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डॉ.रेहान अन्सारी जी को पत्र..... जय जय भड़ास

शनिवार, 7 अप्रैल 2012

डॉ.रेहान अन्सारी जी के साथ चल रहे मेरे प्रेम प्रसंग को वैसे तो सभी भड़ासी जानते हैं लेकिन जो विद्वान नए आगंतुक पाठक हैं वे भी जान लें इस लिये इस चित्र को प्रेषित कर रहा हूँ। होता है भाई इश्क नचाए जिसको यार वो फिर नाचे बीच बाज़ार.... वही हाल हमारा है हमारा प्रेम छिपाए नहीं छिप रहा है। इस मेल को देखिये-----
ई-मेल का चित्र जो प्रमाण है इस प्रेमवार्ता का
प्रिय डॉ.रेहान अन्सारी जी
सप्रेम प्रणाम
आपने मुझे जिस तरह आदर व सम्मान दिया है उसे स्वीकार लेने में मुझे प्रसन्नता है, भला मेरे जैसे छोटे आदमी को यदि आप व्यंग करते हुए तंज़िया अन्दाज़ में भी "जग आदरणीय" लिखेंगे तो भला मन आह्लादित न होगा। आपने मुझे ज्ञानी भी स्वीकारा है इसके लिये भी हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। वैसे अति प्रसन्नता के कारण बोलने में जिह्वा लड़खड़ाती है परन्तु आज  टंकण में उंगलियाँ साथ नहीं दे रही हैं अब आपको प्रत्युत्तर के लिये इतनी लम्बी प्रतीक्षा कराना भी उचित नहीं प्रतीत हो रहा अतः पत्र प्रेषित कर रहा हूँ। मेरी ज़बान तो वो है जो जन सामान्य बोलता है उसे नस्तालिक लिपि में लिखिये, देवनागरी में या आपकी तरह रोमन में कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। मेरी ज़बान पर हिंदी की हथकड़ी मत लगाइये । आपने जिस प्यार से भय्या लिखा है मैं इस रिश्ते में बँध कर रह गया हूँ तो मेरा दायित्व बनता है कि उत्तर दूँ अन्यथा मेरा भाई कहीं मुझे अहंकारी न समझ ले कि मैं उत्तर तक नहीं देता। हिंदी के लिए श्री लिपि से लेकर आईलीप तक कई सॉफ़्टवेयर उपलब्ध हैं अत्यंत सहजता से जिनसे डी.टी.पी. कार्य करा जाता है उसके लिये मुझे परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। रही बात अंग्रेज़ी डी.टी.पी. के लिये किसी सॉफ़्टवेयर की तो उसके लिये माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड यदि आवश्यकताएं पूरी न कर पा रहा हो तो फोटोशॉप से लेकर कोरल ड्रॉ सभी इस भाषा की लिपि का समर्थन करते हैं। आपने पत्र पढ़ते समय किसी भी भावना के आग्रह से पहले संयम का आदेश दिया है तो आपके सामने है कि इतना समय पर्याप्त है जिसे आप मेरे संयम का सीधा उदाहरण मान सकते हैं। झंझट से मुक्ति यदि इतनी सरल होती तो कदाचित हम सब अब तक अंग्रेजी के मायाजाल से निकल चुके होते और आपकी घोषणा के अनुसार आपकी जान से भी अधिक प्यारी उर्दू में ओ.एस. व सॉफ़्टवेयर बन रहे होते । आपने मेरे सम्मान के स्तर को बनाए रखने में जितनी कोशिश करी है उसके लिये तो यदि मेरी आने वाली पीढ़ियाँ भी चाहेंगी तो इस उपकार से उऋण न हो सकेंगी। आपने लिखा है "आप लोग बड़े हैं" ये बात मेरी कल्पना से परे है कि आप मेरे साथ अन्य किन लोगों को जोड़ कर मुझे भी बड़ा कह रहे हैं लेकिन इस बड़प्पन को भी मैंने स्वीकार लिया ठीक जैसे आपने अन्य सम्मान दिया है। उर्दू वाले न तो कड़के हैं न सड़के हैं न ही बेचारे हैं  ये आपने धारणा कैसे बना ली इसका स्पष्टीकरण आवश्यक है । 
आपने स्वयं को अज्ञानियों में भी सबसे बड़ा जताया ये आपना निजी निर्णय है ये बात तो लोगों पर छोड़ देनी चाहिये\
आपकी सेवा में सामुदायिक पत्रा "भड़ास" पर कुछ आपके अनुसार मेरे ही जैसे आदरणीय लोगों ने लिखा था उसे पुनः संज्ञान के लिये प्रेषित कर रहा हूं यदि समय हो तो अवश्य पढ़ियेगा और प्रतिक्रिया दीजियेगा, भाषा की भद्रता-अभद्रता की कोई सीमा नहीं है जैसा कि आपके कुछ साथी इस सीमा को लाँघ चुके हैं अतः अब आगे बढ़िये। सादर प्रस्तुत है विशेष ध्यान दें

उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - एक




हृदय से प्रेम सहित
आपका भय्या
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव

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उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - ७

सोमवार, 16 मई 2011

सभी भड़ासियों की सेवा में एक बार और समय का सदुपयोग करते हुए इन उर्दू के महान धूर्त सेवा करने वालों की ढोल में एक धम्म्म... और देना चाहता हूँ। यदि आप अपने कम्प्यूटर में विन्डोज़ में जाकर इनका अविष्कृत चमत्कारी महान फ़ौन्ट (जिसका भारी भरकम आकार है २३.७ मेगाबाइट) तब आप इनके विद्वतापूर्ण आलेख इस रूप में पढ़ सकेंगे वरना परंपरागत चिरकुट फ़ौन्ट यानि "एशिया नस्ख़" में ही पढ़ना होगा। इनका जोर सिर्फ़ आलेख के html पर ही चलता है जिसे कि आप किसी भी फ़ौन्ट में परिवर्तित कर सकते हैं। इनका जोर ब्लागर पर तो है नहीं इसलिये मुझ भड़ासी के करे हुए कमेंट तो एशिया नस्ख़ फ़ौन्ट में ही दिखाई दे रहे हैं जरा महान शोधकर्ता वैज्ञानिक कमेंट बॉक्स के फ़ौन्ट को एशिया नस्ख़ की बजाए अपने महान अविष्कारी फ़ौन्ट फ़ैज़ नस्तालिक में लिख कर दिखाएं।
डा.रेहान अंसारी मैं तुम्हें तब तक रगेदता रहूंगा जब तक कि तुम हमारे आदरणीय डा.रूपेश श्रीवास्तव जी से लिखित माफ़ी नहीं माँग लेते और अपनी गलती सुधार नहीं लेते। हमारी प्यारी बहन ज़ैनब आपा ने तो तुम्हें टैक्स्ट और फ़ौन्ट में अन्तर बता ही दिया है, मानोगे या और घसीटा जाना चाहते हो?? कहीं ऐसा तो नहीं निगेटिव पब्लिसिटी का स्वाद मुँह लग गया हो तो ये तुम्हारी निर्लज्जता की हद है।
जय जय भड़ास

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उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - ६

