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नंगों की इस बारात में से एक नंगा उस मासूम बच्ची को कैसे घूर रहा है

मंगलवार, 1 नवंबर 2011


तुम्हारी गालियों से क्या फर्क पड़ेगा अमित जैन तुम तो राक्षस हो ही तुमसे और क्या उम्मीद करी जा सकती है। तुम चरित्र से नंगे और तुम्हारे मुनि कपड़ों और चरित्र दोनो से नंगे। दुनिया देख ले कि नंगों की इस बारात में से एक नंगा उस मासूम बच्ची को कैसे घूर रहा है जैसे मौका लगते ही खा जाएगा। धन्य है धर्म की आड़ में फैला हुआ ये नंगापन। तुम हमें मुस्लिमों के खिलाफ़ भड़काने की कोशिश में लगे रहते हो जरा एक बार तुम ये नंगों की बारात लेकर किसी मुस्लिम देश चले जाओ फिर देखो क्या होगा। तुम्हारा राक्षसपन मुस्लिमों से हार चुका है तो तुम अपनी खीझ निकाल कर हिंदुओं मुसलमानों को लड़ाते भिड़ाते रहते हो, दंगे करवाते हो।
जय जय भड़ास

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नंगों की इस बारात में से एक नंगा उस मासूम बच्ची को कैसे घूर रहा है


तुम्हारी गालियों से क्या फर्क पड़ेगा अमित जैन तुम तो राक्षस हो ही तुमसे और क्या उम्मीद करी जा सकती है। तुम चरित्र से नंगे और तुम्हारे मुनि कपड़ों और चरित्र दोनो से नंगे। दुनिया देख ले कि नंगों की इस बारात में से एक नंगा उस मासूम बच्ची को कैसे घूर रहा है जैसे मौका लगते ही खा जाएगा। धन्य है धर्म की आड़ में फैला हुआ ये नंगापन। तुम हमें मुस्लिमों के खिलाफ़ भड़काने की कोशिश में लगे रहते हो जरा एक बार तुम ये नंगों की बारात लेकर किसी मुस्लिम देश चले जाओ फिर देखो क्या होगा। तुम्हारा राक्षसपन मुस्लिमों से हार चुका है तो तुम अपनी खीझ निकाल कर हिंदुओं मुसलमानों को लड़ाते भिड़ाते रहते हो, दंगे करवाते हो।
जय जय भड़ास

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जैन धर्म के सही स्वरूप को जानिये

रविवार, 30 अक्टूबर 2011




जैन धर्म पूर्णतया अहिंसा पर आधारित है ऐसा प्रचार करा गया है जो कि निराधार व असत्य है ऐसा अनूप मंडल के लोगों ने आरोप लगाया है। मैं इस विषय में कुछ कह सकता हूँ तो ये कि कई जैन व्यवसायी अंडे, माँस निर्यात, मछली निर्यात, चमड़ा उत्पादन आदि से जुड़े हैं साफ़ बात है कि सीधी हिंसा(पशु हत्या) न करके उसकी प्रेरणा देकर या अन्य लोगों को उसकी आवश्यकता पैदा करके करवाते हैं ये इनकी अहिंसा है कि ये कत्लखानों(पशुवध गृह यानि स्लॉटर हाउस) में साझेदार रहने में व्यापार मानते हैं। ये तो रही अहिंसा अब आइये इनके नंगेपन पर जिसे ये धर्म से जोड़ते हैं जिसे इन्होंने हिन्दुओं में भी षड़यंत्रपूर्वक घुसा दिया है जिससे सनातन धर्म को मानने वाले हिंदू अनेक पंथों में बँट कर टूट चुके हैं। लीजिये प्रस्तुत हैं इनके संतों के दर्शन जिसे करके अमित जैन फूले नहीं समा रहे थे।
जय जय भड़ास

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जैन धर्म

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

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जैन धर्म को मानने वाले सचमुच ही पैशाचिक शक्तियों के उपासक हैं

