प्रवीण शाह नाम मुँह काला करके जो भागा तो अब तक उत्तर तलाश रहा है

रविवार, 6 नवंबर 2011

भड़ास पर अक्सर इस तरह के लोग अतिथि बन कर पधार जाते हैं जो कि सब जगहों से लात मार कर भगाए हुए रहते हैं। इनके भगाए जाने का कारण बड़ा साफ़ रहता है कि ये लोग जिधर अतिथि बन कर जाते हैं वहीं हग मूत कर गंदगी फैलाने लगते हैं। अब हर जगह भड़ास की तरह अस्पताल या उगालदान जैसा तो है नहीं कि किधर भी हग कर बैठे हैं। भड़ासी तो इतने संयत हैं कि यदि अमित जैन, प्रवीण शाह या हाल ही में अतिथि बने किलर झपाटा नाम के मुँहचोर(भाईसाहब तो इन्हें बहन कहते हैं शायद वो इन्हें जानते हों) यदि किधर भी झाड़ा फिर लेते हैं तो इनकी रगड़ रगड़ कर धुला दिया करते हैं। प्रवीण शाह ने भड़ास पर आदरणीय डॉ.रूपेश जी के सवालों के जवाब देने का ड्रामा शुरू करा लेकिन अब तक न जाने किधर गायब है हमें उसके जवाबों का इंतजार है। किधर हो मुँहचोर प्रवीण शाह..... अब अमित जैन ने जो कुकर्म करा है उस पर सफ़ाई देने नहीं आओगे अपनी वकालत का पिटारा लेकर जिसमें दुनिया भर के झूठ और मक्कारी के सिवाए कुछ नहीं है। मुझे याद है कि जब हम लोग तंत्र-मंत्र के प्रभाव और अस्तित्व पर चर्चा कर रहे थे तब उसमें व्यवधान डालने के लिये प्रवीण शाह पधारे थे जिन्होंने हर संभव कोशिश करी कि उस चर्चा का विषयान्तर कर दिया जाए जिसके लिये कभी उन्होंने अमित जैन की पत्नी के कंधे पर बंदूक रखी और कभी डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी को निशाना बनाया। बेचारे जब शब्दशः रगेदे गए तो जो मुँह काला करके भागे तो अब तक न दिखायी दिये। अब एक और मुखौटा पधारा है देखिये कितने समय तक पोकमॉन छाप पहलवानी करता / करती है ।
जय जय भड़ास

9 टिप्पणियाँ:

प्रवीण शाह ने कहा…

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हा हा हा,

अच्छी भड़ास निकाली है, लगे रहो मित्र संजय कटारनवरे... इस बात के लिये आश्वस्त करता हूँ कि आप कितना ही भला-बुरा लिखें परंतु आप मेरे प्रिय ही रहोगे...

रही बात मेरे न लिखने की तो इसका कारण मेरी पूर्व की टिप्पणी में है... थोड़ा मेहनत करो और कारण जान जाओ...

आदर सहित !



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किलर झपाटा ने कहा…

कमाल है संजय जी,
आप अभी भी इन रूपेश जैसे दिमाग से झोल खाये हुये को भाई साहब कह रहे हैं जो अपने को डॉक्टर कहते हैं और ठीक से किसी का लिंग भी पता नहीं कर पाते। करता/करती में ही उलझे हुये हैं बेचारे। शेमशेम। ये एक्चुअली भिदरया गये हैं यार पूर्णरूपेण। और मुझे अफ़सोस है कि ये इतने बड़े तीसमारखाँ बनते है पर सिवा मुझे किलरनी झपाटनी बताने के अलावा कुछ नहीं आता। वैरी सैड। इनके प्रॉब्लम के बारे में आप किलर झपाटा के ब्लॉग पर पढ़ आइये तो फिर आपके भी ज्ञानचक्षु स्वयमेव खुल जायेंगे और आप इनको वो सम्मान न दे पायेंगे जो सिम्पली अभी तक देते आये हैं। प्रवीण शाह जी पर फ़नफ़नाने से झपाटा से पिंड ना छूटेगा। अरे ये रूपेश जी क्या शब्दश: जवाब देंगे यार, पहले अपने यौनचक्षु तो खोल लें प्रॉपरली। इनको तो झपाटे के लेटेस्ट लेख का जवाब ही सूझ नहीं रहा है। बात करते हैं। भड़ास छोड़ दो आप लोग। इतने शानदार ब्लॉग की इज्जत धोये दे रहे आप लोग ये फ़ालतू बातें करके। मैं और प्रवीण शाह जी सम्भाल लेंगे।
चलते चलते भड़ास की टीम को और आपको देव उठनी ग्यारस की बहुत बहुत शुभकामनायें।