तुम उर्दू भाषा और नस्तालिक लिपि से प्यार करने वालों के प्यार के टके करा के चांदी काट रहे हो लेकिन अब तो तुम लोग ऐसा कुकर्म कर रहे हो जिससे कि उर्दू भाषा और नस्तालिक लिपि से प्यार करने वालों का करोड़ों रुपया ऐसे लोगों की जेब में भेज रहे हो जो कि शायद हम लोगों को ही मारने के लिये उस धन से हथियार विकसित करते हैं। तुम्हारी बकवास को तुम्हारे ब्लाग पर पढ़ने के लिये जो उर्दू के आशिक पहुंचते हैं तुम उन्हें विवश करते हो कि वो "फ़ैज़ नस्तालिक" फ़ौन्ट की २३.५ मेगाबाइट की भारी भरकम फाइल डाउनलोड करें और फिर उसे अनज़िप करके उस फ़ौन्ट को अपनी विन्डोज़ के फ़ौन्ट फोल्डर में रखें। अब जरा ये देखो कि तुम्हारे स्वयं को बहुत बड़ा विद्वान और अविष्कारक विद्वान जताने के इस कुकर्म से कितना धन निचुड़ कर इंटरनेट के रास्ते हम जैसे उर्दू भाषा और नस्तालिक लिपि को प्यार करने वालों की जेब से देश से बाहर चला जाता है। सामान्यतः आजकल इंटरनेट पर लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार "यूज़र्स प्लान" लिया करते हैं जैसे कि महीने भर में एक जी.बी. या फिर दो जी.बी. आदि लेकिन तुम जैसे लोगों ने इस आवश्यकता में हमारे प्यार की भावना को निचोड़ा है जिस पर २३.५ मेगाबाइट का भार डाला। विद्वान पाठक विचार करें कि आपके प्लान से अतिरिक्त डाउनलोडिंग पर आपका "नेटवर्क प्रोवाइडर" प्रति मेगाबाइट(mb) कितना मूल्य लेता है। यदि एक मेगाबाइट अठन्नी(मैं बहुत ज्यादा नहीं मात्र पचास पैसे बता रहा हूं कई एक नेटवर्क प्रोवाइडर आपसे प्लान के अतिरिक्त इस्तेमाल का प्रति मेगाबाइट एक रुपया तक वसूलते हैं)। अब आप सोचिये कि हमारे देश में ही अनुमानतः बीस करोड़ मुस्लिम हैं जिनमें से लगभग आधे लोग उर्दू पढ़ते, लिखते और बोलते हैं। चलिये मैं इस आंकड़े से भी बहुत कम लेते हुए मान लेता हूं कि यदि उर्दू जानने लिखने पढ़ने वाले लोग दो करोड़ लोग ही हमारे देश में ऐसे होंगे जो कि कम्प्यूटर पर इंटरनेट इस्तेमाल करते होगे और उनमें से आधे लोग भी इस फ़ौन्ट को डाउनलोड कर लें महज इसलिये कि वो सुन्दर बैसाखी है जिस पर ये उर्दू को घिसटते हुए चलने के लिये मजबूर करे हुए हैं तो तुरन्त ही हमारे देश से उर्दू प्रेमियों का पचास लाख रुपया इन बनियों के भाईयों उन नेटवर्क प्रोवाइडर्स की जेब में चला जाता है जो कि उस पैसे का न जाने क्या-क्या इस्तेमाल करते हैं। सोचिये कि उर्दू पूरी दुनिया भर में तमाम मुल्कों में जानी, समझी और पढ़ी जाती है तो इन लोगों ने उर्दू प्रेमियों का कितना बड़ा नुकसान करा है यानि कि कई सौ करोड़ रुपए का दंड सिर्फ़ उर्दू से प्रेम का जुर्माना। एक बात और भी है कि ये पैसा इन बनियों की जेब में भी नहीं जाता लेकिन बस होते हैं कुछ लोग ऐसे जो अपनों को ही कष्ट देकर खुश होते हैं यही तो राक्षसपन है। मेरा दिल तुम लोगों को इन्सान मानने को तैयार नहीं होता है। मौका है कि अब भी सुधर जाओ वरना यही उर्दू से प्यार करने वाले तुम्हारी हालत खराब कर देंगे।
जय जय भड़ास

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उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - ५

