संजय गधे का गधापन -लिख डाले ५ भाग , पर कोई मतलब की बात नहीं

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

मैंने लिखे है ५ भाग - हो गया न मै सयाना (संजय कटारनरवे )

2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

हे बघा... संजय भाऊ नक्की हे तुमची किंवा तुमचे नातेवाइक ची फोटो नसेल पण सगड़े भड़ास्यांचा हे परमप्रिय प्राणी आहे।
तुमची एकानंतर एक पोस्ट बघुन मीच घाबरलो बाबा... खरोखर तुम्ही तर गाढवां सारखे दुलत्ती मारुन सर्यांना झोड़ाय लागले। आणखी एक गोष्ट बघा कि तुमचा इतका प्रभाव प्रवीण शाह साहेव वर बसला कि ते पण मुंबइय्या भाषा वापरुन लिहाय लागले। चांगली गोष्ट आहे कि आता तुम्हीं डा.दिव्या ची पाठलाग बंद करुन यांचे मागे लागले नाही तर ती अक्षरशः वैतागली होती
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

डॉ साहब किर्पया आप मुझ नादान को ये टिपण्णी हिन्दी मे या इंग्लिश मे बता दीजिए

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