गोलमाल है भई कुछ गोलमाल है !

मंगलवार, 10 मई 2011

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डॉ० रूपेश श्रीवास्तव को मेरी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है... जबकि आज दिन भर क्या हुआ मैंने नहीं देखा... अब पोस्टें पढ़ने से जो समझ पा रहा हूँ वह यह है कि अमित जैन की लिखी एक पोस्ट मय कमेंट गायब हो गई है... अन्यों की तो छोड़िये खुद डॉ० रूपेश श्रीवास्तव तक कह रहे हैं "अब मैं क्या इसे ये समझ लूं कि तुम ये बाकायदा योजनाबद्ध तरीके से कर रहे हो कि संचालकों पर आरोप लगा सको तो ये प्रयास बचकाना है अमित भाई भड़ास पर तो ऐसा न जाने कितनी बार करने की कोशिश करी जा चुकी है कि संचालकों को दोषी ठहराया जा सके और भड़ास की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर आरोप थोपा जा सके। कुछ कहीं नहीं गायब हुआ है इसी लिये ई-मेल का प्रावधान रखा गया है जिससे तुम बचने की कवायद कर रहे हो अभी आगे की पोस्ट में संचालकों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए भड़ास से सदस्यता समाप्त करने की बात करोगे। ये तो पहले भी कई लोग कर चुके हैं। लेकिन तुमसे ये उम्मीद नहीं थी लेकिन होता है भाई....."  मैं तो यहाँ यही कहूँगा कि हम नतीजों पर पहुंचने की जल्दी न करें... पहले शायद शालू जैन व सुरेश वर्मा नाम से कमेंट कर भी इस तरह की हरकत की गई है... संचालक अपने पासवर्ड की सुरक्षा मजबूत रखें और यह देखें कि उनको हैक तो नहीं कर लिया गया है... वैसे यह बताईये कि सारे के सारे अमित जैन के ही ऊपर क्यों पिल पड़े हैं जबकि वह तो खुद एग्रीव्ड पार्टी हैं यहाँ... कैसे आप लोगों को लगता है कि यह उसी की हरकत है... इस विश्वास का आधार क्या है... यह याद रखें कि कभी कभी सत्य बहुत ही अप्रत्याशित होता है ।

अपनी मित्र जमात अनूप मंडल लिखती है " प्रवीण शाह जैसे मक्कारों में इतना साहस नहीं है कि वे सामने आ सकें। आपने मुलाकात में सचिन भाई को बताया है कि इन्होंने जिस मेल आई.डी.से भड़ास ज्वाइन करा है उसे गोपनीय रखने की बात करी है और आपने रखा भी है। "... अनूप मंडल से कोई शिकवा नहीं परंतु संचालक महोदय को इस बात की चर्चा किसी से नहीं करनी चाहिये थी... यह मेरा सोचना है, हो सकता है मैं इस बारे में गलत हूँ तो कृपया सुधार दीजियेगा ।



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3 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

प्रवीण शाह जी जिस कदर मासूमियत से आप कह रहे हैं कि संचालकों को पासवर्ड सुरक्षित रखने चाहिये या नतीजों पर पहुंचने की जल्दबाजी न करें तो आप इतने भोले तो नहीं हैं कि सेना का एक भूतपूर्व मेजर ये कहे कि शालू जैन और सुरेश वर्मा के नाम से पहले कमेंट करे जा चुके हैं। प्रवीण जी ये तो खेल है जो अनूप मंडल के लोग जमाना पहले तब ही खोल कर रख चुके हैं जब मेरा नाम लेते हुए एक मेरे मित्र नहीं पर शत्रु भी नहीं भाई सुरेश चिपलूणकर के नाम से भद्दे कमेंट राजसिंह के ब्लाग पर करा था। ब्लागर की सुरक्षा को हैक करना इतना आसान होता तो अब तक भड़ास को पचासों बार विरोधी डिलीट कर चुके होते। मैं अमित जैन को तो जो कहना है कह चुका हूं अब आपसे कहता हूं क्योंकि आप अमित जी को पाक साफ़ मान रहे हैं तो उन्हें कहिए कि वे अपनी वो पोस्ट दोबारा लिखें और वह स्क्रीन शाट दोबारा प्रस्तुत करें तब ही आगे बात संभव है वरना यह भड़ास के संचालन के ऊपर सीधा पक्षपात का आरोप है कि हम दोनो में से कोई ऐसा कर रहा है। भाई रजनीश झा तो आजकल नौकरी में व्यस्त हैं तो सारा दारोमदार मेरे ही ऊपर है। मैं इस आरोप से मुक्त होना चाहता हूं।
आपके ई-मे को अनूप मंडल के सदस्यों ने जानना चाहा था कि अब तो आप भड़ास के सदस्य हैं तो आपसे सीधा राबता कायम करा जा सके तो मैंने उन्हें बताया कि आप नहीं चाहते कि आपका आई.डी.जाहिर करा जाए साथ ही आपने अपने उस आई.डी.से भड़ास ज्वाइन भी नहीं करा जिस पर मैंने सदस्यता लिंक भेजी थी। इसमें मैंने आपकी गोपनीयता भंग नहीं करी है ये तो साफ़ है या इसमें भी आपको कुछ गोलमाल लग रहा है।
वो ट्रिक जो शालू जैन और सुरेश वर्मा के नाम से करी जाती है वह मैं आपको करके दिखा देता हूं ताकि आप मासूमियत के दायरे से बाहर आ जाएं;)
जय जय भड़ास

कुमारी शालू जैन ने कहा…

प्रवीण जी देखिये ये कमेंट मैं डा.रूपेश श्रीवास्तव शालू जैन के नाम से कर रहा हूं अब तो आप समझ गये होंगे कि क्या चक्कर है अब चाहें तो हमारे ऊपर आरोप लगा सकत हैं कि ये सब हम ही कर रहे हैं।
जय जय भड़ास

ज़ैनब शेख ने कहा…

आगे आगे देखिये होता है क्या?भड़ास सिर्फ़ आनलाइन लिखाई नहीं बल्कि आफ़लाइन एक जीवन शैली है। भाई जो चल रहा वो कुछ नया नहीं है।
जय जय भड़ास

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