सोमवार, 3 जनवरी 2011

भड़ास के ही मंच पर एक बार लिखा था कि "जिन" और पैशाचिक शक्तियाँ "जिन्न" अलग-अलग हैं और इस बात को शब्दों के खिलवाड़ से किसी जैन ने ही सिद्ध करने की कोशिश करी थी। आजकल अमित जैन को इस्लाम में खामियाँ इस लिये दिखने लगी हैं क्योंकि इस्लाम के जानने वालों ने इनकी राक्षसी शक्तियों को पहचान लिया इस्लामिक किताबों में "जिन"(जिसकी वर्तनी यानि स्पेलिंग होती है जीम के नीचे ज़ेर लगा कर नून, उर्दू जानने वाले इस बात को समझ सकते हैं) कहा गया है। यदि जिन्न लिखना होता है तो नून अक्षर के ऊपर तश्दीद लगाया जाता है। दर असल ये राक्षसों का खिलवाड़ ही है कि वे शब्दों में उलझा कर मानवता को भ्रमित करे रहें। ये जिनदेवताओं की उपासना करने वाले हमेशा से सपना देखते हैं कि दुनिया में जिन शासन हो जाए इसलिये ये हमेशा "जयति जिन शासनम" का नारा लगाते रहते हैं। इनकी धार्मिक सोच में ईश्वर, अल्लाह या गॉड जो कि सर्वशक्तिमान है उसको स्वीकारने की जगह जिनों को धर्म का आधार बनाया गया है। ये है बिना ईश्वर का धर्म........ अब ये धर्म है या अधर्म ये आप सब निश्चित करें।
भारत में जैन के रूप में पहचान लिये जाने वाले असल में राक्षसी और पैशाचिक शक्तियों की उपासना करते हैं। ये चाहते हैं कि संसार में पैशाचिक शक्तियों का राज्य हो जाए। सभी देववंशज मानवों से हाथ जोड़ कर अर्ज है कि ऐसे राक्षसों को पहचान कर इनकी हरकतों से सावधान हो जाएं।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

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राक्षस अमित जैन को अनूप मंडल काखुला जवाब

अमित जैन हम सब तुम्हें और तुम्हारे विचार विमर्श में आने के साहस का सम्मान करने लगे हैं क्योंकि तुम एक मात्र वो जैन हो जो अनूप मंडल द्वारा करे जा रहे विचार विमर्श में पीठ दिखा कर महावीर सेमलानी या संजय बेंगाणी की तरह मुंह छिपा कर भाग नहीं गए। तुम भले ही दुराग्रही और कपटी हो लेकिन बहादुर हो इस बात के लिये हमारा सलाम स्वीकार करो। हजारों जैन भड़ास पर आकर हमारी बातें पढ़ते हैं जो कि तुम्हारे लिये स्पष्टतः विरोध में रहती हैं लेकिन तुम विमर्श में मौजूद हो अपनी कपटनीति चल कर ही सही कि लोगों को चुटकुलों में या अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान की बातों में या फिर इस्लाम की निंदा में उलझा लो। तुमने दो सवालों को बड़ी ही गर्मजोशी से गालियाँ लिखते हुए ये लिखा कि किन देशों के अध्यक्षों को हमने पत्र लिखा है और किस धर्मपुस्तक में लिखा है कि जैन राक्षस होते हैं। तुम्हारे पहले सवाल का जवाब तो हम उन पत्रों को भड़ास पर प्रकाशित करके ही दे देंगे। दूसरी बात कि यदि तुम वेदों के महापंडित स्वामी दयानंद सरस्वती को चूतिया, पागल, कुत्ते की औलाद आदि गालियाँ देने का साहस रखते हो तो जान लो कि उनके गृन्थ "सत्यार्थ प्रकाश" को पढ़ लो तुम्हें पता चल जाएगा कि तुम्हें उन्होंने स्पष्ट शब्दों में क्या क्या लिखा है।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

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वाह रे ! बेनामी क्षत्रिय क्या बहादुरी है तेरी......

रविवार, 6 जून 2010

ठाकुर की ठकुराई देख लीजिये इस कमेंट पर क्लिक करके कि ये क्या करतूत है। ये बहादुर ठाकुर पता नहीं किस पोस्ट पर टिप्पणी कर रहा है लेकिन बेचारे के बहादुर माता पिता ने अब तक इसका नाम नहीं रखा इस लिये कमेंट बेनामी ही है। श्री ठाकुर सिंह जी महाराज पता नहीं किसकी मां के बारे में लिख कर बता रहे हैं कि वे कितने बड़े अहिंसा के पुजारी हैं। बहुत संभव है कि जिस तरह से ये जैन धर्म के बारे में लिख कर अहिंसा का उपदेश लिख रहे हैं तो पता चलता है कि सारी गालियाँ अनूप मंडल के हिस्से में हैं।
ठाकुर जी निवेदन है कि अगली बार थोड़ा सा साहस करके अपने असली परिचय के साथ आइयेगा और किसकी माँ को किसके नीचे सुलाना है जरा साहस करके लिखियेगा तो आपको पता चलेगा कि अहिंसा के साथ सत्य बोलना भी जैन धर्म में बताया गया है जो कि आप नहीं बोल रहे हैं।
जय जय भड़ास

