मेरी नातिन का नाम "दुर्गा" रखे जाने पर कुछ लोगों को एतराज़ है

सोमवार, 14 दिसंबर 2009

नानाजी की दुर्गा भड़ासियों की परंपरा में शामिल होने की बात करते हुए
मेरी बेटी हुमा को उसके क्रूर और अत्याचारी पति ने पांच माह के गर्भ की स्थिति में यह कह कर घर से आधी रात को निकाल दिया कि तुमने मेरे माता-पिता की मर्ज़ी के खिलाफ़ गर्भ धारण क्यों करा। पांच माह का गर्भ हो जाने पर गर्भपात कराने का प्रयास करना भयंकर मूर्खता है जो कि जानलेवा हो सकती है। हुमा सुबह होने तक दरवाजे पर पड़ी गिड़गिड़ाती रही कि रात को कहां जाएगी लेकिन उन राक्षसों को बच्ची पर रहम नहीं आया फिर सुबह होने पर भी जब बात न बनी तो पड़ोसियों के सामने अधिक तमाशा न हो इस लोकलाज के भय से बेचारी बच्ची अपनी माताजी यानि हमारी बहन आयशा आपा के पास आ गयी। तब से अब तक इस मामले को सुलझाने के सैकड़ों प्रयास करे गये लेकिन कुछ कारगर नहीं रहा क्योंकि वो सारे प्रयास बातचीत के द्वारा करे गये थे। यही प्रयास अगर जूते से कर दिये जाते तो शायद कुछ परिणाम निकलता। शादी हुए तीन साल होने को आए लेकिन ससुराल पक्ष का व्यवहार जस का तस है। मेरी बेटी मायके में हम लोगों के साथ रही और गर्भकाल पूरा होने पर ईश्वर की दया से हुमा ने एक सुंदर स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। आजकल के दुष्ट व्यवसायी किस्म के डाक्टरों के लालच के चलते उन्होनें हुमा का प्रसव सिजेरियन आपरेशन से कराया जिसमें कि करीब चालीस हजार रुपये का खर्च आया। खैर पैसा बच्चों से अधिक मूल्य नहीं रखता। बच्ची के होने की सूचना भी ससुराल पक्ष को दी लेकिन कोई प्रतिक्रिया न आयी न ही कोई मिलने देखने आया। बच्ची का नाम रखने की बारी आयी तो हुमा ने मुझसे कहा कि आप ही नाम रखें अपनी नातिन का। सामने एक उत्सव चल रहा था और हिंदुओं की शक्तिरूपा देवी दुर्गा का बहुत बड़ा सा पोस्टर देख कर उस अष्टभुजी शक्तिरूपिणी नारी के ध्यान में मेरे मुंह से निकला.... "दुर्गा" । बच्ची का नाम सभी लोगों ने प्रसन्न मन से आह्लादित होकर जोर से पुकारा , "दुर्गा"......। कोई शंका न करे कि उस चार घंटे की बच्ची के चेहरे पर एक मुस्कान थी उस समय जिसे कि मैं कैमरा लिये होने के कारण सौभाग्यवश कैद कर पाया।
आज चार दाढ़ी वाले मौलाना टाइप लोग मुझसे आकर कहते हैं कि मैं परेशानी में फंसे मुस्लिमों की सहायता का ढोंग करके उनका धर्म परिवर्तन करने का कुत्सित प्रयास कर हुमा को उमा और नवजात बच्ची को दुर्गा बना रहा हूं। मैं किसी प्रचलित धर्म की मान्यताओं पर विश्वास नहीं करता हूं, मैं तो टार्ज़न की तरह हूं। आप लोग सोचिये कि मुझे उन उल्लू के पट्ठों को क्या उत्तर देना चाहिए था। मैंने वही करा जो आप सोच रहे हैं उन सालों को गरियाते हुए लट्ठ उठा कर बाहर का रास्ता ये कह कर दिखा दिया कि अगर दोबारा बकवास करने आए और मेरे बच्चों को सताया तो एक पिता क्या कर सकता है तुरंत दिखा दूंगा, सारा धर्म और मज़हब पिछवाड़े घुसा दूंगा; तब कहां थे ये लोग जब मेरी बच्ची आधी रात को घर से निकाल दी गयी, रात भर दरवाजे पर पड़ी मासूम गर्भवती गिड़गिड़ाती रही, चार माह मेरे साथ रही, बच्ची होने पर हजारों रुपए खर्च हुए??????? और अब नाम को लेकर नौटंकी कर रहे हैं। मेरी नातिन है, हमारे घर के बच्चों के नाम भी अब क्या इन चिरकुटों से पूछ कर रखने पड़ेंगे?
जय जय भड़ास

