"जैन रामायण" तो पढ़ ही ली होगी

बुधवार, 31 अगस्त 2011

अमित जैन जी महाराज आपने अब तक तो अपने परम विरोधियों द्वारा वायदे के मुताबिक प्रस्तुत करी गयी "जैन रामायण" तो पढ़ ही ली होगी उस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्या अनूप मंडल के लोग सच तो नहीं बोल रहे?

दूसरी बात कि जैनों को रामायण लिखने की क्या जरूरत थी ये बात भी समझ में नहीं आयी पूरी किताब पढ़ने के बाद शायद स्पष्ट हो सकेगा। आजकल आपके वकील साहब नदारद हैं या उन्हें भी पसीना आ रहा है।
जय जय भड़ास

2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अरे भाई क्यों अमित के पीछे पड़ गए हो देश के सांसदों की लो जो खुलेआम हरामीपन कर रहे हैं
जय जय भड़ास

बेनामी ने कहा…

हा हा हा जैन रामायण धन्य है ये रंगे सियार "जैन " भाई जरा देखो कही पर इसी तरह गीता भी मिलेगी ये साले जैनी हिन्दू धर्म ग्रंथो की माँ बहन कर रहे है.

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