उर्दू की मठाधीशी करने वाले लोगों में से जो लोग आगे की कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं उनमें से एक पूरा गिरोह ऐसे लोगों का है जिन्होंने उर्दू भाषा की नस्तालिक लिपि को कम्प्यूटिंग तकनीक में ऐसी गहरी चोट दी है कि वह अपाहिज सा व्यवहार करने लगी है। ये लोग सत्यतः भले ही कानूनी तौर पर व्यापारी हैं लेकिन समाज और नैतिकता की नज़रों में ये किसी काले चोर से कम नहीं हैं। एक बात और कि ये सिर्फ़ चोट्टों की जमात नहीं बल्कि बेहद धूर्त, घमंडी, नकचढ़े और खुद को तकनीक का प्रकांड विद्वान मानने वालों का गिरोह है।
इस डा.रेहान अंसारी ने अब तक मैंने जितना लिखा है पढ़ा तो होगा ही साथ में अपने जड़बुद्धि वकीलों को भी पढ़वाया होगा लेकिन इनमें से किसी ने न तो अपनी तकनीकी गलती को माना है न ही अपने बेहूदा बड़बोलेपन के लिये माफ़ी मांगा है। सिर्फ़ मैं ही नहीं भड़ास के भावुक सदस्यों के साथ साथ खुद हमारे गुरूवर आदरणीय डा.रूपेश श्रीवास्तव जी इसके द्वारा गलती स्वीकार लेने पर इसे दिल से माफ़ करके गले लगा लेते लेकिन मक्कारी का आलम ये है कि ये अपनी बकवास लिखाई की हाइपर लिंक लगी हुई ई-मेल मुझे भेजता ही जा रहा है। शेख ज़ैनब आपा ने अब तो पूरी डिक्शनरी खोल कर तुम लोगों के सामने रख दी है तो अब भी मान लो कि तुम दुनिया के "नस्तालिक के पहले टैक्स्ट ब्लागर" होने का जो दावा कर रहे हो वह कितना बेवकूफ़ाना है।
रेहान अंसारी तुम्हारे बारे में मुझे तुम्हारे एक वकील ने विद्वता की उल्टियां करते हुए बताया था कि तुम पत्रकार हो। मुझे तो अब यकीन हो चला है कि तुम पत्रकारिता की उस सोच के पत्रकार हो जो कि समाचार "पत्र" छाप कर "कार" तक की यात्रा कर लेते हैं। मैंने ऐसे न जाने कितने पत्रकार देखें हैं जो कि इसको उसको धमकाते फिरते हैं कि फलां-फलां बात अखबार में छाप दूंगा तो तुम्हारी बेइज़्ज़ती हो जाएगी ये तरीका रहता है इश्तेहार घसीटने का.... ये तो तुम करते हो या नहीं अब तक मुझे नहीं पता लेकिन तुम पत्रकार हो ये तुम्हारे ही वकील ने बताया है। तुम लोग जबरन उर्दू के चाहने वालों को जिस तरह निचोड़ रहे हो ये तुम्हारे वकील को तुमने नहीं बताया कि तुम लोग उर्दू को कब से सरेआम बेआबरू कर रहे हो???
अल्लाह तआला तुम्हारे वकीलों को सदबुद्धि दे ताकि तुम लोग बच सको।
जय जय भड़ास

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मुझे तो ये बंदा डा.रेहान अन्सारी अव्वल दर्ज़े का जाहिल सा जान पड़ा

शुक्रवार, 13 मई 2011

शम्स भाई मुझे तो ये बंदा डा.रेहान अन्सारी अव्वल दर्ज़े का जाहिल सा जान पड़ा जिसे कि टैक्स्ट और फ़ौन्ट में अन्तर नहीं पता है ये डाक्टर किस चीज का है मेडिकल साइंस का या ????
इसकी जानकारी के लिये टैक्स्ट और फ़ौन्ट का अन्तर लिख रही हूं अगर जरा सी भी शर्म बाकी है तो सबके सामने डा.रूपेश श्रीवास्तव से माफ़ी मांग ले और बेकार का घमंड छोड़ दे।
Text :
noun
1.
the main body of matter in a manuscript, book, newspaper, etc., as distinguished from notes, appendixes, headings, illustrations, etc.
2.
the original words of an author or speaker, as opposed to a translation, paraphrase, commentary, or the like: The newspaper published the whole text of the speech.
3.
the actual wording of anything written or printed: You have not kept to the text of my remarks.
–verb (used without object) Digital Technology .
4.
to send a text message: Texting while driving is an accident asking to happen.
–verb (used with object) Digital Technology .
5.
to send a text message about or containing: He texted a long wish list to his parents two days before his eighteenth birthday. Compare instant message ( def. 2 ) .
6.
to send a text message to: The only way I can ever reach her is to text her.
Computing Dictionary

text definition

1. Executable code, especially a "pure code" portion shared between multiple instances of a program running in a multitasking operating system.
Compare English.
2. Textual material in the mainstream sense; data in ordinary ASCII or EBCDIC representation (see flat ASCII). "Those are text files; you can review them using the editor."
These two contradictory senses confuse hackers too.

