अमित जैन के नाम से वो अश्लील पोस्ट कैसे आई इस बात का भांडा फोड

सोमवार, 4 जुलाई 2011


आयशा जो तुमने ब्लॉग की setting बारे मे बता रहे हो वो तो सभी जानते है ,और इस बात को तो डॉ साहब ने खुद बताया था , इसमें अलग बात या भांडा फोड वाली कोन सी बात है ,हा मेरे नाम से या किसी और के नाम से कोई भी पोस्ट आ सकती है ये भी उतना ही सच है , आज मै इस तकनीक का खुलासा  कर देता हू , भडास ब्लॉग पर 91 सदस्य है जिन मे से मुश्किल से १२ से १५ सदस्य ही active है और जिन की पोस्ट या टिपण्णी भडास पर नजर आती है , कुछ के अपने ब्लॉग है और कुछ सिर्फ भडास के सदस्य है और उनके अपने कोई ब्लॉग नहीं है ,यदि इन सदस्यों मे से कोई अचानक अपना प्रोफाइल बदल कर यहाँ किसी के भी नाम से पोस्ट डाल दे ,तो वो तो पकड़ा ही नहीं जा सकता ,क्यों की उस की कोई पहली पोस्ट है ही नहीं और यदि है भी तो वो इतनी पुराणी होगी की कोइ वहा  उस की प्रोफाइल के नाम को ढूढने नहीं जाये गा ,और आगे वो सावधानी बरतते हुए १ २ महीने कोई पोस्ट नहीं करेगा .मै इस समय भडास की 2598 वी पोस्ट लिख रहा हू ,कोन इतनी पोस्ट मे किसी एक बंदे के नाम को चेक कर सकता है ,और रही बात बहन मेरे कार्टून बनने या बनाने की तो वो तो आप ही नहीं यहाँ सभी भडासी भाई बहन अच्छी तरह जनता है की किस का कार्टून किस बात को ध्यान मे रख कर बनाया गया है , मैंने खुले रूप से अपना मोबाइल नंबर भी दिया और विनम्र निवेदन भी किया की डॉ साहब की माता जी का स्वर्गवास प्राकर्तिक है या अनूप मंडल के कथन अनुसार तंत्र मन्त्र द्वारा की गई हत्या ,इस बात पर सभी या कुछ भाई बहन एक समय पर yahoo mesenger ,skype ya kis  इसी परकार की मुफ्त सेवा का पर्योग करते हुए आपस मे विचार विमश कर लेते है , परन्तु इस बात पर पुरे भडास परिवार मे चुपी छा जाती है , क्या ये कोई गलत बात है , अब मुझे बताये की कोन तार्किक बात कर रहा है और कोन नहीं , और बहन मैंने न वो लेख लिखा है और न कभी गुस्से मे लिखने वाला हू , अब आप मुझे जो चाहे कह सकती है ,
वैसे मै आप को एक बात के लिए धन्यवाद देता हू की कम से कम आप की कोई पोस्ट तो आई , चाहे वो मुझे बुरा कहने के लिए ही आई , मै तो चाहुगा की यहाँ सभी भडासी भाई बहन अपनी अपनी बाते लिखे या मेरे बताए तरीके से आपस मे बात कर के अपने विरोध भास को प्यार से सुलझाए
मेरे कार्टून से कहा कोन परेशान होता है वो तो परेशान होने वाला ही जनता है , जो बात मै पुरे पेज मे नहीं कह सकता वो मै अपने कार्टून के द्वारा कह देता हू , अगर आप को पसंद आये तो बढिया और न आये तो मै मुनेंदर सोनी के कथना अनुसार भेडिया
और शम्स बेटा मै ये सोच रहा था की तू , मुनेंदर सोनी ,संजय और अनूप मंडल के ३००० चूतिया कुछ तो अक्ल रखते होगे ,पर तुम सब वो ही फट्टू हो जो सिर्फ  आपस मे मिल कर एक दूसरे को अकलमंद कह कर खुश हो लेते हो
अगली बार मै ये भी बता दुगा की उस बंदे की पहचान किस तरीके से हो जायेगी जिस ने वो पोस्ट लिखी है

6 टिप्पणियाँ:

प्रवीण शाह ने कहा…

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@ शम्स बेटा मै ये सोच रहा था की तू , मुनेंदर सोनी ,संजय और अनूप मंडल के ३००० चूतिया कुछ तो अक्ल रखते होगे ,पर तुम सब वो ही फट्टू हो जो सिर्फ आपस मे मिल कर एक दूसरे को अकलमंद कह कर खुश हो लेते हो

