हमारे देश के सविधान की एक झलक

मंगलवार, 6 सितंबर 2011

1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

ढेर सारे बदलावों और सुधारों की आवश्यकता है अभी संविधान में लेकिन मात्र आज़ादी के पैंसठ साल इसके लिये काफ़ी नहीं हैं अभी बहुत समय लगे का लोकतंत्र को भीड़तंत्र के चंगुल से संवैधानिक तरीके से निकलने में। राष्ट्र विधि के शासनानुसार चले यही मेरी पहली और अंतिम आकाँक्षा है लेकिन वह विधि सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय हो साथ ही मानव मूल्यों की स्थापक हो।
जय जय भड़ास

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