sanjay ने कहा…

ये तो तुम्हारी पुरानी ट्रिक है पाठकों को भ्रमित करके खुद को शरीफ़ बताते रहने की प्रवीण शाह। क्या बात है पहले तो डॉ.रूपेश साहब की बात को गलत तरीके से झूठे अंदाज में यह कह कर बताना कि "डॉ.साहब ने स्वीकारा है कि तुम्हारी पोस्ट हटाई गयी है" जबकि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं लिखा था तुमने जिस कमेंट को बताया था उसमें उन्होंने क्या लिखा था वो तो तत्काल अनूप मंडल के लोगों ने तुम्हारी पोल असल कमेंट के स्क्रीन शॉट के साथ खोल दी थी। तुमने किसी भी बात का जवाब नहीं दिया था। तुम जानते हो कि लोग कुछ समय बातों को भूल जाते हैं जिसका तुम फ़ायदा उठाना जानते हो। तुम बताओ कि तुम्हारी किस टिप्पणी में तुमने जवाब दिया है मुँह्चोर, अब अमित जैन की उसकी पत्नी के साथ फोटो देख लेना वरना बाद में रोते हो कि मैंने देखा नहीं था लेकिन वकालत के लिये कूद्ने लगते हो। क्या वकालत बंद कर दी या अमित जैन फीस के पैसे खा गया?
जय जय भड़ास

अनोप मंडल ने कहा…

आदरणीय बंधु संजय जी, हम सब जान चुके हैं कि प्रवीण शाह(जैन) ने किस तरह से हम सबके आदरणीय डॉ.रूपेश श्रीवास्तव जी पर गंदे, झूठे आरोप लगाए थे ताकि तंत्र-मंत्र पर चल रही चर्चा का विषयान्तर करा जा सके। इसने और अमित जैन ने तो इस कुत्सित उद्देश्य के लिये बेचारी अमित जैन की पत्नी को भी बीच में घसीट लिया था जबकि दोबारा अमित जैन वैसी ही मुद्रा में आ चुका है ये सोच कर कि उसकी धूर्तता को सब भूल चुके हैं। वही हरकत प्रवीण शाह(जैन) भी कर रहा है इस बात की प्रबल संभावना है कि किलर झपाटा के नाम से लिखने वाला ये ही हो इससे पहले भी ये राक्षस "शैतान" बन चुका है जिसकी पोल भड़ास पर खोली गयी थी तबसे मुँह काला करके छिपा था, अब लगा कि काफ़ी समय हो गया है लोग भूल गए होंगे तो फिर आ गया शराफ़त का मुखौटा लगा कर।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

अनोप मंडल ने कहा…

आप लोग इसके हँसी दिखाने के अंदाज से अनुमान लगा सकते हैं कि ये मुँह छिपा कर खड़ा असल में कौन है जो अलग अलग नामों से भड़ास को भटकाने का जतन कर रहा है कि कहीं हम इन राक्षसों की असलियत को दुनिया के सामने न ला दें।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

प्रवीण शाह जी, आपने मेरे ऊपर जो आरोप लगाए थे उसका जवाब तो अब तक आपने लंबित कर रखा है और यहाँ जताने की कोशिश में हैं कि आप बेहद ईमानदारी से उत्तर दे चुके हैं। आपने मेरे ऊपर जितने आरोप लगाए थे उनमें से किसका उत्तर दिया है? ये तो आप सचमुच लोगों को भुलावा देने का छल कर रहे हैं। क्या अमित जैन को आप अब कुछ नहीं कहेंगे पहले तो उसके एक शब्द लिखने पर भी मेरे खिलाफ़ लामबंद हो जाते थे या तर्कशक्ति उड़न छू हो गयी? इतने दिनों बाद पधार कर आप सोचते हैं कि हम सब भूल चुके हैं या पाठकों को भ्रमित करना चाहते हैं?
जय जय भड़ास

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

अबे चूतिये सुअर की पैदाइश किलर झपाटा तू अपने आपको पहलवान जताता है लेकिन व्यवहार तो रंडियों से भी गया बीता है। न्योता दे दे कर सबको बुला रहा है कि मेरे ब्लॉग पर आओ। अबे डुक्कर के पिल्लू तू सोचता है कि संजय भाई तेरे ब्लॉग पर जाकर आवेश में आकर एक टिप्पणी की भीख दे आएंगे तो ये जान ले कि तू खुद पहले ही भड़ास पर टिप्पणी के रूप में हग चुका है कि तेरे लेख को न पढ़ा जाए इसलिये देख कि तेरे जैसे मुखौटाधारी की प्रसिद्धि पाकर खुद को सेलेब्रिटी बनाने के टोटके कैसे नाकामयाब हो रहे हैं।
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