FONT:
noun
1.
a receptacle, usually of stone, as in a baptistery or church, containing the water used in baptism.
2.
a receptacle for holy water; stoup.
3.
a productive source: The book is a font of useful tips for travelers.
Computing Dictionary
font definition
A set of glyphs ( images) representing the characters from some particular character set in a particular size and typeface. The image of each character may be encoded either as a bitmap (in a bitmap font) or by a higher-level description in terms of lines and areas (an outline font).
There are several different computer representations for fonts, the most widely known are Adobe Systems, Inc.'s PostScript font definitions and Apple's TrueType. Window systems can display different fonts on the screen and print them.
Synonyms: fount, fountain, genesis, origin, root, seed, wellspring

अगर अभी भी इस कूढ़मग़ज़ को लगता है कि टैक्स्ट और फ़ौन्ट में अन्तर नहीं होता तो इसकी बुद्धि सचमुच भ्रष्ट है। मुझे इसके ई-मेल पढ़ कर ये एक निहायत ही घमंडी किस्म का बंदा जान पड़ा जो कि अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझता। शायद अंधों में काना होगा तो खुद को आंख वाला होने का बड़प्पन इसके दिमाग़ पर हावी हो गया है।
ये स्क्रिप्ट, टैक्स्ट और फ़ौन्ट में अंतर करना ही नहीं चाहता तभी तो खुद को "नस्तालिक" का दुनिया का पहला ब्लागर बता पाएगा। डा.रूपेश जी को बता रहा है कि नस्तालिक क्या है। इसकी झूठी सूचना से ये दुनिया का पहला नस्तालिक ब्लागर होने का दावा कर रहा है यानि कि अरबी, सिंधी, उर्दू और पर्शियन का पहला ब्लागर...... वाह रे तेरी मक्कारी।
जय जय भड़ास

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उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - तीन

बुधवार, 11 मई 2011

बनिया किस्म के उन लोगों की जमात जो कभी नहीं चाहती थी कि उर्दू भाषा और नस्तालिक लिपि के बोलने जानने वाले लोग कभी उनकी मोहताजी से ऊपर उठ सकें तो उन्होंने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि जिसमें तमाम बुद्धिजीवी फंस कर रह गए। ये षडयंत्र इतना मनमोहक और दिलफरेब था कि उर्दू भाषा और नस्तालिक लिपि से जुड़े लोग इस भ्रम में ही उलझ गए कि "इनपेज" नामक साफ़्टवेयर के अलावा उर्दू कम्प्यूटर पर मर जाएगी।
जब से मैंने रेहान अन्सारी नामक "इनपेज" के सेल्समैन की पोल खोलना शुरू करी है तो इसके कई वक़ील खड़े होकर दुहाई दे रहे हैं कि देखो शम्स तबरेज़ ये इतना बड़ा और महान आदमी है और तुम इसकी बुराई कर रहे हो। कुछ लोगों को तो मेरे अस्तित्व पर ही संदेह है लेकिन क्या इनके गुमनाम लिख देने से मेरा वजूद खत्म हो जाएगा?मेरे थोड़ा सा लिखने की धमक से इनके बरसों से जमे हुए सिंहासन की चूलें हिल गई हैं और इन सबका चीखना-चिल्लाना शुरू हो गया है।
मुझे अभी किन्ही श्रीमान खान साहब ने ई-मेल करा है जिसका कि शीर्षक अंग्रेजी में है और मेल के साथ एक फाइल जोड़ी हुई है जो कि "इनपेज" में लिखी हुई है। अब इन आंख वाले सूरदास खान साहब को दिखाई नहीं देता कि यदि मेरे पास "इनपेज" न हो तो पहले मैं बाजार से बनिया की दुकान से वो साफ़्टवेयर खरीदूं तब कहीं जाकर इनकी बात देख सकूं। अरे मेरे भाई कम से कम इतनी तो बुद्धि होगी कि इतनी सी बात समझ सको कि जाने-अनजाने में आप भी "इनपेज" के दुकानदारों के सेल्समैन बन जाते हो क्या इसी को उर्दू की तरक्की मानते हो?? जनाब खान साहब बस इतना जान लीजिये कि एक आपके हिसाब से बहुत महान डाक्टर है जिसने कि बहुत अच्छी बैसाखी बनाई है तो क्या आप अपने बच्चों को उनके पैरों पर चलना नहीं सीखने देंगे सिर्फ़ इसलिये कि बैसाखी बड़ी सुन्दर है और उसे बनाने वाला डाक्टर आपकी पहचान का है। भाई ये लोग सिर्फ़ और सिर्फ़ आपकी उर्दू और नस्तालिक के लिये मोहब्बत के टके करा के चांदी काट रहे हैं यही वजह है कि जब लोग चलना सीख रहे हैं तो इन बैसाखी बेचने वाले दुकानदारों में खलबली है। क्या आपको पता है कि text और font में क्या अंतर होता है????
अगर आप सचमुच हक़ के साथ हैं तो मेरी बात को समझ कर साथ दें न कि बाजारू बनियों के सेल्समैन का रोल करें। एक बात और कि ये बनिये इस निगेटिव पब्लिसिटी का भी फ़ायदा उठा रहे हैं लेकिन मेरी मजबूरी है कि इन पर लिखूं और सच सामने लाऊं।
जय जय भड़ास

