अब महा धूर्त मक्कार शम्स , पहले संजय , न जाने कितने बिना प्रोफाइल के व्यक्तित्व अब भडास पर विचरण कर रहे है

मंगलवार, 17 मई 2011

अब महा धूर्त मक्कार शम्स , पहले संजय , न जाने कितने बिना प्रोफाइल के व्यक्तित्व अब भडास पर विचरण कर रहे है और कमाल की बात ये है की ये सिर्फ अमित जैन या परवीन शाह के विरोध करके अपना अस्तित्व तलाश रहे है ,डॉ साहब मैंने आप को अनूप मंडल की कारगुजारी की तस्वीर दिखा दी और आप उस को भूल गए , इतनी बेशर्मी की भड़ास पर सिर्फ ५-६ लोग एक दुसरे का होसला अफजाई करते हुए बे सर पैर की बाते लिख रहे है अगर तुम सब लोगो को तंत्र ,मन्त्र तांत्रिक किर्या सही लगती है तो उस को ले कर नाचते रहो ,ये क्या जोर जबरदस्ती है की हम तुम्हारी बात मने ,अगर इस बात का कोई तर्क सिद्ध सबूत है तो उसे लाओ , मन में जों भड़ास है वो निकालो न की अपने मक्कार मित्रों के साथ मक्कारी भरा खेल दिखा ओ


लो जी कर दिया तंत्र मन्त्र ,खुश हो गया गधे शम्स


ये कैसे संभव हो रहा है बिना डॉ साहब की जानकारी के बिना की कोई भी एरा गैर नाथू खैर बिना किसी पहचान के सिर्फ एक email id के साथ भड़ास पर किसी भी अनजाने नाम के साथ आ जाये और कुछ भी लिखने लेगे , क्या लिखने वाले की कोई पहचान है , मै तो मानता हू इस प्रकार के लोग डॉ साहब कभी भी ब्लॉग पर पैदा कर सकते है ......... बाकि डॉ साहब आप खुद समझदार है , समझ सकते है की मै क्या कहना चाहता हू

3 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

आप खूब अच्छी तरह जानते हैं कि आपने अनूप मंडल की कोई कारगुजारी की कोई तस्वीर भड़ास पर नहीं दिखाई गयी है और हम सब जानते हैं लेकिन ये मूर्खता है कि अब मेरे ऊपर ये आरोप लग रहे हैं कि मैं फ़र्जी प्रोफ़ाइल बना कर जबरन विवादास्पद लेखन करता हूँ तो मैं ही क्या इस बात से तो न जाने कितने भड़ासी सहमत हैं कि मैं ही अमित जैन के नाम से अनूप मंडल की लेता रहता हूं। ये बात अलग है कि अनूप मंडल ने कभी इस बात पर ऐतराज न करते हुए बिना दोषारोपण करे अपना लेखन उद्देश्य सहित जारी रखा है। ठीक इसी प्रकार मेरा एक और फ़र्जी आई.डी.है जिससे मैंने अभी हाल ही में भड़ास पर लिखना शुरू करा है वह है प्रवीण शाह ;०
ये भी एक काला जादू है :) है न मजेदार??
जय जय भड़ास

sanjay ने कहा…

हम समझ गये अमित जैन कि आप ही डा.रूपेश श्रीवास्तव हो और सबको कार्टून बनाए रहते हो। प्रवीण शाह भी आप ही हो।
अगर आप दो लोग हो तो प्रवीण शाह तस्वीर में वो है जो मिट्टी से सिर्फ़ फ़िर निकाले है क्योंकि उसे हम सबने नंगा कर दिया है और जिसकी पिछाड़ी दिख रही है वह आप हैं जिसकी कभी स्टेथस्कोप जैसी हो जाती है कभी किसी औरत के गले में बाँहें डाले आदमी जैसी। आपका पिछवाड़ा आमंत्रण की मुद्रा में आपने जैसे उठा रखा है वह "थ्री ईडियट" फ़िल्म के आखिरी सीन जैसा दिख रहा है अच्छा है।
अब अनूप मंडल के खिलाफ़ कार्टून बनाओ और मेरे खिलाफ़ भी।
जय जय भड़ास

sanjay ने कहा…

"फ़िर" का मतलब समझे?
अरे सिर...
जो कि फ़िर चुका है
यानि सिरफ़िरा है तू....

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