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ग्लोबल वार्मिंग के लिये जैन राक्षस जिम्मेदार हैं मनुष्य नहीं

मंगलवार, 25 मई 2010

हर धर्म की किताबों को पलट कर देख लीजिये आपको उसमें ईश्वरीय शक्ति के साथ ही शैतानी और जादुई ताकत की जिक्र अवश्य मिल जाएगा। इस्लाम के गन्थ इन बातों की पुष्टि करते हैं, ईसाईयत की किताबें भी इस बातों की पुरजोर पुष्टि करती हैं, हिन्दू धर्म गृन्थ तो साफ़ साफ़ ही देवताओं के साथ दानवों, असुरों और राक्षसों के बारे में और उनकी हमेशा पूरी सृष्टि पर काबिज़ हो जाने की हमेशा की इच्छा बतायी जाती है। हिन्दू धर्म गृन्थ बताते हैं कि हमारे देवी-देवताओं ने हमेशा मानव जाति और उसके स्वर्ग यानि धरती को बचाए रखने लिये न जाने कितनी बार राक्षसों से लड़े हैं।
आप देख सकते हैं कि आज हालात ऐसे हो गये हैं कि जब हिन्दुओं के आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और लीला पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण के बारे में सरकारी तौर पर कह दिया जाता है कि ये सब काल्पनिक चरित्र हैं लेकिन ईसा और हजरत मोहम्मद काल्पनिक नहीं हैं उनके तो लिखित इतिहास मौजूद हैं। चलिये राम और कृष्ण की बात ही मत करिये लेकिन कम से कम बाइबिल और कुरान पर तो ध्यान दीजिये जिसमें सोलोमन और मोहम्मद के समय जादू की बात बतायी गयी है और हजरत मोहम्मद ने तो जादूगरों को जान से मार देने के निर्देश भी दिये थे ऐसा हमारे एक इस्लाम के महापंडित ने बताया है।
फिर आज ऐसा क्या हो गया है कि हम मनुष्य इन जादूगरों और इनके शैतानी जादू को नहीं पहचान पा रहे हैं, ये असुर कहीं खत्म नहीं हुए बल्कि हम मनुष्यों में मिलजुल कर रह रहे हैं लेकिन अपनी काली करतूतों से बाज नहीं आ रहे हैं। सत्ता से लेकर धर्म संस्थाओं में घुसपैठ बना कर ये दुष्ट नीतियों और आर्थिक ववस्था पर काबिज हो गये हैं। इनकी पहचान भारत में जैनों के रूप में करी गयी है जो कि नग्न मूर्तियों की उपासना करते हैं और "जयति जिन शासनम" का नारा बुलंद करते हैं, जिन(ये शब्द प्रपंच करके कहते हैं कि ये जिन्न और जिन अलग अलग हैं जबकि आप इस बात को किसी भी मुसलमान मित्र से जान सकते हैं कि ये शब्दों का खेल करके भ्रमित करते हैं) क्या और कौन होते हैं
अभी हाल ही में ग्लोबल वार्मिंग के प्रति मानवों में समझ आयी है कि ये अनर्थ हो रहा है कि धरती का तापमान बढ़ रहा है इसके लिये वृक्षों की अंधाधुंध कटाई एक बड़ा कारण है। ये राक्षस अहिंसा, करुणा, जीवदया जैसे शब्दों की भूल भुलैय्या में सबको उलझा कर खामोशी से अपना काम कर रहे हैं।
हाल ही में मुंबई में मेट्रो रेल के प्रोजेक्ट में हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं चेंबूर में जैन मंदिर के सामने से ये प्रोजेक्ट जब गुजरेगा तब गुजरेगा लेकिन इन राक्षसों ने पेड़ काटे जाने का जरा भी विरोध न करा है क्योंकि इन्हें हरियाली पसंद नहीं है ये तो कबूतरों को दाना खिलाएंगे जो कि खंडहरों में रहने वाला पक्षी है गौरैया को दाना नहीं डालेंगे; चींटियों को चारा डालेंगे ये दिखाने के लिये कि ये जीवों से प्रेम करते हैं पर सिर्फ़ वहीं जीव जो कि इंसानों के घरों को खोखला कर दें।
इन राक्षसों को पहचानिये और इनके कथित धर्म को समझ कर सावधान हो जाइये। भारत में ये असुर राक्षस जैन हैं। जिसे इस विषय पर कोई शक शुबहा हो वह हमसे सीधा विमर्श कर सकता है।
अभी आप देखियेगा कि हमारी इस हक़ बात पर ये राक्षस कैसे तिलमिलायेंगे।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