कमाल है संजय जी,
आप अभी भी इन रूपेश जैसे दिमाग से झोल खाये हुये को भाई साहब कह रहे हैं जो अपने को डॉक्टर कहते हैं और ठीक से किसी का लिंग भी पता नहीं कर पाते।
संजय भाई ये कदाचित अपने लिंग के प्रति सशंकित हैं इसलिये मेरे डॉक्टरी ज्ञान पर संदेह कर रहे हैं सामने आएं तो लिंगनिर्धारण कर दूँ लेकिन व्यवहार से स्त्रैण हैं तो बहन किल्ली झपाटिन कह कर इलाज कर रहा हूँ।
करता/करती में ही उलझे हुये हैं बेचारे। शेमशेम। ये एक्चुअली भिदरया गये हैं यार पूर्णरूपेण। और मुझे अफ़सोस है कि ये इतने बड़े तीसमारखाँ बनते है पर सिवा मुझे किलरनी झपाटनी बताने के अलावा कुछ नहीं आता।
नहीं नहीं किलरनी झपाटनी नहीं... बहन किल्ली झपाटिन । बीच बीच में अंग्रेजी को देवनागरी में लिख कर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि और यदि हो पाए तो वंशजों टोडियों की थाती देंगे। आता तो बहुत कुछ है लेकिन आप मिलें तब न। मैं कब छोटा या बड़ा तीसमारखाँ बना?
वैरी सैड।
दुखी मत हो हँसो जैसे पहले हँसती थीं लेकिन अब इलाज चल रहा है तो कुछ कुछ फर्क पड़ रहा है:)
इनके प्रॉब्लम के बारे में आप किलर झपाटा के ब्लॉग पर पढ़ आइये तो फिर आपके भी ज्ञानचक्षु स्वयमेव खुल जायेंगे
बेचारगी का आलम तो देखो कि न्योता दे देकर बुला रहे हैं कि आप देखो मैंने अपनी बीमारी के चलते क्या क्या लिखा है। ये तो बीमारी अधिक बिगड़ रही है विकृत यौन मनोआक्रामकता के साथ प्रसिद्धि की भूख तो अधिक अरिष्ट लक्षण है।
और आप इनको वो सम्मान न दे पायेंगे जो सिम्पली अभी तक देते आये हैं। प्रवीण शाह जी पर फ़नफ़नाने से झपाटा से पिंड ना छूटेगा।
किसने कह दिया कि मुझे तुमसे या किसी से भी सम्मान की अपेक्षा है?तुम प्रवीण शाह के वकील हो या खुद प्रवीण शाह उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, हम तुमसे हरगिज पिंड नहीं छुड़ाना चाहते तुम बीमार हो दुरुस्त करके ही मानेंगे।
अरे ये रूपेश जी क्या शब्दश: जवाब देंगे यार, पहले अपने यौनचक्षु तो खोल लें प्रॉपरली। इनको तो झपाटे के लेटेस्ट लेख का जवाब ही सूझ नहीं रहा है।
मैंने तुम हो या प्रवीण शाह सबको शब्दशः उत्तर दिये हैं लेकिन आप सबको "यार" बना कर जो विकृत यौन मनोरथ रखती हैं वह आपकि बीमारी का प्रबल लक्षण है बस इसे ही सही करना है लेकिन आप मुंबई आकर भी नवाब पहलवान से ही अपने यौनकर्ण, यौनचक्षु, यौनमुख, यौनहृदय आदि अंगों की जाँच करवा कर वापिस हाँगकाँग चली गयीं, मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ जो कि भाई बहनों से ब्लात्कार की प्रवृत्ति रखूँ मुझे तुमसे सहानुभूति है।
बात करते हैं। भड़ास छोड़ दो आप लोग। इतने शानदार ब्लॉग की इज्जत धोये दे रहे आप लोग ये फ़ालतू बातें करके। मैं और प्रवीण शाह जी सम्भाल लेंगे।
भड़ास की इज्जत स्वीकारी ये तो अच्छा लक्षण है लेकिन प्रवीण शाह जी(?)और तुम भड़ास का संचालन चाहते हो तो सामने आकर मुझसे मिलो या भड़ास के दूसरे संचालक भाई रजनीश झा से मिल लो वो तुम्हें संचालन दे देंगे।
चलते चलते भड़ास की टीम को और आपको देव उठनी ग्यारस की बहुत बहुत शुभकामनायें।
भड़ास की कोई टीम नहीं है बहन किल्ली झपाटिन ये तो हम जैसे चूतियों की जमात है तुम इसे कैसे सम्हालोगी?
जय जय भड़ास

हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा ने कहा…

प्रवीण शाह जी आपने किसी भी बात का उत्तर नहीं दिया था और जो मुँह छिपा कर भागे तो लगभग छह महीने बाद दिख रहे हैं क्या हुआ तर्क शक्ति का गुणगान बंद कर दिया? शायद मुँह छिपा लेना या अण्णा हजारे की तरह चुप्पी साध लेना ही तुम्हारा तर्क है।
जय जय भड़ास

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