पहले पिछली पोस्ट के सवालो का जवाब दो अनूप मंडल , फिर आगे बोलना

रविवार, 26 दिसंबर 2010

अनूप मंडल तुम जो भी लिख रहे हो , उस से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता , तुम्हारे जैसे पागल लोग इस दुनिया में बहुत है , ,लकिन जब भी तुम से कोई सवाल पूछा जाता है ,तो तुम मुह छिपा कर कुछ दिन तक कही  गायब हो जाते हो , फिर कुछ दिन बाद अपना सडा गला राग  गधे की तरह अलापने लगते   हो ,



का जवाब तुमने 17dec2010  से अब तक नहीं दिया है , और तुम इस बात की चिंता न करो की मै कहा हू , मै जहा भी हू वहा से ही तुम जैसो के लिए भारी  ही रहूगा
अगर तुम्हे मेरे jokes , या कोई और लेख पसंद नहीं है तो क्यों पढ़ रहे हो , भड़ास पर सभी सवतंत्र है की वो अपने मन की भडास यहाँ निकल कर लिख दे , यदि इस ब्लॉग का ये rule बदल गया है , तो किर्पया सूचित कर दे ,21st century में जब कोई भी इस दुनिया में internet ,newspaper ,tv ,radio ,से जानकारी प्राप्त कर सकता है ,वहा तुम अंधविश्वास से भरी बाते कर के क्या जाताना चाहते हो ,अरे जब गली में कोई एक मदारी अपना खेल करता है तो सब के मन में एक बार तो उसे देखने की इछा कर ही आती है ,और तुम भी एक मदारी की तरह अपना मानव दानव वाला खेल खेल रहे हो , खेलते रहो
मै  २ दिनसे ताजमहल देखने आगरा गया था , इस लिए आप को मेरी कमी लग रही होगी ,हा हा हा , सपने में  भी , तुम्हे मै ही नजर आ रहा हू , निक्लंक  के गधो  ,और तुम्हारी पहचान सिर्फ ये ब्लोगेर की तस्वीर है जहा से तुम पैदा होते हो और जहा पर ही तुम मर जाते हो , तुम आदमी हो , गधे हो , या ये बूढ़े हो ,क्या हो तुम , तुम्हारे बाप ने तुम्हे कोई नाम नहीं दिया , या फिर किसी ऐसेजगह की पैदाइश हो की इस तस्वीर के पीछे अपने को छिपा रहे हो , अगर तुम में दम है तो सामने आ कर बात करो , यो तस्वीरो के पीछे से मत भोंका  करो ,
चलो मन लिया  तुम्हे डॉ साहब जानते है ,
तो क्या तुम उन के पीछे छिपकर अपनी बात बोल रहे हो ? ,
तुम कोन हो? ,
कहा के हो ?,
क्या तुम्हारा इतिहास है? ,
क्या तुम करते हो?
, कुछ है या  सिर्फ भोकना जानते हो , ब्लॉग जगत में तुम्हारे जैसे चूतिया किसी भी ईमेल से इस तरह का ब्लोगेर  account बना सकते है ,ये सब जानते है ,और तुम्हे लोग कितना देखते है ,वो तो तुम्हारी profile viewको देख कर पता चल रहा है -सिर्फ 286  ,july 2009 se dec 2010 तक  , मतलब 18  महीनो में सिर्फ 286 लोगो ने तुम्हारे बारे में दिलचस्पी दिखाई  औसतन 15 लोगो ने महीने में तुम्हारे बारे में जानना चाहा , जा कर कही डूब कर मर जाओ , तुम जैसे पोंगा पंथी की इस संसार को कोई जरुरत नहीं है

2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अमित भाई ये हुई न बात भड़ासियों वाली ;)
सारी शराफ़त किनारे रख कर जब हम दिल की बात बाहर निकालते हैं तब वह कुछ ऐसी ही शब्दावली में प्रस्तुत होती है। असल में अनूप मंडल कोई एक आदमी नहीं है ये एक संगठन है जिसमें सब तरह के लोग हैं हज्जाम से लेकर भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के साइंटिस्ट तक जुड़े हैं ये अनूप मंडल नाम का ब्लागर एकाउंट सामूहिक खाता है जिसे कई लोग संचालित करते हैं। इनके अनुमानतः तीन हजार से अधिक लोगों से मैं मिल चुका हूं अब तक सारे के सारे एक ही सुर में बोलते हैं लेकिन एक बात नयी पता चली है वो ये कि इनमें भी उसी तरह मतभेद है जैसे कि श्वेताम्बर-दिगम्बर,हीनयान-महायान,शिया-सुन्नी,कैथोलिक-प्रोटेस्टेन्ट,शैव-वैष्णव आदि आदि इत्यादि। आप इसी तरह भड़ास निकालते रहिये ताकि रक्तचाप न बढ़े।
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

मतलब डॉ साहब मै लगभग 3000 लोगो के सामने एकमात्र निशाना हू ,जिस पर वो धर्म आधारित ,बिना तथ्यों के , निशाना लगा रहे है

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