देवताओं को काफ़ी नजदीक से जानने-पहचानने वाले मुनिश्री अमित जैन जी महाराज ने फरमाया है ---

बुधवार, 31 अगस्त 2011


देवताओं को काफ़ी नजदीक से जानने-पहचानने वाले मुनिश्री अमित जैन जी महाराज ने फरमाया है ---"दीनबंधु आप महान है , धन्य है ,जिस नारी का चरित्र समझने मे देवताओ को भी पसीना आ जाता है और जिसे वो अब तक नहीं समझ पाए है , उन नारियों मे से एक का चरित्र आप ने तुरंत सिर्फ एक तस्वीर देख कर भाप लिया और उसे हल्के चरित्र की बाइयाँ के नाम से घोषित कर दिया , आप धन्य है"

अपुन बोला --
परम आदरणीय अमित जी(ये इस लिये लिख रहा हूँ क्योंकि आपने भी तो मुझे महान कहा है तो मेरा फर्ज़ है कि आपकी भी प्रशंसा करूं भले ही झूठी ही सही) मेरी महानता स्वीकारने के लिये हृदय से धन्यवाद। देख रहा हूँ कि देवता लोग आपके काफ़ी नजदीकी हैं जिनको कब कब पसीना, पेशाब और जुलाब आ जाता है आपको हर बात की खबर रहती है। नारियों के चरित्र को समझने में आपके अनुसार देवताओं को पसीना आ जाता है तो नरों यानि कि हमारे आपके जैसे प्राणियों के चरित्र को समझने में देवियों को पसीना आता है या नहीं क्या इसकी भी आपको जानकारी है या सिर्फ़ देवताओं से ही मेल-मुलाकात है देवियों से नहीं??
ये तो बहुत अच्छा है कि आप इन्सान(अनूप मंडल के अनुसार राक्षस, ये मैं नहीं कह रहा) हैं वरना आपके साथ में जो नारी है उसकी वजह से आप भी पसीना-पसीना हो रहे होते। अब ये मत रोना रोने लगना कि मेरी पत्नी का अपमान कर रहे हो। तुम्हारी पत्नी मेरी छोटी बहन की तरह है लेकिन तुम उछल कर उसे इस्तेमाल करने लगते हो ये तुम्हारी समस्या है। मैं इतना कह रहा हूँ कि ये बात लिख कर तुम मेरी बहन यानि अपनी पत्नी का भी अपमान कर रहे हो सिर्फ़ इस अधनंगी चोंचलेबाज कुप्रसिद्धि की भूखी बाई के लिये। रही बात तिरंगे की तो ये तो तिरंगे का भी भयंकर अपमान है कि इस धंधे वाली बाई ने उसके प्रतीक को अपने नंगे जिस्म पर पुतवा रखा है। क्या आपको ये तिरंगे का सम्मान प्रतीत हो रहा है???ये बाई योगिता दांडेकर आँख मार कर किसका समर्थन कर रही है इस विषय पर भी अपने नेक विचार दे दीजियेगा।
जय जय भड़ास

2 टिप्पणियाँ:

अमित जैन (जोक्पीडिया ) ने कहा…

दीनबंधु तुम्हारी नजर किसे क्या देखती है मुझे उस से कोई मतलब नहीं , तुम यदि किसी को गलत देखते हो तो ये तुम्हारी समस्या है मेरी नहीं
और तुम भारत सरकार के कोई अधिकारिक अधिकारी नहीं हो जो ये बात बताओ की इस बहन ने यदि अपने शरीर पर तिरंगा बनाया है तो वो तिरंगे का अपमान है या नहीं ,अब ये तो तुम्हारे नजरिये पर है की तुम्हे अपने देश का तिरंगा पहले नजर आता है या उस बाई का शरीर ,
मुझे तो तिरंगा नजर आया बाकि तो नजर ही नहीं आया क्योकि उसे मेरा मन नहीं देखता , ये उस बाई का निजी मामला है की वो किसे आख मार रही है , इस मे आप की ताका झाखी क्यों है , आप को बुरा लग रहा है तो ना देखो

दीनबन्धु ने कहा…

आदरणीय अमित जैन जी "आपकी बहन" ने जो करा है उस पर सचमुच मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी लेकिन आपके देवताओं को भी सारी स्त्रीजाति के चरित्र के मूल्यांकन के बारे में आपको बताते समय और उसके बाद ये तथ्य आपके श्रीमुख से भड़ास तक आते समय आपको भी सोचना चाहिये था लेकिन आप भारत सरकार के अधिकारी हैं आप तो कुछ भी कह सकते हैं हम थोड़ी न हैं। आपने अपनी बहन के साथ हमारी बहन को भी अपने वक्तव्य में लपेट लिया इस बात का दुःख है लेकिन "आपकी बहन" और हमारी बहन में कुछ तो अंतर है ही। आपकी बहन नंगे जिस्म पर रंग पुतवा कर जिस तरह से आँख मारने का देशभक्तिपूर्ण कार्य कर रही है ये उसक निजी मामला नहीं सारे देश का मामला हो जाता है वैसे यदि वो बिना रंग पुतवाए ऐसे ही मुंबई में सड़क पर खड़्रे रह कर किसी को भी आँख मारे क्या लेना देना ऐसी तो न जाने कितनी हैं लेकिन वो बेचारियाँ भी कपड़े पहन कर आँख मारती हैं और ग्राहकों को बुलाती हैं।
जय जय भड़ास

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