अंग्रेजी भाषा का अस्तित्व खतरे में है

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

फिरंगी टोडी अंग्रेजों के वर्णसंकर भड़ास पर पधारे एक अतिथि ने तो अंग्रेजी ऐसी वाट लगा डाली है कि अगर अंग्रेज देख लें तो बाल्टियों आँसू बहा लेने के बाद भी दुःख कम न होगा।
इसने भड़ास पर गंवार भड़ासियों को अंग्रेजी सिखाने की बात करी है इसे अपनी बात कहने में इसके डी.एन.ए. से निकली अंग्रेजी के अचानक दौरे नहीं पड़ते लेकिन बात खत्म होते होते दो चार पंक्तियाँ जुलाब की तरह निकल ही पड़ती हैं।

देखिए कि ये अंग्रेजों का "चाइल"(इसके अनुसार) चाइल्ड कहना गलत होगा किस तरह अंग्रेजी की पाठशाला खोल रहा है।
ये बता रहा है कि चिलरन कहना सही है न कि चिल्ड्रन, इसी लिये मैंने इसे चाइल कहा है न कि चाइल्ड।
अंग्रेजी भी किसे सिखा रहा है डॉ.रूपेश श्रीवास्तव को ।
वाकई अगर इन जैसे लोगों के हाथ में अंग्रेजी का भविष्य होगा तो अस्तित्व संकट में है।
जय जय भड़ास


1 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

अक्का, जाने भी दीजिये बेचारा या बेचारी जो कोई भी है अगर अपने पूर्वजों की भाषा हिंदी पर शर्म महसूस करता है तो बोलने लिखने दीजिये अंग्रेजी भले ही गलत ही हो। अभी भी तमाम दिमागी तौर पर गुलाम लोग अंग्रेजी बोलने में अपने आप को बाबूसाहब महसूस करते हैं। ये उनकी कुंठा है निकल जाए तो अच्छा है। अच्छा तो ये है कि बेचारा या बेचारी अंग्रेजी को भी देवनागरी लिपि में लिख रहा या रही है।
जय जय भड़ास

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