मुंबई में जनगणना के दौरान जैनों ने खूब सताया टीचरों को....

मंगलवार, 8 जून 2010

अभी आप सबको पता है कि सरकार ने टीचरों की ड्यूटी जनगणना में लगा रखी है और एक एक टीचर को दो सौ ढाई सौ तक घर दे रखे हैं। एक तरफ़ मुम्बई हाईकोर्ट आदेश देता है कि टीचरों से शिक्षा के अलावा कोई और काम न लिया जाए दूसरी ओर उनका इस तरह से खून पिया जा रहा है। नीतियाँ जो हैं सो तो हैं ही लेकिन घाटकोपर आदि इलाकों में तमाम शिक्षकों ने रुवाँसे हो कर बताया कि जनगणना फ़ॉर्म पर हस्ताक्षर देने में जैन लोगों ने उन्हें रुला डाला है| जैन कह रहे हैं कि उस पर पहले उन्हें धर्म से जैन लिखा जाए तब वे साइन करेंगे। बेचारे टीचर किधर से उस पचासों कॉलम वाले फ़ॉर्म में धर्म का कॉलम लाएं जब अभी उस आधार पर जनगणना हो ही नहीं रही है। ये राक्षस बताना चाहते हैं कि वे कितनी संख्या में हैं ताकि लालची राजनेता इनकी संख्या से प्रभावित हो कर इनकी तरफ़ झुकने लगें और ये सिद्ध करना चाहते हैं कि ये असुर भी एक बड़ा वोट बैंक हैं इसी लिये ये लीला रचा रहे हैं।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

आपने सिर्फ़ जैनों को देखा है सभी ने बेचारे टीचर्स को खूब सताया क्योंकि उस फ़ार्म में सवाल भी तो चूतियापे के हैं। एक एक घर में चार चार परिवार रह रहे हैं बेचारे टीचर एक एक घर में बाहर खड़े खड़े मरे जा रहे हैं कई बार तो लोग पानी तक नहीं पूछते हैं। एक घर में करीबन आधा घंटा लग रहा है। जनगणना करने के बाद हमारी सरकार क्या करेगी बस इस बात का इंतजार है,मुंबई में जितने भी बांग्लादेशी और पाकिस्तानी हैं उन्हें भी भारतीयता मिल जाएगी ये इस बात का सुखद परिणाम होगा
जय जय भड़ास

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