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रामभद्राचार्य का माफ़ी नामा या नौटंकी..

बुधवार, 4 नवंबर 2009


हमारे पुनीत भाई वैसे हैं तो स्टार न्यूज़ के संवाददाता लेकिन अयोध्या फैजाबाद में स्टार न्यूज़ इन्ही के नाम से जाना जाता है व्यवहार ऐसा की एक बार मिल लीजिये तो इन्ही के होकर रह जायेंगे।तो साहब हम भी इनसे मित्रता किये बिना नहीं रह सके और हम अच्छे दोस्त भी हैं कल की बात है मै पुनीत भाई से रामभद्राचार्य और उनकी नै रामायण के विषय में चर्चा कर रहा था उनके मुह से निकला की ये सब स्टंट है देखिये कब माफ़ी नामा आता है और आज भाई पुनीत मिश्र जी ने मुझे माफ़ी नामा की एक फोटो कॉपी देदी.जो मै भड़ास परिवार को भेज रहा हूँ.
आपका हमवतन भाई ..गुफरान (अवध पीपुल्स फॉरम फैजाबाद,अयोध्या)

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यशवंत की क्षद्मता और तानाशाही जारी, भड़ास से लोगों को बाहर निकलने का सिलसिला जारी।

रविवार, 15 फ़रवरी 2009

विचार की आजादी और उल्टियों को आत्मसात करने की हिम्मत ने ही भड़ास को एक विचार वाला मंच बनाया था। आम लोगों से सरोकार और हमेशा से सिर्फ़ आमजन का हिमायती भड़ास और उसकी आत्मा को यशवंत ने बलात्कार कर ब्लॉग जगत को घिनोना बना दिया है।
अपने गोरे चहरे के पीछे छीपी कालिख से ब्लॉग जगत को कला कर दिया, साबित कर दिया की यशवंत अपनी दूकान चलने के लिए किसी की भी दलाली कर सकता है।
पहले पत्रकारिता की दलाली, जागरण ने जूता मार कर बाहर निकाला........
लाइव एम् को बाजार में बेचने की कोशिश और रंजन जी से यहाँ भी लात खाया........
अपनी कुटिल बुद्धि और शातिर दिमाग की भोलेपन और गवई का स्वांग भर कर लोगों की संवेदना पर भीबाजार खड़ा कर लिया।
भाई लोगों ये अपुन नही कह रिया है बल्की ये जमीनी हकीकत है इस बहुरूपिये की। हरे दादा, पंडित नीरव, मनीष राज, मनीषा दीदी, मुनव्वर आपा, डाक्टर भैया, रजनीश भाई और ना जाने कितने के बाद अबकी बारी आयी कनिष्का की, इन सभी के विचारों के बूते एक मंच तैयार हुआ जिसका नम था भड़ास। यशवंत ने इन सभी को अपनी लालागिरी पर शहीद कर अपनी दूकानदारी चला ली और जिस पत्रकारिता से लात मार कर बाहर किया गया वो बन बैठा उसका दलाल।
कहने को यहाँ पर लेखकों के लेखन की जिमेदारी लेखक की होती है, मगर इस बहुरूपिये ने किसी भी लेखक को भड़ास से हटाने के बाद उसके पोस्ट नही हटाये। (चेतो भडासी तुम्हारा लेखनी भी इसकी दलाली की भेंट चढेगा) । ब्लॉग को करीब से जानने वाले जानते हैं की भड़ास का मतलब क्या है और भड़ास की आत्मा क्या है और आज यशवंत क्या कह कर अपना मुखौटा बदलने की कोशिश कर रहा है ( बगल के पोल वाले जगह पर पढने पर शायद यशवंत को गालियों का आभास ना हो क्यूँकी बकचोदी गाली नही होती है।)
जिसने व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप के लिए कनिष्का जी से सफाई दे रहा है वहीँ उसी पोस्ट पर व्यक्तिगत आरोप की टीप्पणी इस बहुरूपिये दलाल का पोल खोल रही है। अविनाश जी की बीवी तक को जिसने अपने व्यक्तिगत लदी में घसीटा था वोह आज शरीफ बन रहा है। बलात्कार का आरोपी आज शरीफ बन रहा है। बिल्ली आज कह रही है की मैं चूहे नही खाता !!!
वाह वाह रे यशवंत।
बेचो लोगों की भावना !!!!
बेचो लोगों की संवेदना !!!!
बेचो भड़ास की आत्मा !!!!

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