एक सच जो लगभग सभी मुस्लिम जानते हैं इशरत जहाँ के बारे में परंतु छिपाते हैं

बुधवार, 23 नवंबर 2011

गुजरात पुलिस द्वारा फ़र्ज़ी मुठभेड़ में जिन चार लोगों को मार देने की चर्चा आजकल सुर्खियों में है वो सब जानते हैं। जो जानने वाली बात है वो ये कि इशरत जहाँ मुंबई के उपनगर मुम्ब्रा(ठाणे जिला) की रहने वाली और खालसा कॉलेज में पढ़ने वाली थी। वो तीन लड़कों के साथ गुजरात कार से क्या करने जा रही थी। कहानी ये है कि इशरत जहाँ को जिस तरह से मीडिया ने बताया है कि वह एक नेक बुर्केवाली किस्म की लड़की थी वह बिल्कुल गलत है। सच तो ये है कि वह एक उजड्ड किस्म की घरवालों की बात न मानने वाली आवारा किस्म की लड़की थी। जिसका कि एक दक्षिण भारतीय ब्राह्मण हिंदू लड़के से प्रेम प्रसंग चल रहा था जिसके चलते इस लड़की के घर वाले भी इससे ऊबे हुए थे। लड़के ने चूंकि प्रेम में दीवानगी दिखाते हुए इस्लाम स्वीकार लिया जो कि उसके घर वालों को खल गया। जब ये लड़की अपने साथ अपने प्रेमी और दो अन्य लड़कों के संग घूमने जा रही थी इरादा था भाग कर निकाह कर लेने का तो उस लड़के के बाप ने अपने संपर्कों का प्रयोग करते हुए इन दोनों को खाप पंचायती अंदाज में गुजरात पुलिस से ठिकाने लगवा दिया लेकिन साथ के दो लड़के बेचारे गेहूं के साथ घुन की तरह पिस गए।
ध्यान दीजिये कि आज तक किसी मीडिया वाले ने इस लड़की की नौटंकी करके रोती हुई माँ से ये नहीं पूछा कि वो तीन लड़कों से साथ इतनी दूर क्या कर रही थी और कई बार अनेक लोगों के साथ होटलों में क्यों ठहरी थी जिसका रिकॉर्ड मौजूद है जिसके चलते अब भी अधिकारी ये कह रहे हैं कि एन्काउंटर फ़र्जी था लेकिन वह आतंकियों के संपर्क में थी या नहीं थी इस आरोप से मुक्त नहीं हुई है। चूंकि मामला राजनैतिक रंग पकड़ गया तो अब इशरत जहाँ की माँ भी नेताओं के हाथ कठपुतली बनी हुई है।
ये सारी बातें आम चर्चा में हैं यदि आप मुम्ब्रा के आसपास रहते हों तो जरा जा कर खुद इस चर्चा को सुन सकते हैं जो कि मीडिया से अलग ही चल रही है। ये सारी बातें अफ़वाहें भी हो सकती हैं लेकिन बात सोचने वाली है कि लड़की तीन लड़कों के साथ घूमने इतनी दूर जा रही है और घर वालें खुश हैं किसी को कोई एतराज़ नहीं......
डॉ.रूपेश जी चाहें तो मुम्ब्रा मात्र पच्चीस मिनट में पहुंच सकते हैं।
जय जय भड़ास

6 टिप्पणियाँ:

शामस गुजरात मे जो २ रेल की बोगी मुसलमानों ने पेट्रोल डाल कर आग के हवाले कर दी थी ने कहा…

जिसमे सारे हिंदू यात्री भरे हुए थे ,क्या वो भी फर्जी था , या उस बारे मे बोलते हुए तुम्हारे पिछवाड़े मे आग लग जाती है , जरा उस के बारे मे भी कुछ बोलो ,इतने हिन्दुओ को जला कर मार डाला , इस बारे मे कोई बात नहीं बोली ?

@वह एक उजड्ड किस्म की घरवालों की बात न मानने वाली आवारा किस्म की लड़की थी। ने कहा…

सारे मुस्लिम आतंकवादी खुले सांड की तरह घूम रहे है ,जिस मे वो भी एक थी ,तो अब तुम्हे क्या हुआ ,तुम भी टेक मुस्लमान हो ,और यहाँ किसी को क्या पता की तुम आतंकवादी हो या पाकिस्तानी

शम्स भडवे अब फट गई क्या ने कहा…

जब तुझे ही आतंकवादी बता दिया गाया तो साले बस फाट गई ,क्या अपनी सिलवाने गया हुआ है क्या जो कुछ भी बोलते नहीं बन रहा ...:)

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

भड़ास में घुसे मुखौटाधारी तुम्हारे जैसे शम्स भाई की क्या फाड़ेंगे बल्कि उन्होंने तुम्हारी फाड़ रखी है इसी कारण तुम अपनी फटी हुई लेकर सामने आने की बजाए मुखौटा लगा कर कीड़े की तरह रेंग रहे हो।
जय जय भड़ास

पुरे भड़ास को बचाने का ठेका ले कर बेचारा रप्पू फाड़ने सिलने का काम करने लगा और शम्स की सीलने मे लग गाया ने कहा…

सिलते रहो रप्पू , खाई तो तुम्हारी झोला छाप डाक्टरी काम आये ....:)

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

ये चूतियम सल्फेट अपने फटे के साथ यहाँ आ गया है,
बेहतर ऐसे चूतिये को तवज्जो न दें.

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