8 टिप्पणियाँ:

अजय मोहन ने कहा…

गुरूदेव ये साले चूतिये हैं इनकी ही तो बातें सुन सुन कर एक आम आदमी इंसान रह ही नहीं जाता कभी हिंदू बन जाता है और कभी मुसलमान। साला नाम में क्या रखा है जिसके रखा हो वो कैश करा ले। हुमा बहन का मसला जल्दी से किसी नतीजे पर पहुंचाना है। उस अत्याचारी सुअर की औलाद की तो...
आप के साथ दुर्गा की तस्वीर एक ऐतिहासिक दस्तावेज बनेगी
जय जय भड़ास

बेनामी ने कहा…

sir kya mai apko phon kar sakta hun.you can send me your no on jai @rockfort.com .au

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

गुरुदेव आपने बिलकुल सही करा। दुर्गा नाम में क्या हर्ज़ है जबकि आपने बताया है कि उस बच्ची का पूरा नाम तो दुर्गा सैय्यद है जैसे कि एक गायिका है पार्वती खान, नाम का आस्था से क्या लेना?ये वो ही हरामी लोग हैं जो खुद को ईश्वर का भी बाप समझते हैं और स्वयंभू झंडाबरदार बने धर्म की ठेकेदारी करके रोटियां सेंकते हैं। इनकी ऐसे ही कस कर मारनी चाहिये। हुमा बहन का मामला किसी एक बहन की बात नहीं है ये हजारों लाखों बहनों की समस्या है लेकिन सामाजिक दबाव के चलते बेचारियां कुछ बोल नहीं पाती हैं और आजीवन घुटती रहती हैं। हुमा बहन अकेली नहीं है भड़ास परिवार की बेटी हैं वो।
आप जल्द ही जाकर कानूनी कार्यवाही का पलीता लगाइये और फिर हम लोग उस सुअर को सड़क पर भी रगेदते हैं ताकि चर्बी उतर सके और किसी दूसरी बच्ची की जिंदगी अपनी वासना के चलते खराब न कर सके। धर्म और मजहब का मुद्दा अलग से हल करा जाएगा।
जय जय भड़ास

दीनबन्धु ने कहा…

पहली बात anonymous जी से कि ऐसी कौन सी बात है जो कि आप गुरूदेव से अकेले में करना चाहते हैं हम भड़ासियों के सामने सार्वजनिक नहीं कर सकते? यदि नहीं तो उन्हें मेल कर दीजिये rudrakshanath@yahoo.com पर या aayushved@gmail.com पर।
दूसरी बात कि अगली बार अगर कोई ऐसा आए तो आप उसे चेतावनी न देकर पेल ही धरें ताकि एक सबक हो जाए ऐसे हरामियों के लिये।
दुर्गा को हम सबका खूब सारा प्यार
जय जय भड़ास

साहिल ने कहा…

kabeer, bulle shah jaise log kahte kahte mar gae, par in dharm ke thekedaroN ko akal nahi aayi. sach hai sahab laatoN ke bhoot baatoN se nahi mante, aapne bilkul uchit kiya. kaash ki aur log bhi aapse sabak le sakeN.

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

डाक्टर साहब,
इन चूतियों कि जमात को जब तक लात जूते ना लगे अपने को धर्म का ठेकेदार कह लोगों का जीना दुश्वार करते रहते हैं.
लोगों की समस्याओं और उसका निराकरण से इनका कोई लेना देना नहीं अपितु बस अपना धर्मं का धंदा चलता रहे.
हम अपनी छोटी दुर्गा के लिए किसी को भी उसकी ठेकेदारी चलाने नहीं देंगे.
जय जय भड़ास

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