में अहम् भूमिका अदा की थी, आज वही बेनी प्रसाद वर्मा अमर सिंह को कांग्रेस में आने का न्योता दे रहे हैं ।
लोग शायद अनुमान नहीं कर पाए कि बेनी प्रसाद वर्मा ने जब कुरता धोती छोड़ सूट धारण किया तो केवल उनका तन का ढांचा नहीं बदला बल्कि उनके मन के विचारों में भी तब्दीलियाँ आ चुकी थी। जो नेता बाराबंकी में सड़कों पर पैदल चल कर बीड़ी पिया करता था अब वह विदेश निर्मित कारों एवं एयर कंडीशन कमरों में बैठ कर भला समाजवाद की बात कैसे करता ? अमर सिंह से भी समाजवादी पार्टी में उनकी रस्साकशी अपनी इसी बढती महत्वकांछा की प्रवृत्ति के चलते ही रही।
साम्राज्यवादी शक्तियों ने किस प्रकार देश की समाजवादी विचारधारा रखने वाले या आम जनमानस के हितों का विचार रखने वाले राजनितिक दलों को छिन्न-भिन्न करने की योजना बनाई है उसका अनुमान इस बात से भली भांति लगाया जा सकता है कि आंध्र प्रदेश के कांग्रेसी मुख्य मंत्री राज शेखर रेड्डी जिनका प्रदेश को सूचना प्रद्योगिकी में आत्म निर्भरता एवं निपुणता की और ले जाने में बहुमूल्य योगदान था की हेलीकाप्टर दुर्घटना में हुई मौत महज एक हादसा न होकर एक साजिश थी जो रिलायंस इनर्जी एवं ऑयल कंपनी के बोर्ड ऑफ़ ड़ाईरेक्टर के सलाहकार की हैसियत से काम कर रहे एक अमेरिकी ने अंजाम दिलाई थी और जिसका खुलासा रूस के गुप्तचरों ने अभी हाल में किया तो पूरे आन्ध्र प्रदेश में तीव्र प्रदर्शन रिलायंस कंपनी के विरुद्ध हुए।

चूँकि देश में कृषि के व्यवसाय को तहस नहस कर खाद्य पदार्थों में आत्म निर्भरता पर हमला करने की योजना साम्राज्यवादियों ने बना ली थी इसलिए आवश्यक था की समाजवादी विचारधारा का पहले नष्ट किया जाए बेनी प्रसाद वर्मा भी उसी साजिश का शिकार हुए अब वह स्वयं कार्पोरेट समाजवादी बन चुके हैं सो उन्हें अब अमर सिंह अच्छे लगने लगे हैं।

-मो॰ तारिक खान

1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

समावाद,परिवारवाद,मुलायमवाद,वर्मावाद,कांग्रेसवाद,वाद.....विवाद....मौकापरस्ती,कमीनापन,धूर्तता.... जनता...चूतियावाद
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