नंगों की इस बारात में से एक नंगा उस मासूम बच्ची को कैसे घूर रहा है

मंगलवार, 1 नवंबर 2011


तुम्हारी गालियों से क्या फर्क पड़ेगा अमित जैन तुम तो राक्षस हो ही तुमसे और क्या उम्मीद करी जा सकती है। तुम चरित्र से नंगे और तुम्हारे मुनि कपड़ों और चरित्र दोनो से नंगे। दुनिया देख ले कि नंगों की इस बारात में से एक नंगा उस मासूम बच्ची को कैसे घूर रहा है जैसे मौका लगते ही खा जाएगा। धन्य है धर्म की आड़ में फैला हुआ ये नंगापन। तुम हमें मुस्लिमों के खिलाफ़ भड़काने की कोशिश में लगे रहते हो जरा एक बार तुम ये नंगों की बारात लेकर किसी मुस्लिम देश चले जाओ फिर देखो क्या होगा। तुम्हारा राक्षसपन मुस्लिमों से हार चुका है तो तुम अपनी खीझ निकाल कर हिंदुओं मुसलमानों को लड़ाते भिड़ाते रहते हो, दंगे करवाते हो।
जय जय भड़ास

1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

बहन किल्ली झपाटिन क्या बात है इस पोस्ट पर हँसना नहीं आ रहा है या बोलती बंद है?
जय जय भड़ास

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