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अमित जी, आप सही कह रहे हैं... ब्लॉगर अकाउंट में एक पेज होता है Edit Posts का, उसमें विचाराधीन पोस्ट को डिलीट या एडिट करने का अधिकार आपको नहीं दिखता होगा... पर यदि आप अपने ब्लॉगर एकाउंट के Edit Posts पेज का स्क्रीनशॉट भी यहाँ लगा दो तो भी यह लोग यही कहेंगे कि यह तुमने कारीगरी से तैयार किया है... मैं यह देख रहा हूँ कि आपसे या मुझसे बहस करने वाले भड़ासी केवल और केवल पपीता प्रकरण व तंत्र-मंत्र को सही मानना/सुनना चाहते हैं... यदि कोई भी भिन्न मत रखे तो उसके लिये इनकी शब्दावली में अपशब्दों के सिवा कुछ नहीं है... इतना समय हो गया, किसी वीडियो शेयरिंग साईट में वह वीडियो लोड करना तो दूर स्टिल चित्र भी नहीं दिखाये किसी ने कि जब माल निकला तो अंदर से पपीता कैसा दिखता था... पपीते के अंदरूनी Tissue Architecture को देखते ही जाहिर हो जायेगा कि माल बाहर से ठूंसा गया है...


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डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अमित जी किसी भी भड़ास के सदस्य लेखक के सक्रिय या निष्क्रिय होने से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। आपका स्पष्टीकरण इतना बचकाना नहीं बल्कि बेवकूफ़ाना है कि मैं इस प्रकरण में खुद को रोक नहीं सका। 91 सदस्यों में से कोई एक संचालकों को धोखा दे ले ये भी संभव नहीं है मेरे भाई अब मान भी जाओ कि गलती हो गयी है छोड़ो अड़ियलपन।
अमिताभ बच्चन अभिनीत एक पुरानी फिल्म "कालिया" के एक गाने की चंद लाइने आपके लिये....
जहाँ तेरी ये नज़र है मेरी जाँ मुझे खबर है
बच न सका कोई आए कितने
लम्बे हैं मेरे हाथ इतने
देख इधर यार ध्यान किधर है
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

क्या ये तकनीक संभव है या नहीं , पहले इस बात को बताये
यदि आप इसे बचकाना मन रहे है तो मै तो क्या कोई भी सोने का बहाना कर रहे आदमी को नहीं जग्गा सकता

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अमित जी आपके द्वारा कही हुई बात संभव नहीं है ब्लागर प्रोफ़ाइल में आप अपने प्रदर्शित होने वाले नाम को बदल कर चाहें तो डा.रूपेश श्रीवास्तव या प्रवीण शाह ही क्यों न कर दें लेकिन रजिस्ट्रेशन क्रमांक नहीं बदल सकते यदि नया प्रोफ़ाइल बनाएंगे तो उसे भड़ास की सदस्यता नए सिरे से लेनी होगी। आपका प्रयास बचकाना ही है जो कि गलती नहीं मान रहे हैं।
प्रवीण शाह जी सिर्फ़ आपकी बात को हां में हां करने आते हैं। उनकी करतूत पकड़ में आ गयी तो रो रहे हैं कि कारीगरी का आरोप लगाया जा रहा है भाई जो करा था बस वो पोल खोल कर बता दिया इसमें कैसा रोना?ये तो हमारा पुराना काम है जो सदा चलता रहेगा।
आप सच कह रहे हैं सोने का बहाना कर रहे आदमी को कोई नही जगा सकता जैसा कि आप कर रहे हैं लेकिन फिर भी भड़ासाना आदत से मजबूर हूं तो सोने का नाटक कर रहे आदमी को दो-चार लातें कस कर जमा कर थोड़ा अधिक प्रयास कर लेता हूं कि शायद उठ जाए फिर नाक बंद कर देता हू कि शायद अब उठ जाए और यदि नहीं उठता तो दुनिया से उठ जाएगा नाटक करने के चक्कर में हमारी पकड़ इतनी सख्त है ;)
जय जय भड़ास

sanjay ने कहा…

बिलकुल सही कहा डा.साहब आपने कि इन्हें बस लातों की ही जरूरत है वो भी फिजिकली...
जय जय भड़ास

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

तुम तो खा चुके हो ना लात भी और बात भी संजय कटे हुए

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