मीडिया क्लब ऑफ़ इंडिया एण्टी-मुस्लिम अमेरिकी एजेन्ट है

शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

किसी भी पढ़ने वाले के लिये ये एक बड़ा झटका हो सकता है कि गंवार भड़ासी गली मौहल्ले की चिरकुट बातें छोड़ कर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बातें कब से उगलने लगे लेकिन आपका सामना जितने बड़े मक्कार और धूर्तों से होता जाता है आप उनसे लड़ते लड़ते उनके विरोध के स्तर तक बढ़ ही जाते हैं। अब हमारा सामना हुआ ऐसे लोगों से जो कि चाहते हैं कि हर विकासशील देश में अस्थिरता बनी रहे चाहे वह किसी भी बात को अपने औजार की तरह प्रयोग करें धर्म, राजनीति, सामाजिक व्यवहार.....। इस तरह के विचार को केन्द्र में लेकर काम करने वाले लोग जब इंटरनेट पर एकत्र हो जाते हैं तो मीडिया क्लब ऑफ़ इंडिया जैसे मुखौटाधारी संगठन बना कर खुद को पेश करते हैं जिसमें वे अपने जैसे कुछ धूर्त मीडिया कर्मी, छद्म समाजसेवक, विचारक-चिंतक आदि को साथ लेकर चलते हैं। मीडिया क्लब ऑफ़ इंडिया की केन्द्रीय सोच पूरी तरह से मुसलमानों के विरोध में है यह तो इनको देखने से पता चलता है कि ये धार्मिक आस्था को हथियार बना कर किस तरह से कार्य कर रहे हैं, कृष्ण जन्माष्टमी पर बैनर पर राधा-कृष्ण का चित्र और फिर उसके बाद गणेश चतुर्थी के चलते गणपति का चित्र लेकिन इसी बीच में ईद भी आयी परन्तु संचालकों ने झूठी शुभेच्छाएं तक न दीं। दावा करा जाता है कि अमुक साइट पर इतने हजार या इतने लाख सदस्य हैं तो इन दावों की बात ऐसी है कि मास्टरमाइंड एक और उसके इर्दगिर्द दो चार विश्वासपात्र बाकी सब पिछलग्गू होते हैं जिन्हें अपनी तस्वीर छपी देखने में ही आनंद आता रहता है। इस साइट पर एक फ़र्जी प्रोफ़ाइल है "दीपा बिस्वास" जो कि अमेरिका द्वारा बाकायदा सेट लगाकर प्रोफ़ेशनल कलाकारों द्वारा अभिनीत करके बनाए गये उन वीडियोज तक आपको पहुंचाने का काम करता है जो ये सिद्ध करने के लिये चित्रित करे जाते हैं कि मुसलमान अत्यंत क्रूर होते हैं। इस तरह के वीडियोज़ की हकीकत ये रहती है कि यू-ट्यूब, ट्रुथ टीवी आदि पर हिंसा,बलात्कार,बाल यौन उत्पीड़न आदि अपलोड न करे जाने की शर्त के बावजूद भी इस तरह के वीडियो रहते हैं और संचालन/प्रबंधन इन्हें बराबर बनाए रखता है जैसे बंदियों के सिर काटने आदि के वीडियो फ़ुटेज। कहा जाता है कि जिस मंच की लड़ाई हो उसी पर लड़ी जाए लेकिन जब मंच का संचालन ही आपके विरुद्ध हो और लोकतांत्रिक सोच न रखता हो तो हाल भड़ासियों जैसा होता है कि इन महामक्कारों ने मुझे यानि भड़ास के संचालकों में से एक को पहले मेरे लेखन को देखते हुए हजार बार आमंत्रित करा कि मैं सदस्यता ले लूँ जब मैंने सदस्यता लेकर लिखना शुरू करा और इन धूर्तों की पोलें खोलना शुरू करी तो इन्होंने बिना किसी चर्चा के मेरी सदस्यता मेरे आई.पी.पते के आधार पर ही रद्द कर दी। ये बात अलग है कि इन अमेरिका का मूत्र प्राशन करने वाले लोगों को नहीं पता कि मैं कौन हूँ, डॉ.रूपेश श्रीवास्तव कब किस कम्प्यूटर से निकल कर इनकी बैंड बजा देगा इन्हें नहीं मालुम कि भड़ासियों की वजह से मेरे हजारों हाथ हैं। मैं प्रतिज्ञाबद्ध हूँ कि दीपा बिस्वास और उस जैसों की आड़ में भारत में साम्प्रदायिक वैमनस्य का पोषण करने वाले इन दुष्टों से लड़ता रहूंगा। मुझे उन गधे किस्म के मुस्लिम लोगों से कुछ नहीं कहना जो मीडिया क्लब ऑफ़ इंडिया के सदस्य हैं क्योंकि वे भारतीयता और लोकतंत्र को समझ ही नहीं सकते।
जय जय भड़ास

7 टिप्पणियाँ:

फ़रहीन नाज़ ने कहा…

दद्दा आप जानते हैं कि इस तरह के मक्कारों की साइबर वर्ल्ड में कमी नहीं है जो अखंड भारत को अपनी कमीनी लालची हरकतों के चलते तोड़ने पर आमादा हैं। दीपा बिस्वास आदि जैसे फ़र्जी आई.डी.इसी नीच सोच के चलते बनाए जाते हैं। जब तक हम भड़ासी है इनके मनोरथ पूरे नहीं होंगे। यू-ट्यूब या ट्रुथ टीवी जैसे वीडियोज़ को क्या किसी ने आज तक विज्ञान के आधार पर जाँचा है?? किसमें साहस है कि इनकी विश्वसनीयता पर शक करके पोल खोलें....। मीडिया क्लब में जो बेचारे पिछलग्गू भीड़ बढ़ाने या अपनी तस्वीर देखने के लिये जुड़े हैं उन पर दया आती है।
जय जय भड़ास

हरभूषण ने कहा…

दो चार विकृत लोभी किस्म के लोग एक डोमेन लेकर एक वेबसाइट बना लेते हैं और अपनी करतूतें शुरू कर देते हैं ये लोग किसी दलाल से अधिक नहीं होते। मीडिया में ऐसे लोगों की भरमार है इन्हें पहचान कर खत्म करना हम भड़ासियों का ध्येय होना चाहिये।
जय जय भड़ास

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

वस्तुतः मीडिया के ही दलाल प्रवृति के लोगों की उपज है ये जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं

जय जय भड़ास

मनोज द्विवेदी ने कहा…

BHID ME EK AUR SAMIL ....PAHCHAN JARI HAI. KISI NE SACH HI KAHA HAI
SACHCHAI CHHUP NAHI SAKTI BANAVAT KE VASULO SE AUR KHUSBU AA NAHI SAKTI KAGAJ KE PHULON SE.

सलीम ख़ान ने कहा…

sahi vishleshan

kabhi main bhi juda tha isse aur mere dwara ismen do darjan se zyada blogrs iske member bane...

abhi main samajh chuka hooon

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

वाकई में ओसामा बहुत शान्तिप्रिय है. पाकिस्तान में भी शांति आ गयी है... अच्छा है जिन लोगों को भारत में तकलीफ है... इन देशों में चले जाना चाहिये...

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

भाई भारतीय नागरिक ( नाम के साथ आते तो उचित संबोधन होता),
जिन्हें धार्मिक उन्माद के साथ हिन्दुस्तान प्यारा हो वो न समंदर में समां जाय, हमारी सभ्यता संस्कृति और महान सम्राट अशोक के देश को बदनाम तो न करो.

जय जय भड़ास

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