उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - एक

सोमवार, 9 मई 2011

आदरणीय डा. रूपेश साहब आपके द्वारा फ़ारवर्ड हुए सारे मेल पढ़े तो कहानी समझ में आयी कि किस तरह से झूठ, मक्कारी और चालाकी से लोग खुद को सफ़ेदपोश जता-बता देते हैं और सारी अच्छाई का श्रेय ले लिया करते हैं। भड़ास पर ये कोई नई बात नहीं है कि किसी मक्कार मुखौटाधारी का मुखौटा नोच कर उसका असल चेहरा दुनिया के सामने लाया जा रहा है चूंकि इस संवाद का काफ़ी हिस्सा उर्दू(नस्तालिक लिपि) में है इसलिये उसका अर्थ भी बताता चलूंगा ताकि लोग जान सकें कि दुनिया का पहला "नस्तालिक ब्लागर" होने की सूचना देने की विनम्रता दिखाने वाला अपनी पोल खुलने पर किस कदर बिलबिलाने कोसने लगता है। डा. ने जिस तरह से लोगों को ये मेल भेजा कि वे बहुत बड़े रिसर्च वर्क करने वाले व्यक्ति हैं और उन्होंने बहुत ही बड़ा कारनामा अंजाम दिया है जरा सभी भड़ासियों के साथ इस वैश्विक मंच से दुनिया के सामने भी आ जाए। ये उसी जमात के लोग हैं जिन्होंने आज तक उर्दू भाषा और नस्तालिक लिपि को तकनीक में "इनपेज" नामक साफ़्टवेयर की बैसाखी पकड़ा रखी थी और अब भी एक विशेष बनिया किस्म के वर्ग के पिछलग्गू बने हुए हैं। लीजिये थोड़े थोड़े हिस्से में ये पूरी कहानी पेश कर रहा हूं। आजकल डा. अंसारी को जितने भी ई-पते मिलते हैं सबको लिंक भेजते हैं इस बात की कि इन्होंने अपने ब्लाग पर उर्दू के ऊपर क्या एहसान करा है।
जय जय भड़ास

3 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

शम्स भाई आपने तो भड़भड़ा कर भड़ास निकालना शुरू कर दिया लेकिन अब अगर भाई लोग नाराज़ हो कर मुझे ठोकने-पीटने घर आ गए तो क्या होगा यार:)
मैंने आपको सिर्फ़ मेल फ़ारवर्ड करा था सिर्फ़ पढ़ने के लिये इनकी बखिया उधेड़ने के लिये नहीं डा.अंसारी एक अत्यंत सम्मानित व्यक्ति हैं।
जय जय भड़ास

InPage Al-Maktab ने कहा…

ye jo bhi hai, isko pata hi nahin hai ke Urdu duniya mein kya ho raha hai... Gandu ke bachche ko chahiye ke ya to kaam kare ya apni "Jhantulli" writing kisi aur kaam ke liye istemal kare...

Dr Rehan Ansari ने कहा…

شمس تبریز اگر واقعی تم ہو تو میرا سلام و دعا،
تم نے مجھے فراڈ لکھ تو دیا مگر میرا فراڈ ثابت کرنے کے لئے کوئی ثبوت نہیں دیا. میں نے تو صرف اردو دنیا کو انفارمیشن دی ہے کہ میرا بلاگ دنیا کا اولین نستعلیق بلاگ ہے، فیض نستعلیق فونٹ ہم لوگوں کا بنایا ہوا ہے. اس کی پوری ڈیجیٹل کتابت میں نے انجام دی ہے. فیض صاحب کے شاگرد محمّد اسلم کرتپوری میرے استاد ہیں. انہوں نے پورے کام کی نگرانی کی. سید منظر حسن زیدی نے پورے فونٹ کی تشکیل کی. اور ان پیج ٣ میں اس فونٹ کو شامل کیا گیا ہے. کیا آپ یہ بات جانتے ہیں کی ان پیج ہندوستانی پروگرام ہے؟ شاید نہیں جانتے ہونگے. بات دوسری طرف چلی جاےگی. اس لئے بتاتا چلوں کہ میرا آپ کو کھلا چیلنج ہے کہ اردو میں مجھ سے پہلے کسی بھی "نستعلیق ٹیکسٹ بلاگ" کے بارے میں ثبوت دیجئے. اور آپ یہ کام نہیں کر سکیں گے میں جانتا ہوں. اس لئے آپ میں ظرف ہوگا تو اسی طرح سب کے سامنے معافی بھی مانگنا پڑیگا جیسے کہ آپ نے بھڑاس نکالی ہے. کم ظرف ہوں گے اگر آپ تو ہی معافی نہیں مانگیں گے. زیادہ امکان اسی بات کا لگتا ہے. مجھے فراڈ ثابت کرنے کے کے لئے کوئی زیادہ نہیں بس ایک ہی ثبوت دینا ہے شمس تبریز. آ جاؤاور خود کو سچا ثابت کردو. ورنہ محترم ظفر گورکھپوری کا یہ شعر سن لیجئے آپ پر اور اس ڈاکٹر سریواستو پر فٹ بیٹھتا ہے جس کا آج کل ہاضمہ خراب ہوا ہے کہ:
کتنی آسانی سے مشہور کیا ہے خود کو
میں نے اپنے سے بڑے شخص کو گالی دی ہے
آپ لوگوں کا اصل دکھ اب بھی میری سمجھ سے باھر ہے. کیونکہ اس کا کہیں کوئی ذکر آپ لوگوں نے نہیں کیا ہے.
کیا میرا چیلنج آپ کو قبول ہے؟ لاؤ کوئی ایک ہی ثبوت نستعلیق ٹیکسٹ بلاگ کا مجھ سے پہلے والا. ورنہ آپ کو سب متعلق لوگوں سے معافی مانگنا ہی پڑیگا. ہم اردو پر احسان نہیں کرتے بلکہ اس پر جان چھڑکتے ہیں. ہم اردو کے احسان مند ہیں اور اس کے دامن کو سجانے سنوارنے کے لئے کوشاں رہتے ہیں.
ڈاکٹر ریحان انصاری

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