राक्षसों ने मुंबई शहर में दंगे-फसाद की पृष्ठभूमि तैयार करना शुरू कर दिया है

शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

भगवान श्री राम जन्मभूमि के न्यायालय में चल रहे विवाद का कुछ भी निर्णय आएगा ये तो न्यायाधीश और ईश्वर ही जानता है लेकिन राक्षस अपनी कारगुजारियों से बाज नहीं आते। वे चाहते हैं कि देवताओं और ऋषियों के उच्च गुणयुक्त जीन्स नष्ट हो जाएं और उनके गुणसूत्रों को भ्रष्ट करके सारी दुनिया में राक्षसी प्रवृत्ति को ही लागू कर दिया जाए। इसके लिए जरूरी है कि शिक्षा, राजनीति, धर्म, न्याय, चिकित्सा, भोजन, सूचना संप्रेषण(मीडिया) आदि हर क्षेत्र में राक्षस अपने काम को सक्रियता से करें और वो हमारे सामने सब करतूतें कर रहे हैं लेकिन सामान्य जनों की आँखों पर उन्होंने अपनी राक्षसी विद्या का ऐसा पर्दा डाल रखा है कि हमारे सामने सरकारी और कानूनी तौर पर हमारे देश का पशुधन राक्षसों के पेट में जा रहा है मशीनी पशुवध गृह चल रहे हैं और हम इन बातों को सामान्य तौर पर लेते हैं।
राक्षसों ने मुंबई शहर में दंगे-फसाद की पृष्ठभूमि तैयार करना शुरू कर दिया है। अभी तीन चार दिन पहले मुंबई के एक उपनगर "कांजुर मार्ग" में कुछ लोगों ने एक दरगाह पर हमला करा और उसे क्षतिग्रस्त कर दिया, पवित्र पुस्तकों को फाड़ कर अपमानित कर पानी में फेंक दिया, ये जो कुछ भी करा गया है ये उर्दू मीडिया को प्रयोग कर मुस्लिम जनता के सामने लाया गया ताकि आक्रोश का वातावरण बन जाए, मुस्लिमों में असुरक्षा और भय का वातावरण तैयार होने लगे, नेताओं ने बयानबाजी शुरू कर दी। मक्कार राजनेताओं और मीडिया(टाइम्स ग्रुप का उर्दू टाइम्स इस काम के लिये प्रयोग करा जाता है) को इस्तेमाल कर के राक्षस अपने काम की जमीन बना रहे हैं। जिस दिन फैसला आएगा उस दिन दोनों समुदायों को भड़का कर आपस में लड़वा देंगे और नासमझ लोग इनकी राक्षसी कुटिलता को समझे बिना एक दूसरे की गर्दनें काट देंगे जो कि अतीत में होता रहा है। सब रक्तपात होने के बाद ये सभी के शुभचिंतक बन कर शाँति के लिए आगे आ जाएंगे।
जब दुनिया जानती है कि जैन हिंदू नहीं होते हैं वे भगवान श्री राम, भगवान श्री कृष्ण आदि के साथ वेदों को भी नहीं मानते तो फिर विश्व हिंदू परिषद का प्रवक्ता जैन कैसे है और हिंदू धार्मिक संगठनों में ये राक्षस जैन क्यों घुसते हैं??
जब तक आप सब इन राक्षसों को समाज में पहचान कर इनसे नहीं निबटते तब तक ये आपकी संतानों तक को गारत करे रहेंगे। अब भी समय है जाग जाइये वरना कोई नामलेवा न रहेगा ईश्वर का इस दुनिया में.............
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

4 टिप्पणियाँ:

मिहिरभोज ने कहा…

मारवाङी मैं एक कहावत है कि गांव बसा ही नहीं और .....पहले ही आ धमके....खैर आपने भी तैयारी शुरु कर दी....लगे रहो

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

भाई अनोप जी,
आपके प्रश्न हिमालय सदृश्य हैं, देखता हूँ उत्तर देने की हिम्मत कौन करता है,

जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

रजनीश भाई कदाचित अनोप मंडल के लोगों को लोग विशेष दुराग्रही मानते हैं कि ये जैनों को ही हर बुरी घटना के लिये जिम्मेदार ठहराते हैं, तर्क और तथ्य भी देते हैं, इनकी अपनी सोच और चश्मा है जिससे ये दुनिया देखते हैं। लेकिन इस बार इन्होंने जो कहा है कि फ़साद की भूमिका बन रही है ये सही प्रतीत हुआ मुझे निजी तौर पर मुंबई की गलियों में ये गंध महसूस हुई है। इसके पीछे कौन है ये नहीं जानता हूं पर कांजुर मार्ग वाली दुर्घटना तो हुई है और उर्दू टाइम्स का उसमें क्या रोल रहा ये भी देखा है। ईश्वर न करे एक बार फिर मुंबई दंगों की चपेट में आ जाए। जो भी राक्षस हों चाहे वह किसी भी मुखौटे में हों पहचान लिये जाएं ताकि उन्हें समाप्त करा जा सके जिससे खून की ये प्यास उनके साथ मर जाए।
जय जय भड़ास

बेनामी ने कहा…

अबे चूतिया bjp में फिर मुसलमानों का क्या काम है , तेरे जैसे लोग गधे है , गधे रहेगे और गधे की तरह की रेकते रहेगे , रेकते रहेगे

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