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उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - दो

मंगलवार, 10 मई 2011

उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - एक

अभी कुल मिला कर इन महाशय जी को बमुश्किल एक महीना भी नहीं हुआ उर्दू भाषा की नस्तालिक लिपि में चिट्ठाकारी करते कि इन्होंने अपने अति विनम्र अंदाज़ में लोगों को मेल करना शुरू कर दिया कि वे दुनिया के पहले नस्तालिक टैक्स्ट ब्लागर हैं। इस करतूतमें जनाब ने अपने साथ उर्दू के क्षेत्र में पहले से ही जाने पहचाने कुछ लोगों को साथ लेलिया ताकि बात में दम नज़र आए। ऐसा ही एक मेल पहले-पहल डा.रूपेश जी को उनकेएक परिचित विख्यात विद्वान जिनका वे बहुत आदर करते हैं के द्वारा मिला तो डा.रूपेशसाहब इस बात पर भौचक्के रह गए। उन्होंने तत्काल उन आदरणीय बंधु को इस विषयपर प्रत्युत्तर

दिया कि ये तो बिल्कुल गलत दावा है जिस पर डा.अंसारी ने अपनी झूठीविनम्रता बनाए रख कर ये लिखा कि ये दावा नहीं महज एक सूचना है और आप क्या जानेंकि नस्तालिक क्या है। डा.अंसारी ने डा.रूपेश जी को बता डाला कि नस्तालिक वह लिपिहै जिसमें उर्दू भाषा को लिखा जाता है। इसके आगे डा.रूपेश ने उनकी शोध करने वाली जानकारी में बढोत्तरी करी की भाई नस्तालिक लिपि में सिर्फ़ उर्दू ही नहीं बल्कि अरबी, फ़ारसी और सिंधी भाषाएं भी लिखी जाती हैं।

गौ़रतलब बात ये भी है कि इन डा.अंसारी की विनम्रता सिर्फ़ इसी मेल तक सीमित रही इसके बाद वे खुद को उपदेशक जताने लगते हैं और डा.रूपेश जी को निहायत ही नासमझ जता दिया है।
कुल मिला कर बनियों की जमात जो कि बैसाखी वेचती है कब चाहेगी कि कोई अपने पैरों पर चले इसीलिये "इनपेज" नामक साफ़्टवेयर से रोज़ीरोटी चलाने वाले लोगों ने अब ऐसे सेल्समैन रख लिए हैं जो ब्लागिंग का मुखौटा लगा कर इंटरनेट की गलियों में चिल्ला चिल्ला कर आवाज़ लगा रहे हैं कि "इनपेज" ले लो "इनपेज".... फ़ैज़ नस्तालिक फ़ौन्ट ले लो... सस्ता... अच्छा... उर्दू वाला....
उर्दू के इन मठाधीशों का मायाजाल टूट रहा है तो इनकी बौखलाहट अब दिखेगी ही।
शेष आगे.......
जय जय भड़ास

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उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - एक

