डा.रूपेश श्रीवास्तव और डा.दिव्या श्रीवास्तव बनाम भड़ास का स्वभाव

रविवार, 27 फ़रवरी 2011



ल्यो हल्यो ई तौ बहुत नाइंसाफ़ी है दिव्या जी भड़ास पर पधारती नहीं हैं कि संजय कटारनवरे की बकैती देख सकें और संचालक हैं कि खांमखा ही उन्हें जोड़े हुए हैं। दिव्या जी सोचती हैं कि उन्होंने संजय कटारनवरे की बात नहीं देखी तो उसकी बात गुम हो जाएगी तो दिव्या शुतुरमुर्गी किस्म की ब्लागर हैं खुद को लौह महिला लिख लेने से कोई वैचारिक लौहत्व को प्राप्त नहीं हो जाता बालिके। जरा इस बालक के विचार तो देखो कितने उच्च हैं लेकिन दिव्या जी तो इसे उच्च की बजाए लुच्च-टुच्च जता रही हैं। डा.रूपेश जी की गलती हो गयी कि आपको बता आए कि आपके मोरचा(ज़ंग) को कोई घिस-घिस कर निकाल रहा है जो कि अब आपसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है तो माफ़ी की ठंडक चाह रही हैं। कोई बात नहीं उसने तो वो भी पूरा कर दिया।
कमाल का धात्विक भाईचारा है डा.दिव्या और डा.रूपेश का एक लोहे की बनी है दूसरे का दिल सोने का है बाकी परिवार तो यकीनन चांदी,तांवे,एल्युमिनियम आदि धातुओं से बना होगा। दिव्या जी तो पूरी की पूरी लोहे की बनी हैं वे खुद स्वीकारती हैं भाई का सिर्फ़ दिल सोने का है बाकी अंग प्रत्यंग किन धातुओं के बने हैं इसका जिक्र दिव्या जी ने नहीं करा है। वैसे अपने भीतर भी तमाम धातुएं हैं जो कि पैथोलाजी वाले सही सही मात्रा बता सकते हैं हमें तो पता नहीं। क्या संचालक किसी भी ब्लाग की लिंक बस बहन-बहनोई के रिश्ते से भड़ास पर जोड़ देते हैं या उनकी अपनी पसंद-नापसंद या कोई और कारण रहता है?
संचालक चाहें तो इस प्रतिक्रिया को सहज ही नकार सकते हैं लेकिन भड़ास के भीषण लोकतांत्रिक स्वभाव के चलते विश्वास उपजा है तो लिख रहा हूं। दिव्या जी तो अपने ब्लाग पर इसे प्रकाशित करने से रहीं लेकिन भड़ास पर तो स्वयं डा.रूपेश श्रीवास्तव के ऊपर अंतर्राष्ट्रीय अपराधी दाउद इब्राहिम से पैसा आने की बात तक प्रकाशित हो चुकी है जिस पर चर्चा हुई लेकिन उस आरोप को डिलीट करके भगोड़ापन नहीं दिखाया गया था।
चलिये मैं भी एक बार नारा बुलंद कर देता हूं(दिव्या पहचानो तो मान जाउंगा;)
जय जय भड़ास

6 टिप्पणियाँ:

हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा ने कहा…

क्या बात है सिर्फ़ दिव्या दी को ही अपने पहचाने जाने की पहेली बुझा रहे हैं हमें भी तो बताइये कि आप कौन हैं फिर मैं आपको बताउंगी कि मेरे भाई में कौन सी धातु कितनी है और मोम कितनी है
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

आपने अपने आपको पहचाने जाने की बात सिर्फ़ दिव्या बहन के लिये छोड़ी है क्या कुछ खास बात है? हम आपको पहचान गए आप सियार हैं ये बात अलग है कि मुझे आपका नाम नहीं पता(सियारों के मां-बाप अपने बच्चों के नाम रखते हैं क्या?)
दिव्या बहन आपको बताएंगी कि वे शुतुरमुर्गी है या कुछ अलग....
जय जय भड़ास

ZEAL ने कहा…

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Comment number one-

रुपेश भैया आपको पहचान नहीं पाए ठीक से । आप सियार नहीं सियारिन लगती हैं ।

Smiles!!!

बुरा न मानिए , होली है !

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ZEAL ने कहा…

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Comment no-two--

Okay jokes apart , let me serious for a while.

आपकी कोई पहचान हो तब तो पहचानूँ । अब दिव्या की ही बात लीजिये । सबका सरदर्द बनी हुई है , लेकिन उसकी पहचान है रे बाबा ।

* जंग लगा लोहा
* लोहारिन
* लौहांगना
* माटी का माधव
* शुतुरमुर्गी दिव्या

देखो मेरी प्रिय सियारिन ,

ईर्ष्या तुम्हें जला मारेगी । बचो इस घातक मानसिक रोग से । इसी विषय पर एक लेख लिखा है , समय निकालकर पढ़ लेना ।

सादर ,
शुतुरमुर्गी दिव्या।

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ZEAL ने कहा…

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comment no-three

आपकी कोई पहचान हो तब तो पहचानूँ । अब दिव्या की ही बात लीजिये । सबका सरदर्द बनी हुई है , लेकिन उसकी पहचान है रे बाबा ।

* जंग लगा लोहा [By Sanjay]
* लोहारिन [ By Amrendra]
* लौहांगना [By Mithilesh]
* माटी का माधव [By taarkeshwar Giri]
* शुतुरमुर्गी दिव्या [ By सियारिन ]

देखो मेरी प्रिय सियारिन ,

ईर्ष्या तुम्हें जला मारेगी । बचो इस घातक मानसिक रोग से । इसी विषय पर एक लेख लिखा है , समय निकालकर पढ़ लेना ।

सादर ,
शुतुरमुर्गी दिव्या।

[winks at the cute Mrs Jackal]

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ZEAL ने कहा…

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comment-4

I hope you will publish all my four comments .

By the way , thanks for calling me ' Shuturmurg'. I am genuinely fond of cute animals.

and Yes, what will be my new name in your next post ?

Smiles !!

bye-bye

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