अमित जैन के वकील ने फिर हाँ में हाँ का सुर मिलाया,हद हो गयी बेशर्मी की

मंगलवार, 5 जुलाई 2011

अमित जैन जी और प्रवीण शाह जी आप दोनो के अलावा जितने भी भड़ासी हैं यहाँ तक कि दोनो संचालक सारे के सारे आप लोगों को आप मूर्ख कह कर दुनिया को बेवकूफ़ बना नहीं सकते क्योंकि स्क्रीनशॉट्स की आपकी करतूत का भंडाफ़ोड़ तो मनीषा दीदी ने कर दिया जिस पर आप अब तक तिलमिला रहे हैं कभी ब्लॉगर के मेंटेनेन्स को दोषी ठहरा रहे हैं कभी संचालक पर दो पोस्ट गायब कर देने का आरोप लगा रहे हैं। मेरे धर्मपिता श्री डॉ.रूपेश जी ने आपसे जो सवाल करे थे उनके अधूरे जवाब देकर ही भाग गए थे,झूठ लिखा था आपने कि उन्होंने स्वीकारा है कि आपकी दो पोस्ट गायब हुई हैं जिसके लिये आपने अपनी बात को प्रूव करने के लिये कमेंट की लिंक दी थी लेकिन तुरंत किसी ने वह कमेंट प्रकाशित करके बता दिया कि आप मक्कारी कर रहे हैं उन्होंने ऐसा कुछ कहा ही नहीं था....
ऐसी न जाने कितनी बातें आप चुप्पी साध कर सोचते हैं कि हम भूल जाएंगे तो आपकी गलतफहमी है।
जब अमित जैन सबको फट्टू लिख रहा है तो आप उसकी हाँ में हाँ मिलाने आ गए लेकिन खुद आज तक मुंबई आ कर परीक्षण करने का साहस न जुटा पाए न ही आपका कोई मुंबई का ब्लॉगर आया उनके लिये शायद फट्टू शब्द सही नहीं है आपका ही दिया फनीका सही है। आपने अमित जैन को ब्लॉगर के बारे में जो बताया है वो कम है अमित जैन कह रहा है कि 91 सदस्यों में से कोई अचानक अपना प्रोफ़ाइल चुपचाप बदल कर कुछ गड़बड़ करके दोबारा ओरिजिनल प्रोफ़ाइल पर आ जाए तो भी तुम उसकी ही तरफ खड़े हो तो तुम्हारी तार्किक बुद्धि कमाल की है। डॉ.रूपेश जी के बाकी बचे सवालों के जवाब हैं नहीं या देना नहीं है?मुझे पता है कि अब मुझे कमेंट्स में गालियाँ आने लगेंगी लेकिन अपने असल प्रोफ़ाइल के साथ आएं तब तो जवाब देने में भी मजा आएगा वरना बेनामियों को क्या जवाब देना:)
जय जय भड़ास

6 टिप्पणियाँ:

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

अब तुम लोग क्या हो जो एक दुसरे के सुर मे सुर मिला रहे हो ,भांड वकीलों का जत्था ,जो आपस मे ही एक दुसरे को बधाई देते रहते हो , तुम सिर्फ हिटलर की उस बात को आजमा रहे हो की एक झूट को १०० बार बोलो तो वो सच हो जायेगी

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

लगे रहो कभी तो सफल होगे

अनोप मंडल ने कहा…

धूर्त राक्षस, तुम भी वही बात आजमा रहे हो जो कि तुम्हारे पूर्वज सदियों से कर रहे हैं कि एक ही बात को दोहराते दोहराते उसमें धीरे-धीरे फेरबदल कर लो। सत्यमेव जयते
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

अबे चूतिये अनूप की अनचाही ३००० औलादों ,अब जो फेरबदल तुम बता रहे हो उस को जरा अगली पोस्ट मे बता की यहाँ ये लिखा है

अनोप मंडल ने कहा…

Gali do,khud ko jaayaz batane ke liye sabko najaayaz our anchaha bata kar paramaatma ka apmaan karo yai tumhara raakshas pan hai.
jay nakalank dev
jay jay bhadas

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

प्रवीण शाह साहब ने शायद भड़ास से गुजर कर जीवन शैली बदल ली है वरना मेरी सारी बातों का तार्किकतापूर्ण उत्तर अवश्य देते सिर्फ़ भड़ास की सदस्यता लेकर क्या हासिल हुआ?
जय जय भड़ास

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