सोमवार, 9 मई 2011

आदरणीय डा. रूपेश साहब आपके द्वारा फ़ारवर्ड हुए सारे मेल पढ़े तो कहानी समझ में आयी कि किस तरह से झूठ, मक्कारी और चालाकी से लोग खुद को सफ़ेदपोश जता-बता देते हैं और सारी अच्छाई का श्रेय ले लिया करते हैं। भड़ास पर ये कोई नई बात नहीं है कि किसी मक्कार मुखौटाधारी का मुखौटा नोच कर उसका असल चेहरा दुनिया के सामने लाया जा रहा है चूंकि इस संवाद का काफ़ी हिस्सा उर्दू(नस्तालिक लिपि) में है इसलिये उसका अर्थ भी बताता चलूंगा ताकि लोग जान सकें कि दुनिया का पहला "नस्तालिक ब्लागर" होने की सूचना देने की विनम्रता दिखाने वाला अपनी पोल खुलने पर किस कदर बिलबिलाने कोसने लगता है। डा. ने जिस तरह से लोगों को ये मेल भेजा कि वे बहुत बड़े रिसर्च वर्क करने वाले व्यक्ति हैं और उन्होंने बहुत ही बड़ा कारनामा अंजाम दिया है जरा सभी भड़ासियों के साथ इस वैश्विक मंच से दुनिया के सामने भी आ जाए। ये उसी जमात के लोग हैं जिन्होंने आज तक उर्दू भाषा और नस्तालिक लिपि को तकनीक में "इनपेज" नामक साफ़्टवेयर की बैसाखी पकड़ा रखी थी और अब भी एक विशेष बनिया किस्म के वर्ग के पिछलग्गू बने हुए हैं। लीजिये थोड़े थोड़े हिस्से में ये पूरी कहानी पेश कर रहा हूं। आजकल डा. अंसारी को जितने भी ई-पते मिलते हैं सबको लिंक भेजते हैं इस बात की कि इन्होंने अपने ब्लाग पर उर्दू के ऊपर क्या एहसान करा है।
जय जय भड़ास

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मुनव्वर आपा!कुछ लोग आपकी ऊंचाई से जले मरे जा रहे हैं

शुक्रवार, 6 नवंबर 2009

जिस तरह मुनव्वर आपा ने अपने आसपास के परिवेश में सामाजिक व शैक्षणिक सक्रियता दिखायी और दुनिया की पहली महिला उर्दू(नस्तालिक) ब्लागर होने की ऊंचाई हासिल करी है उससे कुछ ईर्ष्यालु लोग अकारण जले भुने जा रहे हैं। मुझे याद है जब आपने पहली बार भड़ास पर अपनी उपस्थिति दर्शाई थी तो एक टुच्चे ने कहा था कि डा.रूपेश श्रीवास्तव ही हैं जो कि नाम बदल कर लिख रहे हैं दरअसल मुनव्वर सुल्ताना नाम की कोई शख्सियत नहीं है और यही हुआ था मनीषा दीदी के साथ जब उनके नाम से मिलते नाम की एक महिला पत्रकार ने डा.रूपेश श्रीवास्तव पर आरोप लगाया था कि भड़ासी उस मनीषा पांडे को सताने के लिये मनीषा नारायण नाम का लैंगिक विकलांग(हिजड़ा) काल्पनिक चरित्र गढ़े हुए हैं। समय आगे बढ़ता गया और भड़ासी बिना इन अवरोधों की परवाह करे आगे बढ़ते गये। भड़ास ने अपना अस्तित्त्व सिद्ध कर दिया कि हम हैं।
"माना कि एक क़तरा हूं मैं, मेरा वज़ूद तो है
होगा कोई सागर कहीं तलाश में मेरी"
मुनव्वर आपा ने भड़ास के मंच पर अपनी उपस्थिति के साथ ही आदरणीय डा.रूपेश श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में अपना ब्लाग "लंतरानी" (http://lantrani.tk) शुरू करा। उर्दू की लिपि के कारण बहुत तकनीकी दिक्कतें आयी साथ ही अपने साथ हितैषी का मुखौटा लगा कर खड़े कई लोगों के असल चेहरे भी सामने आए जो नहीं चाहते थे कि एक मुस्लिम औरत ब्लागिंग करके इंटरनेट पर अपने विचार रखे। इन सबके मुंह पर कालिख पुती हुई है और इनकी छाती पर सांप लोट रहे हैं ये देख कर कि "वुमेन औन टौप" मैगजीन ने इन पर स्टोरी करके बताया कि वे दुनिया की पहली महिला उर्दू(नस्तालिक) ब्लागर हैं। हम ईश्वर से मुनव्वर आपा के अच्छे स्वास्थ्य और सफ़लता की प्रार्थना करते हैं। वे इसी तरह से अपने क्षेत्र में सदा-सर्वदा प्रकाशवान रहें और अन्य लोगों को प्रेरणा देती रहें। हमारा सौभाग्य है कि वे हमारे साथ हैं और उनका प्रेम व आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहता है। आप सदा हंसते-मुस्कराते हुए हम सबको परेशानियों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देती रहें।
जय मुनव्वर आपा
जय जय भड़ास

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