प्रवीण शाह जी ये बात थी कि अमित जैन को ई-मेल से पोस्ट करने को कहा जा रहा था

मंगलवार, 10 मई 2011

प्रवीण शाह जी अमित जैन जी ने जिस तरह से संचालकों पर आरोप ठोंक दिया कि उनकी पोस्ट मय कमेंट गायब हो गयी तो अब आगे तभी बात होगी जब अमित जैन उस स्क्रीन शाट को दोबारा प्रस्तुत करेंगे। वैसे भी वे सबके भाड़ में जाने की कामना कर ही चुके हैं तो भड़ास और भड़ासियों के भाड़ में जाने की कामना तो न जाने कितने लोग कर रहे हैं एक और सही। हम तो भाड़ में भी गुलज़ार कर लेंगे भाई लेकिन अमित जैन जी का रक्तचाप जरूर बढ़ रहा है जिसके चलते वे ऐसी हरकतें कर रहे हैं। आज तक भड़ास के इतिहास में किसी की सदस्यता संचालकों ने समाप्त नहीं करी जितने लोग पलायन करें हैं वे खुद ही गए हैं। अमित अपनी पत्नी के साथ की वह तस्वीर प्रकाशित करें जिसके चलते आपने भी पक्षपात का झंडा उठाया था साथ ही अनूप मंडल के कमेंट का वह स्क्रीन शाट और वह पोस्ट बताएं जिस पर वह कमेंट करा गया था। आपकी प्रतिक्रिया की अभी भी प्रतीक्षा रहेगी। भड़ास तो अमर हो चुका है भाई आप लोग अब तक समझ ही नहीं सके कि मेरे या आठ-दस चूतियों के भाड़ में चले जाने से ये मंच खत्म हो ही नहीं सकता।
जय जय भड़ास

4 टिप्पणियाँ:

ज़ैनब शेख ने कहा…

भाई गालियां और पत्थर तो आपके ही हिस्से में आएंगे ये कोई नयी बात नहीं है

प्रवीण शाह ने कहा…

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आपके इस आलेख में तीन बातें उठाई गयी हैं...
मेरा रूख इस तरह है...

१- अमित जैन यदि यह पढ़ रहे हों तो अपनी वह पोस्ट जो गायब हो गई है रि-पोस्ट कर दें...पोस्ट हुई थी प्रिय संजय का यह कमेंट http://bharhaas.blogspot.com/2011/05/blog-post_10.html#comment-7614403909683455602 इसकी तसदीक कर रहा है।

२- अनूप मंडल द्वारा अपनी पोस्ट http://bharhaas.blogspot.com/2011/01/blog-post_3420.html में यह कहना "अमित जैन ने तो सांस लेना ही बंद कर दिया है अब शायद छह-सात महीने कोमा में रहने के बाद फिर कोई चुटकुला, इस्लाम में कमी या हिंदू पुराणों में विसंगति ले कर आएंगे ये सोच कर कि हम अपना मिशन भूल गए। हमें तुम्हारी गालियों का इंतजार है अमित जैन....... तुम तो महावीर सेमलानी और संजय बेंगाणी जैसे ही कायरता दिखा रहे हो। क्या हमने अकारण ही तुम्हारी बहादुरी की तारीफ़ कर दी थी या पत्नी के साथ गलबहियों में व्यस्त हो जैसा कि तस्वीर में दिखते हो।" निश्चित तौर पर आपत्तिजनक है यदि एक से मानकों पर सभी को तौला जाये तो... पर यहाँ मुझे लग रहा है कि आप 'पपीता प्रकरण' को सत्य मानने/बताने वालों के प्रति थोड़ा नर्म हैं...
आप व अन्यों के द्वारा भी अमित से अपनी पत्नी के साथ खिंचाई वह तस्वीर दोबारा प्रकाशित करने को कहना भी आपत्तिजनक की ही श्रेणी में आता है... कम से कम मेरी यही सोच है/रहेगी...

३- आप के साथ इस मामले में मैं भी सहमत हूँ कि भड़ास का यह मंच अमर रहेगा... आप और मैं आ-जा सकते हैं लेकिन भड़ास जो दिलों में रोज पैदा होती है वह तो निकलेगी ही/ निकलनी भी चाहिये... खास तौर से किसिम-किसिम के चूतियापों पर :)


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डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

प्रवीण जी मैंने तो खुद वह पोस्ट देखी थी तभी तो उसके प्रत्युत्तर में पोस्ट लिखी थी कि वह योजनाबद्ध तरीके से खुद ही हटाई गयी है। ये तो आप खुद भी कर सकते हैं।
अमित की पत्नी के साथ तस्वीर तब तक आपत्तिजनक नहीं लगती थी जब तक मैंने संजय कटारनवरे की मां पर बेहूदा व्यंग करने पर आपत्ति नहीं करी थी। मैं भाड़ में जाने को तैयार हूं अमित तब तक इस तरह की हरकतें करते रहेंगे जब तक कि वे ई-मेल से पोस्ट नहीं भेजते इस विषय में आप चुप क्यों रहे?
मेरी मां की मृत्यु के विषय में मैं कभी भी नर्म नहीं रह सकता आप ऐसा वहम मत पालिये। आप अपने साइंटिस्ट भेजिये मैं खर्च वहन करने को तैयार हूं प्रकरण की जांच के लिये जैसा कि मैं कई बार कह चुका हूं लेकिन बस अंधविश्वास है ऐसा रटने से कोई बात सिद्ध नहीं हो जाती। घटना है, साक्षी हैं, प्रमाण हैं अब आकर झुठलाने के लिये जानकार भेजिये मुझसे जो करते बन रहा है मैं कर रहा हूं आपसे उम्मीद है।
भड़ास अमर रहेगा
जय जय भड़ास

अनोप मंडल ने कहा…

प्रवीण शाह और अमित जैन क्या दुनिया का कोई भी राक्षस इस बात को तूल नहीं देना चाहता कि जांच हो और इनका पैशाचिक षडयंत्र सामने आए कि असल में काले जादू की हकीकत क्या है। ये इस विषय पर चुप्पी साध जाएंगे।
जय जय भड़ास
जय नकलंक देव

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