असली-नकली ’भड़ास’ के रुदन की महानता और उदारता

सोमवार, 5 जनवरी 2009

एक बार एक आदमी अपने कक्षा चार में पढ़ने वाले बच्चे को एक महात्मा जी के प्रवचन में ले गया। बच्चा बैठ कर उबासियां लेता रहा। घर आकर पिता ने पूछा कि इतनी अच्छी बाते बताई जा रही हैं और तुम उबासी ले रहे थे बेटा अंदर जाकर डिक्शनरी उठा लाया और बोला उन्होंने जो भी शब्द बोले वो इस किताब में हैं बस उन्होंने आगे पीछे करके बोले इसमें नया और अच्छा क्या है? बच्चा है कैसे समझेगा कि सोच क्या है शब्दों में छिपा दर्शन क्या है वह तो बस शब्द जानता है। कल तक जिस डा.रूपेश के वकालत करते हुए तमाम कसीदे पढ़े जा रहे थे आज वो गालीबाज हो गया है जबकि डा.रूपेश के अनुसार भड़ास तो एक वैचारिक तल पर होने वाली ऐसी क्रिया है जो कि "कैथार्सिस" या "विचार-रेचन" कर के अपने चित्त को क्लेश-मुक्त रख कर स्वस्थ बने रहने से जुड़ा है ताकि आजकल के तनाव भरे माहौल में जो तेज रफ़्तार जिंदगी में होने वाली ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन आदि जैसी तमाम मनोशारीरिक बीमारियों से सहज ही मुक्त हुआ जा सके। भगवान रजनीश(ओशो) से जुड़े लोग इस तथ्य को सहज ही समझ सकते हैं। भड़ास नामक ब्लाग की लोकप्रियता को अपनी वणिक सोच का प्रयोग करते हुए भड़ास4मीडिया नामक पोर्टल(जिसका चित्र इस पेज पर बांयी तरफ की पट्टी पर लगा है) की रचना करी गयी जिसमें कोई मौलिकता नहीं है बल्कि हर ब्लागर जानता है कि "खबरी अड्डा"(http://khabriadda.blogspot.com/) नामक ब्लाग से चुराई हुई सूचनाएं संकलित करी जाती हैं। भड़ास नया क्या पुराना क्या और क्या सदस्यता का समाप्त करा जाना......इन बातों का विचारों पर कोई प्रभाव पड़ता है क्या? डा.रूपेश की कोई टीम न तो थी न ही वो गिरोहबंदी करने वालों में से हैं जो उन्हें जानते हैं उन्हें पता है कि वो हैं "वन मैन आर्मी"....। भड़ास पर लगे खुले निमंत्रण को वैसा ही मानिये जैसे किसी आश्रम या धर्मार्थ चिकित्सालय का द्वार हो आप आना चाहें आपकी मर्जी आपको कोई बुलाने न जाएगा कि आओ भीड़ लगाओ ताकि हम अपने आपको दुनिया का सबसे बड़ा ब्लाग सिद्ध कर के दो टाइम की रोटी की जुगाड़ बना सकें। रजनीश के झा, मनीषा नारायण और मोहम्मद उमर रफ़ाई का कोई अस्तित्त्व नहीं है ये मात्र काल्पनिक पात्र हैं जो कि यहां वहां से फोटो चुरा कर फ़र्जी आई.डी. के आधार पर बनाए गए हैं। दर असल मेरा भी कोई वजूद नहीं है मैं भी एक वर्चुअल कल्पना हूं डा.रूपेश श्रीवास्तव के भड़ासी दिमाग की.........
जय जय भड़ास

4 टिप्पणियाँ:

बेनामी ने कहा…

भड़ास(असली?) से इतने सारे लोग क्यों हटा दिये गये इसका कारण तो दुनिया जानती है लेकिन क्या अभी भी भड़ास(फ़ुस्स्स्स्स) के माडरेटर दुनिया को यही बता कर गाल बजाएगें कि दुनिया का सबसे बड़ा हिंदी का कम्युनिटी ब्लाग(540 सदस्यों वाला)है?

दीनबन्धु ने कहा…

लालाजी की दुकान पर ग्रहण लग गया है तो अब उन्होंने उसे हटाने के लिये ब्राह्मण देवता का सहारा लिया है लेकिन अमित द्विवेदी नामक ब्राह्मण देवता दो वेदों केमंत्र पढ़ कर तकलीफ़ें दूर करने की बजाए झाड़ू-पोछा करने की सलाह दे रहे हैं शायद शुद्धिकरण के बाद अब गंगाजल छिड़क कर पवित्रीकरण करेंगे और वणिक यजमान से मोटी दक्षिणा वसूलेंगे या फिर शनिवार को तेल लेने आते रहेंगे:)
बनियों की अगर किसी ने बजा पायी है तो वो हैं ये ही लोग हैं जो मरने से पहले और मरने के बाद तक लोगों को कर्मकाण्डादि के नाम पर चूसते रहते हैं बनिये तो बस जीते जी ही खून पीते हैं ये मरने के बाद भी नहीं छोड़ते:)
उल्टी करने वाले पर शर्त है कि भाई भड़ास निकाल...उल्टी कर लेकिन खबरदार अगर उल्टी में बदबू आयी तो.....छू..
सदस्यता समाप्त....:)

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

दीनबंधू भाई,
चाणक्य वंशी पंडित मैं भी हूँ, और नन्द सरीखे क्षत्रिय के बजाय चन्द्रगुप्त नामक प्रतापी शुद्र पर ज्यादा भरोसा और विश्वास करता हूँ, संग ही चन्द्रगुप्त से नन्द का नाश करवाना भी जानता हूँ.
रही बात भड़ास की तो असल नक़ल से परे हम तो आत्मा चोर हैं और अपनी भडासी आत्मा चुरा कर लाये हुए हैं, शराफत का चोला ओढ़ कर राम राम हरी हरी करना तो हम जानते ही नहीं, ऋषि परुशराम की तरह लोगों को अच्छा लगे या बुरा सत्य कहने में विशवास रखते हैं और सत्य कि उल्टियां ही करते हैं.
जय जय भड़ास

फ़रहीन नाज़ ने कहा…

मैं भी...मैं भी...मैं भी ... एक वर्चुअल कल्पना हूं:०
कितना सुखद लगता है ये न?
अच्छा लग रहा है खुद को काल्पनिक मान लेना...
जय जय भड़ास मंच की:)
जय जय भड़ास

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