परम फ़ादरणीय गौरव महाजन जी - २

मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

बात भाषा की निकली तो मैंने भी भड़ासी आदत के अनुसार बिना रुके फटे में टाँग डाल दी और बज़ पर बजाना शुरू कर दिया तो पिताजी गौरव महाजन अवतरित हुए और अपनी महायोग्यता का विराट परिचय देते हुए अपने इस क्षुद्र तुच्छ गलीज़ और नालायक धर्म पुत्र को डपटते हुए बताते हैं कि वे मुझ जन्मजात नंगे को सभा में सभ्यता की पतलून पहनाएंगे। मैंने उनसे ये जानना चाहा है कि यदि अंग्रेजी ने रोटी रोजगार दे दिया तो उसका गुणगान करने लगे वैसे ही क्या यदि धर्म और राष्ट्र की बात आएगी तो किसी अन्य धर्म या राष्ट्र का भी महिमा मंडन करने लगेंगे जैसे कि यदि इस्लाम बेहतर नौकरी दे दे(वैसे ऐसा होता नहीं है)तो मुसलमान बन जाएंगे और सहर्ष इस्लाम स्वीकार लेंगे? इस पर उन्होंने अपनी बंदूक कि अमिताभ बच्चन और भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ.कलाम के कंधे पर रख दिया साथ ही मुझे लताड़ा कि मैं अंग्रेजी नहीं जानता हूँ और निहायत ही असामाजिक किस्म का बंदा हूँ एक कट्टर सोच रखता हूँ तो मैं बीमार मानसिकता का प्राणी हुआ।
जय जय भड़ास

1 टिप्पणियाँ:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

ये छुद्र और नितांत गलीज प्राणी है, महिला के आस पास मडराना जैसा की आपने लिखा तो बौद्धिकता का जामा पहनना,
गुरुवार खूब पेला है इस बनिए को.
जय जय भड़ास

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