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करकरे की लापता जैकेट खोजते राहुल तो अच्छा रहता'

शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के मुंबई दौरे को लेकर शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा है कि मुंबई ‘दिल्लीवालों’ के लिए हमेशा एटीएम यानी ऑल टाइम मनी रही है। लोकल ट्रेन से सफर करने का ड्रामा करने वाले राहुल गांधी ने यदि चोर बाजार जाकर शहीद हेमंत करकरे की लापता बुलेट प्रूफ जैकेट खोजने का काम किया होता, तो ज्यादा अच्छा होता।राहुल की मुंबई यात्रा तस्‍वीरों में देखने के लिए क्‍िलक करें...* शिवसेना भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि शिवसेना प्रमुख ने काले झंडे दिखाकर राहुल गांधी का स्वागत करने का आदेश दिया, तो पूरी सरकार सकते में आ गई। शिवसेना का राहुल का विरोध करने का आंदोलन सफल होने का दावा करते हुए उद्धव ने शिवसैनिकों की पीठ थपथपाई है। उन्होंने कहा कि यह शिवसेना की ताकत का ही परिणाम है कि राहुल गांधी को अपने कुछ कार्यक्रम रद्द करने पड़े। अपने मार्ग में तब्दीली करनी पड़े और सरकार को उनकी सुरक्षा में पूरी ताकत लगानी की भूमिका में मुख्यमंत्री : मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने राहुल गांधी के दौरे के वक्त फौजदार की भूमिका निभाई। यह आरोप शिवसेना कार्याध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने लगाया है। उन्होंने कहा कि राहुल की अगवानी में मुख्यमंत्री ने रमाबाई आंबेडकर नगर में करीब 3 घंटे गुजारे जबकि गृह राज्यमंत्री रमेश बागवे पर दौरे के दौरान राहुल के जूते संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उद्धव ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अपनी सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती को देख कर राहुल गांधी को मुंबई पुलिस की ताकत का अंदाजा आ गया होगा। उन्होंने एक बार फिर दोहराया है कि शिवसेना मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की कांग्रेस की साजिश को किसी भी हालत में सफल नहीं होने देगी।

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सवाल अभी भी अनुत्तरित है कि जैन अदालत में किस धर्म ग्रन्थ की शपथ लेते हैं?

गुरुवार, 14 मई 2009

अभी कुछ दिन पहले महावीर जी ने भड़ास पर "गेस्ट अपीयरेन्स" में एक पोस्ट लिखी थी जिसमें कि भूतपूर्व राष्ट्रपति कमाल को कुछ मुनियों से वार्ता करते दिखाया गया था। जो साधुनुमा आदमी भाईसाहब डा.रूपेश के पास आया था उसने तमाम सवाल करे थे और कहा था कि वो लोग सत्यपुर टाइम्स नाम का समाचार पत्र निकालते हैं यदि कहें तो मैं उसके एक-एक पन्ने को भड़ास पर डालना शुरू करूं यदि महावीर जी उस आदमी के सवालों के उत्तर देने आगे आएं हैं ही तो क्योंकि उस बंदे का तो कहना है कि उस पर मीडिया इस लिये ध्यान नहीं देता क्योंकि ये प्रचार तंत्र अधिकांश इन्हीं लोगों का है। खैर जाने दीजिये ये बात उसकी है लेकिन एक सवाल उसका मुझे अभी भी चिपका है जब एक श्रेष्ठ मुनि ने कहा कि वे हिंदू(भौगोलिक नहीं, धार्मिक तौर पर) नहीं है; जब ये भिन्न धर्म के हैं तो फिर ये अदालतों में जाने पर सच बोलने के लिये किस धर्म ग्रन्थ पर हाथ रख कर सच बोलने की शपथ लेते हैं? आशा है कि महावीर सेमलानी जी के पास इस बात का संतोषजनक उत्तर होगा।
जय जय भड़ास

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  © भड़ास भड़ासीजन के द्वारा जय जय भड़ास२००८

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