पत्रकारिता बनाम पत्राकारिता

बुधवार, 20 जनवरी 2010

ब्लागिंग के लिये हिंदी में क्या शब्द स्वीकार्य हो जो कि पूर्णरूपेण इसकी चारित्रिक विशेषताओं और क्षमताओं को बता सके ये आपस में भाषा के स्वयंभू कई विद्वानों ने सिरफोड़ी करने के बाद भी स्पष्ट नहीं हो सका है। फिलहाल काम चलाने और हिंदी की नाक बचाए रखने के लिये लोगों ने "चिट्ठाकारी" शब्द अपना रखा है। मैं चूंकि भड़ास पर हिन्दी में लिखने के साथ ही लंतरानी नाम के उर्दू ब्लाग पर भी लिखती हूं जिसके कारण मुझे विश्व की पहली महिला उर्दू(नस्तालिक) ब्लागर होने का मान प्राप्त है। एक कड़वा सच ये है कि उर्दू और कम्प्यूटर का रिश्ता अभी भी कुछ खास अच्छा नहीं है। उर्दू के क्षेत्र के बड़े-बड़े विद्वान कम्प्यूटर के बारे में चर्चा करने में भी सकपकाए रहते हैं। उन्हें एक भ्रम निरन्तर है कि कम्प्यूटर सिर्फ़ अंग्रेजी जानने वाले ही प्रयोग कर सकते हैं लेकिन लंतरानी के मंच पर ये भ्रम तोड़ने का प्रयत्न जारी है।
उर्दू महफ़िल में एक सज्जन ने कहा कि ब्लागिंग के लिए हिंदी में क्या शब्द है क्योंकि चिट्ठाकारी तो हिंदी का शब्द नहीं है। इसपर हमारे आदरणीय गुरुवर्य भड़ास के संचालक द्वय में से एक डा.रूपेश श्रीवास्तव जी ने तत्काल उनका मुंह एक नया(मेरे लिये तो एकदम नया है) शब्द देकर बंद कर दिया कि महाशय ! ब्लागिंग के लिये उर्दू में चिट्ठाकारी और हिंदी में पत्राकारिता शब्द सही है। डा.रूपेश जी के अनुसार पत्राकारिता परंपरागत पत्रकारिता की आगे की पीढ़ी है और तकनीकी तौर पर विकसित रूप है। तब से अभी तक मैं इस बात पर विचार कर रही हूं। शब्दकोश में "पत्रा" शब्द को भी देखा, अब तक ये शब्द परंपरा से मात्र ज्योतिष के संदर्भ में प्रयुक्त संचायी-पोथी(ARCHIEVE) के लिये ही प्रयुक्त होता रहा है किन्तु अत्यंत सूक्ष्मता से मनन करने पर ये शब्द सटीक व उचित प्रतीत हुआ। आपको याद होगा कि हमारे डा.रूपेश जी ने अपनी इसी विशिष्ट प्रज्ञा के चलते मनीषा(नारायण) दीदी जैसे लोगों के लिए एक शब्द प्रस्तुत करा था जिन्हें कि सामान्य भाषा में लोग कठोरता पूर्वक हिजड़ा कहते हैं और न जाने किसकी विद्वता के परिणाम स्वरूप "किन्नर" कहने लगे, वह नया शब्द रहा "लैंगिक विकलांग" जोकि अब धीरे से भाषा में स्वीकार लिया गया है और लेखन में प्रयोग होने लगा है। ठीक वैसा ही एक नया शब्द इन्होंने प्रस्तुत करा है "पत्राकारिता", इससे पत्रकारिता यानि जर्नलिज़्म का विकास ही होगा और भाषा का शब्दकोष भी सम्पन्न होगा। पत्रकार के ही समानान्तर नया शब्द उभरेगा "पत्राकार" और कदाचित इसी तरह के अनेक शब्द विकसित होंगे जो कि सटीक व क्षमतावान होंगे कि पद की व्याख्या कर सकें।
जय जय भड़ास

1 टिप्पणियाँ:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

आपा,
शानदार जानदार और एकदम सटीक.
गुरुदेव को बधाई कि एकदम सटीक शब्द का इजाद किया.
जय जय भड़ास

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